श्लोक
गर्भ संस्कार के पावन श्लोक, माँ और शिशु के लिए।
हज़ारों सालों से भारतीय परिवार गर्भ संस्कार के मंत्रों और श्लोकों की मधुर ध्वनि से नन्हे मेहमान का स्वागत करते आए हैं। वैदिक काल में गर्भ के लिए मंत्र पढ़े जाते थे, और सीमंतोन्नयन संस्कार में होने वाली माँ के लिए गीत-संगीत होता था। आयुर्वेद कहता है कि गर्भवती स्त्री को मीठी बातें सुननी चाहिए और उससे प्यार से पेश आना चाहिए। आज विज्ञान भी इसकी कुछ बातों को सही मानता है: गर्भावस्था के बीच के महीनों से शिशु आवाज़ें सुनकर हरकत करने लगता है, आख़िरी महीनों में आपकी आवाज़ पहचानने लगता है, और जन्म के बाद आपकी आवाज़ को दूसरी आवाज़ों से ज़्यादा पसंद करता है।
शुरुआत इस श्लोक से
अँधेरे से उजाले की ओर ले चलो
मुझे असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो।
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संतान की कामना और शुरुआती हफ़्ते
नए जीवन के लिए रची गई भारत की कुछ सबसे पुरानी प्रार्थनाओं से शुरुआत कीजिए। · गर्भधारण से पहले और 8वें सप्ताह तक
- संतान की कामना और शुरुआती हफ़्तेविष्णुर्योनिं कल्पयतु त्वष्टा रूपाणि पिंशतु ।आ सिञ्चतु प्रजापतिर्धाता गर्भं दधातु ते ॥विष्णु गर्भ को तैयार करेंमध्यम · गर्भधारण से पहले और 8वें सप्ताह तक
- संतान की कामना और शुरुआती हफ़्तेगर्भं धेहि सिनीवालि गर्भं धेहि सरस्वति ।गर्भं ते अश्विनौ देवावा धत्तां पुष्करस्रजा ॥हे सिनीवाली, हे सरस्वती, शिशु को थामे रखोमध्यम · गर्भधारण से पहले और 8वें सप्ताह तक
- संतान की कामना और शुरुआती हफ़्तेहिरण्ययी अरणी यं निर्मन्थतो अश्विना ।तं ते गर्भं हवामहे दशमे मासि सूतवे ॥दसवें महीने में जन्ममध्यम · गर्भधारण से पहले और 8वें सप्ताह तक
- संतान की कामना और शुरुआती हफ़्तेमम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम् ।सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥मैं ही महान गर्भ हूँमध्यम · गर्भधारण से पहले और 8वें सप्ताह तक
- संतान की कामना और शुरुआती हफ़्तेसर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः ।तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता ॥बीज देने वाले पितामध्यम · गर्भधारण से पहले और 8वें सप्ताह तक
- संतान की कामना और शुरुआती हफ़्तेदेवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥संतान गोपाल मंत्रमध्यम · गर्भधारण से पहले और 8वें सप्ताह तक
पहली तिमाही में राहत
शुरुआत के सबसे मुश्किल हफ़्तों के लिए छोटे और सरल श्लोक। · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतमात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः ।आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥आती-जाती लहरों को सह लेंमध्यम · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतयुक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु ।युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ॥खान-पान, नींद और काम में संतुलनमध्यम · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतसर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥हर डर से हमारी रक्षा करेंमध्यम · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतवक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥वक्रतुंड महाकायमध्यम · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतअनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते ।तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥उनकी ज़रूरतों का भार मैं उठाता हूँमध्यम · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतअसतो मा सद्गमय ।तमसो मा ज्योतिर्गमय ।मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥अँधेरे से उजाले की ओर ले चलोमध्यम · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतओमित्येतदक्षरमिदं सर्वम् ।ॐ, पहली ध्वनिछोटा · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतनासै रोग हरै सब पीरा ।जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥नासै रोग हरै सब पीराछोटा · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतबुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिएमध्यम · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतसमुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले ।विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे ॥धरती माँ को सुबह का प्रणाममध्यम · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतकराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती ।करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥सुबह उठते ही हथेलियों के दर्शनमध्यम · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतया देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥संतोष के रूप में देवीमध्यम · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतदुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः ।वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥दुख और सुख में स्थिरमध्यम · 4–13 सप्ताह
- पहली तिमाही में राहतॐ गं गणपतये नमः ॥ॐ गं गणपतये नमःछोटा · 4–13 सप्ताह
गर्भ रक्षा
देवी माँ से प्रार्थना कि वे आपके शिशु की रक्षा करें। · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षायथेयं पृथिवी मही भूतानां गर्भमादधे ।एवा ते ध्रियतां गर्भो अनु सूतुं सवितवे ॥जैसे धरती सबको सँभाले है, वैसे ही आपका शिशु सँभला रहेमध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षायथेयं पृथिवी मही दाधारेमान्वनस्पतीन् ।एवा ते ध्रियतां गर्भो अनु सूतुं सवितवे ॥जैसे धरती पेड़ों को थामे हैमध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षायथेयं पृथिवी मही दाधार पर्वतान्गिरीन् ।एवा ते ध्रियतां गर्भो अनु सूतुं सवितवे ॥जैसे धरती पहाड़ों को थामे हैमध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षायथेयं पृथिवी मही दाधार विष्ठितं जगत् ।एवा ते ध्रियतां गर्भो अनु सूतुं सवितवे ॥जैसे धरती पूरे संसार को थामे हैमध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षाश्रीमाधवीकाननस्थे गर्भरक्षाम्बिके पाहि भक्तां स्तुवन्तीम् ॥वापीतटे वामभागे वामदेवस्य देवस्य देवि स्थिता त्वम् ।मान्या वरेण्या वदान्या पाहि गर्भस्थजन्तून् तथा भक्तलोकान् ॥गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र – टेक और श्लोक 1लंबा · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षाश्रीगर्भरक्षापुरे या दिव्यसौन्दर्ययुक्ता सुमाङ्गल्यगात्री ।धात्री जनित्री जनानां दिव्यरूपां दयार्द्रां मनोज्ञां भजे त्वाम् ॥गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र – श्लोक 2मध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षाकल्याणदात्रीं नमस्ये वेदिकाढ्यस्त्रिया गर्भरक्षाकरीं त्वाम् ।बालैः सदा सेविताङ्घ्रिं गर्भरक्षार्थमारादुपेतैरुपेताम् ॥गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र – श्लोक 4मध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षाहे शङ्कर स्मरहर प्रमथाधिनाथ मन्नाथ साम्ब शशिचूड हर त्रिशूलिन् ।शम्भो सुखप्रसवकृद्भव मे दयालो हे माधवीवननिवास सदावनं माम् ॥गर्भरक्षाम्बिका – प्रसव के समय का श्लोकमध्यम · 4–40 सप्ताह और प्रसव के समय
- गर्भ रक्षाब्रह्मणाग्निः संविदानो रक्षोहा बाधतामितः ।अमीवा यस्ते गर्भं दुर्णामा योनिमाशये ॥गर्भ से रोग दूर भगाएँमध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षाशूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके ।घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च ॥त्रिशूल से हमारी रक्षा करोमध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षाया देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥माँ के रूप में देवीमध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षासिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया ।शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ॥स्कंदमाता – गोद में शिशु लिए माँमध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षासर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥सर्वमंगल मांगल्येमध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षाभूत पिसाच निकट नहिं आवै ।महाबीर जब नाम सुनावै ॥डर पास नहीं फटकताछोटा · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षाॐ गर्भरक्षाम्बिकायै च विद्महे मङ्गलदेवतायै च धीमहि ।तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥गर्भरक्षाम्बिका गायत्रीमध्यम · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
- गर्भ रक्षाॐ शरवणभवाय नमः ॥ॐ शरवणभवाय नमःछोटा · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
