कथा: सुनाने वाली कहानियाँ
अख़बार बाँटने वाला कलाम
सच्ची कहानी · लगभग 3 मिनट · 16वाँ सप्ताह
नन्हा अब्दुल कलाम सुबह-सुबह अख़बार बाँटता है और उड़ने के सपने देखता है।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
ये एक सच्ची कहानी है। कई साल पहले, रामेश्वरम में अब्दुल कलाम नाम का एक लड़का रहता था। रामेश्वरम भारत के दक्षिण में एक छोटा-सा टापू वाला शहर है। उसके चारों ओर समुंदर है।
उसके घर में ज़्यादा पैसे नहीं थे। पर घर प्यार से भरा था। नन्हा कलाम अपने परिवार की मदद करना चाहता था। इसलिए उसने एक काम शुरू किया। वो लोगों के घरों तक अख़बार पहुँचाने लगा।
वो रोज़ सूरज निकलने से पहले उठ जाता। आसमान तब भी अँधेरा और शांत होता। पूरा शहर सो रहा होता। समुंदर की ठंडी हवा उसके चेहरे को छूती। लहरों की धीमी, लगातार आवाज़ आती रहती। श्श्श... श्श्श...
वो अख़बारों का बंडल उठाता। और सोई हुई गलियों में निकल पड़ता।
एक अख़बार, एक दरवाज़ा, एक-एक कदम।
वो एक गली से दूसरी गली जाता। एक-एक घर पर अख़बार छोड़ता जाता। धीरे-धीरे आसमान गहरे नीले से हल्का गुलाबी हो जाता। शहर जागने लगता। दरवाज़े खुलते। लोग बाहर आकर ख़बरें पढ़ते।
एक अख़बार, एक दरवाज़ा, एक-एक कदम।
जब सारे अख़बार बँट जाते, तो कलाम स्कूल जाता। उसे पढ़ना बहुत अच्छा लगता था। वो खूब मन लगाकर पढ़ता था।
एक और चीज़ थी, जो नन्हे कलाम को बहुत प्यारी थी। उसे चिड़ियों को उड़ते देखना बहुत अच्छा लगता था।
समुंदर के ऊपर चिड़ियाँ लहरों से ऊँची उड़तीं। वो अपने पंख पूरे फैला देतीं। हवा पर ऊपर-नीचे, कितनी आसानी से तैरतीं। कलाम उन्हें अचरज से देखता रहता। वो सोचता, ये इतनी आसानी से कैसे उड़ लेती हैं?
और उसके मन में एक सपना पलने लगा। उड़ने का सपना।
वो लड़का बड़ा हुआ। वो मेहनत करता रहा, और सपने देखता रहा। उसने पढ़ाई की कि हवाई जहाज़ कैसे उड़ते हैं। वो एक वैज्ञानिक बना। उसने भारत के लिए ऐसे रॉकेट बनाने में मदद की, जो आसमान को पार करके अंतरिक्ष तक पहुँचे।
और एक दिन, रामेश्वरम का वो अख़बार बाँटने वाला लड़का, भारत का राष्ट्रपति बना।
पूरे देश के बच्चे डॉ. कलाम से बहुत प्यार करते थे। वो भी बच्चों से बहुत प्यार करते थे। वो अक्सर बच्चों से कहते कि बड़े सपने देखो, और उन सपनों के लिए मेहनत करो।
ये सब छोटे-छोटे कदमों से शुरू हुआ था। समुंदर किनारे की शांत सुबहों से, अख़बारों के एक बंडल से, और चिड़ियों से भरे आसमान से।
एक अख़बार, एक दरवाज़ा, एक-एक कदम।
आज भी जब रामेश्वरम में समुंदर के ऊपर चिड़ियाँ उड़ती हैं, लहरें वैसे ही गाती हैं। श्श्श... श्श्श... और सुबह का आसमान आज भी वैसे ही हल्का गुलाबी हो जाता है। ये वही आसमान है, जिसने कभी बड़े सपने वाले उस लड़के को देखा था।
“मेहनत और बड़े सपने साथ चलते हैं।”
गर्भ संवाद
नन्हे कलाम ने हर सुबह मेहनत की, और उड़ने के सपने देखे। ऊँचे सपने देखना, नन्ही जान। तुम्हारे हर छोटे कदम पर मैं तुम्हारे साथ रहूँगी।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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