शांति: सुकून भरी कहानियाँ
छोटा सा दीया
नई कहानी · लगभग 2 मिनट · 12वाँ सप्ताह
मिट्टी का छोटा दीया हवा से घबराता है, फिर पूरे कमरे को रोशन करता है।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
शाम धीरे से उतर आती है। बाहर आसमान गहरा नीला हो जाता है। हमारे कमरे में अँधेरा होने लगा है।
हम खिड़की के पास ज़मीन पर बैठते हैं। हम मिट्टी का एक छोटा सा दीया उठाते हैं। वो गोल है, चिकना है, मिट्टी के रंग का। हम उसे धीरे से जलाते हैं। एक नन्ही सी लौ जाग उठती है... और दीया जगमगाने लगता है।
नन्हा दीया इधर-उधर देखता है। कमरा बड़ा है। उसकी लौ इतनी छोटी है। "अरे," वो धीरे से कहता है। "क्या मैं काफ़ी हूँ? मेरी रोशनी तो बहुत छोटी है।"
तभी खिड़की से हवा अंदर आती है। पर्दा हिलता है। नन्ही लौ झुकती है, डोलती है। "ओह," दीया धीरे से कहता है। "अगर हवा मेरे लिए बहुत तेज़ हुई तो?"
हम अपने हाथों से उसे धीरे से ओट देते हैं। हमारे हाथ गरम हैं। और हवा बस हल्की सी है। वो पर्दे को हिलाती है... लौ को थोड़ा सा हिलाती है... और फिर निकल जाती है। सर्र... और हवा चली गई।
लौ फिर से सीधी खड़ी हो जाती है। वो बिना डोले, शांत होकर जगमगाती है। "मैं अब भी यहीं हूँ," दीया कहता है। "मेरी रोशनी छोटी है... पर काफ़ी है।"
अब दीया एक बार फिर चारों तरफ़ देखता है। उसकी गरम रोशनी दीवारों को छूती है। आले में रखी छोटी सी घंटी को छूती है। हमारे चेहरों को छूती है, सुनहरी और नरम। छत पर हल्की-हल्की परछाइयाँ नाचती हैं।
"देखो," दीया कहता है। "मैं पूरे आसमान को रोशन नहीं कर सकता। पर इस एक कमरे को रोशन कर सकता हूँ। मेरी रोशनी छोटी है... पर काफ़ी है।"
हम दीये के पास सटकर बैठते हैं। कमरा शांत है, गर्माहट से भरा है। बाहर तारे एक-एक करके निकल आते हैं। हर तारा छोटा है। हर तारा चमक रहा है।
हम साँस अंदर लेते हैं... धीमी और आसान। और बाहर... नन्ही लौ जगमगाती रहती है। उसकी रोशनी छोटी है... पर काफ़ी है।
“छोटी सी रोशनी भी रोशनी होती है।”
गर्भ संवाद
नन्हे दीये ने पूरे कमरे को रोशन कर दिया। तुम मेरी छोटी सी रोशनी हो। तुम्हारी नन्ही रोशनी से मेरा पूरा दिल जगमगा उठता है, मेरी जान।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
सुनाने के लिए और कहानियाँ
सभी कहानियाँ13वाँ सप्ताह · 3 मिनट
अंजना माँ और पवन का तोहफ़ा
12वाँ सप्ताह · 3 मिनट
धरती से भी भारी कौन?
12वाँ सप्ताह · 2 मिनट
पहला पड़ाव पूरा हुआ
यहाँ हर कहानी प्यार से, शांति से ख़त्म होती है। डराने वाले या दुखी अंत हम नहीं रखते, और पुरानी कथाएँ आसान शब्दों में सुनाते हैं।
"सच्ची कहानी" वाली कहानियों को छोड़कर हमारी सारी कहानियाँ काल्पनिक हैं, और एआई की मदद से लिखी गई हैं। गर्भशिक्षा मन के सुकून और शिशु से जुड़ाव के लिए है, डॉक्टरी सलाह नहीं। ज़रूरी सूचना पढ़ें