शिशु से जुड़ाव (जब शिशु सुनने लगे)
अब शिशु आवाज़ पर प्रतिक्रिया देने लग सकता है — रोज़ उसे अपनी आवाज़ में कुछ मीठा सुनाइए। · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावदिष्ट्याम्ब ते कुक्षिगतः परः पुमानंशेन साक्षाद्भगवान्भवाय नः ।माभूद्भयं भोजपतेर्मुमूर्षोर्गोप्ता यदूनां भविता तवात्मजः ॥गर्भवती देवकी से देवताओं ने कहा — डरो मतमध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावऋषिः कारुणिकस्तस्याः प्रादादुभयमीश्वरः ।धर्मस्य तत्त्वं ज्ञानं च मामप्युद्दिश्य निर्मलम् ॥गर्भवती कयाधु को नारद का उपदेशमध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावतत्तु कालस्य दीर्घत्वात्स्त्रीत्वान्मातुस्तिरोदधे ।ऋषिणानुगृहीतं मां नाधुनाप्यजहात्स्मृतिः ॥प्रह्लाद को याद रहामध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावजा दिन तें हरि गर्भहिं आए ।सकल लोक सुख संपति छाए ॥मंदिर महँ सब राजहिं रानीं ।सोभा सील तेज की खानीं ॥जब प्रभु गर्भ में आए, चारों ओर ख़ुशी छा गईमध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावॐ सह नाववतु ।सह नौ भुनक्तु ।सह वीर्यं करवावहै ।तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥हम साथ-साथ सुरक्षित रहेंमध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावॐ भूर्भुवः स्वः ।तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि ।धियो यो नः प्रचोदयात् ॥गायत्री मंत्रमध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावअधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥मधुराष्टकम् – श्लोक 1मध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावमातृदेवो भव ।पितृदेवो भव ।आचार्यदेवो भव ।अतिथिदेवो भव ।माता-पिता को देवता मानेंछोटा · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावमृत्युः सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम् ।कीर्तिः श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा ॥जो अभी जन्म लेंगे, उनका स्रोतमध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावपिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः ।वेद्यं पवित्रमोङ्कार ऋक्साम यजुरेव च ॥आप ही जगत के माता-पिता हैंमध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावसत्यव्रतं सत्यपरं त्रिसत्यं सत्यस्य योनिं निहितं च सत्ये ।सत्यस्य सत्यमृतसत्यनेत्रं सत्यात्मकं त्वां शरणं प्रपन्नाः ॥सत्यव्रतम् – देवकी के गर्भ में भगवान की स्तुतिमध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ाववेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥मधुराष्टकम् – श्लोक 3मध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावगीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥मधुराष्टकम् – श्लोक 4मध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावकरणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् ।वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥मधुराष्टकम् – श्लोक 5मध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावगुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥मधुराष्टकम् – श्लोक 6मध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावगोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् ।दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥मधुराष्टकम् – श्लोक 7मध्यम · 18–28 सप्ताह
- शिशु से जुड़ावगोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥मधुराष्टकम् – श्लोक 8मध्यम · 18–28 सप्ताह
संतान के अच्छे गुण
जो गुण आप अपनी संतान में देखना चाहती हैं, उन्हें बोलकर दोहराइए। · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणया कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता ।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता ।सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥या कुन्देन्दु – सरस्वती वंदनालंबा · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणसरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥सरस्वति नमस्तुभ्यंमध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणबुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वमरोगता ।अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत् ॥