शांति: सुकून भरी कहानियाँ
नदी का गीत
नई कहानी · लगभग 2 मिनट · 29वाँ सप्ताह
छोटी-सी नदी खेतों और गाँवों से गुनगुनाती हुई घर पहुँचती है।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
ऊँचे पहाड़ पे ठंडी सुबह, छोटी-सी नदिया चली अपनी राह। धीमे-धीमे गीत वो गाए, नीचे-नीचे बहती जाए। गुन-गुन, गुन-गुन, नदिया गाती, घर को जाती।
हरे-भरे खेत जो आए, धान के पौधे सिर हिलाएँ। पेड़ के नीचे किसान बैठा, नदिया का गीत लगा उसे मीठा। गुन-गुन, गुन-गुन, नदिया गाती, घर को जाती।
छोटा-सा गाँव, छोटी-सी गली, मंदिर में घंटी टन-टन बजी। घाट पे बच्चे हँसें, बुलाएँ, नदिया मुस्काकर आगे जाए। गुन-गुन, गुन-गुन, नदिया गाती, घर को जाती।
शाम हुई, सूरज धीरे से ढला, गायें लौटीं, आँगन में दीया जला। पंछी उड़कर घर को आए, नदिया धीमी लोरी गाए। गुन-गुन, गुन-गुन, नदिया गाती, घर को जाती।
गोल-गोल चाँद निकला, रात हुई, नदिया सागर से जा मिली। सागर बड़ा, सागर गहरा, उसने नदिया को प्यार से घेरा। गुन-गुन, गुन-गुन, नदिया गाती, घर को जाती।
नन्ही जान, तुम भी गाओ, मेरे संग गुनगुनाओ। राह तुम्हें कहीं भी ले जाए, ये गीत तुम्हें घर ले आए। गुन-गुन, गुन-गुन, नदिया गाती, घर को जाती।
“प्यारा सा गीत हमें घर तक ले जाता है।”
गर्भ संवाद
नदी गुनगुनाती हुई अपने घर पहुँच गई। मेरे साथ गुनगुनाओ, नन्ही जान। हमारा गीत हमें हमेशा घर ले आएगा।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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