बुद्धिर्बलं यशो धैर्यंमध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणअभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः ।दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ॥दैवी गुण – भाग 1मध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणअहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम् ।दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् ॥दैवी गुण – भाग 2मध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणतेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता ।भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत ॥दैवी गुण – दैवी स्वभाव लेकर जन्मे व्यक्ति केमध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणअद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च ।निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥सब पर दयामध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम् ।आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवमुपास्महे ॥हयग्रीव – सारी विद्याओं के आधारमध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणविद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम् ।पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम् ॥विद्या ददाति विनयम्मध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणसत्यमेव जयते नानृतम् ।सत्यमेव जयतेछोटा · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणउद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् ।आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥ख़ुद को ऊपर उठाइएमध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणया देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥दया के रूप में देवीमध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणया देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥बुद्धि के रूप में देवीमध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणया देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥स्मृति के रूप में देवीमध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणसन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः ।मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः ॥संतुष्ट और अडिगमध्यम · 16–32 सप्ताह
- संतान के अच्छे गुणॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ॥ॐ ऐं सरस्वत्यै नमःछोटा · 16–32 सप्ताह
प्रसव की तैयारी (तीसरी तिमाही)
हिम्मत और ख़ुशी के श्लोकों से मन को प्रसव के लिए तैयार कीजिए। · 28–37 सप्ताह
- प्रसव की तैयारीयथा वातः पुष्करिणीं समिङ्गयति सर्वतः ।एवा ते गर्भ एजतु निरैतु दशमास्यः ॥जैसे कमल-ताल पर बहती हवामध्यम · 28–37 सप्ताह
- प्रसव की तैयारीराकामहं सुहवां सुष्टुती हुवे शृणोतु नः सुभगा बोधतु त्मना ।सीव्यत्वपः सूच्याच्छिद्यमानया ददातु वीरं शतदायमुक्थ्यम् ॥राका, पूर्णिमा की देवीमध्यम · 24–34 सप्ताह (सीमंतोन्नयन)
- प्रसव की तैयारीसोम एव नो राजेमा मानुषीः प्रजाः ।अविमुक्तचक्र आसीरंस्तीरे तुभ्यमसौ ॥सीमंतोन्नयन का गीतमध्यम · 24–34 सप्ताह (सीमंतोन्नयन)
- प्रसव की तैयारीवषट् ते पूषन्नस्मिन्त्सूतावर्यमा होता कृणोतु वेधाः ।सिस्रतां नार्यृतप्रजाता वि पर्वाणि जिहतां सूतवा उ ॥वह तनाव छोड़े और जन्म देने को तैयार होमध्यम · 28–37 सप्ताह
- प्रसव की तैयारीचतस्रो दिवः प्रदिशश्चतस्रो भूम्या उत ।देवा गर्भं समैरयन्तं व्यूर्णुवन्तु सूतवे ॥चारों दिशाओं ने रचा शिशुमध्यम · 28–37 सप्ताह
- प्रसव की तैयारीभए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी ।हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ॥लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी ।भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी ॥भए प्रगट कृपाला – पद 1लंबा · 28–37 सप्ताह
- प्रसव की तैयारीनौमी तिथि मधु मास पुनीता ।सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता ॥मध्यदिवस अति सीत न घामा ।पावन काल लोक बिश्रामा ॥नवमी का दिन, न सर्दी न गर्मीमध्यम · 28–37 सप्ताह
- प्रसव की तैयारीको नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो ॥संकटमोचन की टेकछोटा · 28–37 सप्ताह
- प्रसव की तैयारीशरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥शरणागत – शरण में आने वालों की रक्षकमध्यम · 28–37 सप्ताह
- प्रसव की तैयारीया देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥धैर्य के रूप में देवीमध्यम · 28–37 सप्ताह
- प्रसव की तैयारीकर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥अपना काम कीजिए, फल की चिंता छोड़िएमध्यम · 28–37 सप्ताह
- प्रसव की तैयारीयत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ।तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ॥जहाँ ज्ञान और मेहनत मिलते हैंमध्यम · 28–37 सप्ताह
प्रसव का समय
प्रसव के दौरान मन को सहारा देने वाले जाने-पहचाने शब्द। · 37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय
- प्रसव का समयक्षितिर्जलं वियत्तेजो वायुर्विष्णुः प्रजापतिः ।सगर्भां त्वां सदा पान्तु वैशल्यं च दिशन्तु ते ॥चरक का प्रसव मंत्रमध्यम · 37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय
- प्रसव का समययथा वातो यथा वनं यथा समुद्र एजति ।एवा त्वं दशमास्य सहावेहि जरायुणा ॥हवा, जंगल और सागर की तरहमध्यम · 37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय
- प्रसव का समयदश मासाञ्छशयानः कुमारो अधि मातरि ।निरैतु जीवो अक्षतो जीवो जीवन्त्या अधि ॥जीवित माँ से, जीवित और सही-सलामतमध्यम · 36–40 सप्ताह और प्रसव की शुरुआत में
- प्रसव का समयवि जिहीष्व वनस्पते योनिः सूष्यन्त्या इव ।श्रुतं मे अश्विना हवं सप्तवध्रिं च मुञ्चतम् ॥खुल जाओ, जैसे पेड़ फटकर खुलता हैमध्यम · 37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय
- प्रसव का समययथा वातो यथा मनो यथा पतन्ति पक्षिणः ।एवा त्वं दशमास्य साकं जरायुणा पत ।अव जरायु पद्यताम् ॥हवा, मन और पंछियों की तरह तेज़मध्यम · 37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय
- प्रसव का समयश्री राम जय राम जय जय राम ॥श्री राम जय रामछोटा · 37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय
- प्रसव का समयसंकट कटै मिटै सब पीरा ।जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥संकट कटै मिटै सब पीराछोटा · 37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय
- प्रसव का समयॐसाँस छोड़ते हुए धीमा ॐछोटा · 37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय
- प्रसव का समयया देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥शक्ति के रूप में देवीमध्यम · 37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय
- प्रसव का समयपवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप ।राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥पवन तनय संकट हरनमध्यम · 37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय
माँ की सेहत और पोषण
हर थाली और हर गोली मन में धन्यवाद कहकर लीजिए। · किसी भी सप्ताह
- माँ की सेहत और पोषणत्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥महामृत्युंजय मंत्रमध्यम · किसी भी सप्ताह
- माँ की सेहत और पोषणअन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे ।ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥अन्नपूर्णा – भोजन से पहलेमध्यम · किसी भी सप्ताह
- माँ की सेहत और पोषणमाता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः ।बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥पार्वती मेरी माँ, शिव मेरे पितामध्यम · किसी भी सप्ताह
- माँ की सेहत और पोषणब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥ब्रह्मार्पणम् – भोजन का अर्पणमध्यम · किसी भी सप्ताह
- माँ की सेहत और पोषणअहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः ।प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम् ॥मैं पाचन की अग्नि हूँमध्यम · किसी भी सप्ताह
- माँ की सेहत और पोषणॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः ॥धन्वंतरि मंत्रमध्यम · किसी भी सप्ताह
- माँ की सेहत और पोषणअच्युतानन्त गोविन्द नामोच्चारणभेषजात् ।नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ॥नाम ही दवा हैमध्यम · किसी भी सप्ताह
- माँ की सेहत और पोषणआदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥सेहत के लिए सूर्य को नमस्कारमध्यम · किसी भी सप्ताह
- माँ की सेहत और पोषणॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः ।वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥द्यौः शांति – हर ओर शांतिलंबा · किसी भी सप्ताह
- माँ की सेहत और पोषणरोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥रोगानशेषान् – सारे रोग दूर करने वालीमध्यम · किसी भी सप्ताह
- माँ की सेहत और पोषणया देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥भूख के रूप में देवीमध्यम · किसी भी सप्ताह
नींद और शांत मन
मन को शांत करने और चैन की नींद के लिए मधुर श्लोक। · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनरामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम् ।शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति ॥रामं स्कन्दं – सोने से पहले का श्लोकमध्यम · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनशान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥शान्ताकारं – शांत स्वरूप विष्णुलंबा · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनकर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥कर्पूरगौरंमध्यम · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनॐ नमः शिवाय ।ॐ नमः शिवायछोटा · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते ।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥पूर्णमदः – पूर्ण से पूर्णमध्यम · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनश्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे ।सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥श्रीराम राम रामेतिमध्यम · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनयथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता ।योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः ॥जैसे हवा से दूर जलता दीपकमध्यम · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनमंगल भवन अमंगल हारी ।द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी ॥मंगल भवन अमंगल हारीछोटा · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनया देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥शांति के रूप में देवीमध्यम · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनया देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥नींद के रूप में देवीमध्यम · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ॐ नमो भगवते वासुदेवायछोटा · किसी भी सप्ताह
- नींद और शांत मनकृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ॥कृष्णाय वासुदेवाय हरयेमध्यम · किसी भी सप्ताह
शिशु का स्वागत
अपने नवजात शिशु के कान में धीरे से कहने के लिए पहले आशीर्वाद। · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतअङ्गादङ्गात्सम्भवसि हृदयादधिजायसे ।आत्मा वै पुत्रनामासि स जीव शरदः शतम् ॥मेरे हृदय से तुम्हारा जन्म (जातकर्म)मध्यम · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतअश्मा भव परशुर्भव हिरण्यमस्रुतं भव ।वेदो वै पुत्रनामासि स जीव शरदः शतम् ॥पत्थर जैसी मज़बूती, सोने जैसी चमकमध्यम · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतपश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतं शृणुयाम शरदः शतं प्रब्रवाम शरदः शतमदीनाः स्याम शरदः शतं भूयश्च शरदः शतात् ॥हम सौ शरद देखेंमध्यम · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै ।मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै ॥उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥भए प्रगट – वे मेरे गर्भ में रहेलंबा · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतमाता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा ।कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा ॥सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा ।यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा ॥भए प्रगट – नन्हे शिशु की तरह खेलोलंबा · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतकह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता ।माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता ॥करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता ।सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता ॥भए प्रगट – मैं आपकी स्तुति कैसे करूँलंबा · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतजो आनंद सिंधु सुखरासी ।सीकर तें त्रैलोक सुपासी ॥सो सुखधाम राम अस नामा ।अखिल लोक दायक बिश्रामा ॥आनंद के सागर – उनका नाम है राममध्यम · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतदेवक्यां देवरूपिण्यां विष्णुः सर्वगुहाशयः ।आविरासीद्यथा प्राच्यां दिशीन्दुरिव पुष्कलः ॥पूर्णिमा के चाँद जैसा कृष्ण का जन्ममध्यम · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतवचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥मधुराष्टकम् – श्लोक 2मध्यम · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतसर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥सर्वे भवन्तु सुखिनःमध्यम · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतया देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥सौभाग्य के रूप में देवीमध्यम · जन्म के बाद से
- शिशु का स्वागतबिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार ।निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ॥बिप्र धेनु सुर संत हितमध्यम · जन्म के बाद से
गर्भावस्था में जाने-माने पाठ
क्या प्रेगनेंसी में हनुमान चालीसा या गायत्री मंत्र पढ़ सकती हैं? हर पेज पर इसका सच्चा जवाब है — हर श्लोक और उसके अर्थ के साथ।
- प्रेगनेंसी में हनुमान चालीसा
- प्रेगनेंसी में गायत्री मंत्र
- प्रेगनेंसी में महामृत्युंजय मंत्र
- गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक
- प्रेगनेंसी में मधुराष्टकम्: आठों श्लोक
- प्रेगनेंसी में रामायण की चौपाई: भए प्रगट कृपाला और राम जन्म
- या देवी सर्वभूतेषु: गर्भावस्था के लिए 11 मंत्र
- प्रेगनेंसी में दुर्गा सप्तशती
- संतान गोपाल मंत्र: अर्थ और जपने की विधि
- ऋग्वेद 10.184: आने वाली संतान के लिए वैदिक सूक्त
- प्रेगनेंसी में ॐ का जाप
स्रोत
हम किसी शोध की बस उतनी ही बात करते हैं, जितनी उसमें सच में पाई गई। ज़्यादातर शोध थोड़े-से लोगों पर हुए हैं, और कोई भी शोध आपके डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकता। ज़रूरी सूचना पढ़ें
गर्भ में शिशु कब से आवाज़ पर प्रतिक्रिया देने लगता है
- शोध में क्या पता चला
- माँ के पेट पर रखे स्पीकर से आवाज़ सुनाने पर, गर्भ में शिशु सबसे पहले लगभग 19वें सप्ताह में हरकत करते दिखे। 27वें सप्ताह तक लगभग सभी शिशु भारी, नीचे सुर वाली आवाज़ों पर प्रतिक्रिया देने लगे थे।
- यह शोध क्या नहीं बताता
- इसमें सिर्फ़ ‘बीप’ जैसी सादी ध्वनियाँ सुनाई गई थीं — न बोली, न संगीत, न जप। इसलिए यह नहीं बताता कि शिशु शब्द समझते हैं, या श्लोक, कहानी और संगीत सुनने से उन्हें कोई फ़ायदा होता है।
Hepper & Shahidullah (1994). Development of fetal hearing. Archives of Disease in Childhood - Fetal and Neonatal Edition 71(2):F81-F87.
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जन्म से पहले माँ की आवाज़ पहचानना
- शोध में क्या पता चला
- गर्भावस्था के आख़िरी दिनों में, जब शिशुओं को उनकी अपनी माँ के पढ़ने की रिकॉर्डिंग सुनाई गई तो उनकी धड़कन बढ़ गई, और किसी अनजान महिला की आवाज़ पर घट गई। इससे लगता है कि जन्म से पहले ही शिशु माँ की आवाज़ को दूसरी आवाज़ों से अलग पहचान सकते हैं।
- यह शोध क्या नहीं बताता
- यह नहीं दिखाता कि शिशु शब्द समझते हैं, या आपकी आवाज़ सुनने से उनकी सेहत या विकास बेहतर होता है। यह प्रयोगशाला का परीक्षण था, जिसमें रिकॉर्डिंग पेट के पास तेज़ आवाज़ में बजाई गई — यह रोज़ की बातचीत जैसा नहीं था।
Kisilevsky et al. (2003). Effects of experience on fetal voice recognition. Psychological Science 14(3):220-224.
नवजात शिशु माँ की आवाज़ ज़्यादा पसंद करते हैं
- शोध में क्या पता चला
- एक छोटे-से शोध में, कुछ ही दिन के नवजात शिशुओं ने चुसनी चूसने का ढंग बदलकर अपनी माँ की आवाज़ किसी दूसरी महिला की आवाज़ से ज़्यादा बार सुनी। यानी जन्म के पहले दिनों से ही शिशु माँ की आवाज़ को ज़्यादा पसंद करते हैं।
- यह शोध क्या नहीं बताता
- इस शोध में गर्भावस्था के दौरान कुछ नहीं परखा गया। इसलिए यह साबित नहीं करता कि यह पसंद गर्भ में ही बनी। यह भी नहीं दिखाता कि गर्भावस्था में बात करने, पढ़कर सुनाने या जप करने से शिशु ज़्यादा सेहतमंद या होशियार होते हैं, या माँ से उनका जुड़ाव गहरा होता है।
DeCasper & Fifer (1980). Of human bonding: newborns prefer their mothers' voices. Science 208(4448):1174-1176.