शांति: सुकून भरी कहानियाँ
जैसलमेर की रेगिस्तानी रात
नई कहानी · लगभग 3 मिनट · 25वाँ सप्ताह
जैसलमेर के रेगिस्तान की एक धीमी, ठंडी रात, तारों भरे आसमान के नीचे।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
सूरज रेत के टीलों के पीछे ढल गया है। दूर, जैसलमेर का पुराना किला आख़िरी रोशनी में सुनहरा चमक रहा है। फिर धीरे-धीरे वह सुनहरापन फीका पड़ जाता है।
हम रेत पर एक नरम रज़ाई बिछाकर बैठे हैं। दिन गर्म था। पर अब रेगिस्तान ठंडा हो रहा है। चलो, महसूस करते हैं... हवा नरम हो रही है... रेत ठंडी हो रही है।
चलो, अपनी उँगलियाँ धीरे से रेत में डालते हैं... रेत नरम और बारीक है, आटे जैसी। ऊपर से ठंडी। गहराई में अब भी थोड़ी गुनगुनी।
धीरे... धीरे... रेगिस्तान सो रहा है।
हमसे थोड़ी दूर ऊँट आराम कर रहे हैं। वे अपनी लंबी टाँगें मोड़कर रेत पर बैठ जाते हैं। एक-एक करके सब बैठ जाते हैं। हिलते हैं, तो उनकी घंटियाँ धीरे से बजती हैं। टुन... टुन... टुन...
एक बूढ़े ऊँटवाले बाबा उनके लिए पानी लाते हैं। वे प्यार से उनकी गर्दन थपथपाते हैं। कोई पुरानी रेगिस्तानी धुन गुनगुनाते हैं। ऊँट धीरे-धीरे पानी पीते हैं। फिर अपनी लंबी, नरम पलकों वाली आँखें बंद कर लेते हैं।
टुन... टुन... घंटियाँ और धीमी हो जाती हैं।
धीरे... धीरे... रेगिस्तान सो रहा है।
अब चलो, ऊपर देखते हैं। ओह... आसमान! यहाँ शहर की कोई बत्ती नहीं है। तारों को कोई नहीं छिपाता। वे एक-एक करके निकलते हैं... फिर सैकड़ों में... फिर इतने कि गिने न जाएँ।
आसमान के बीच से तारों की एक हल्की, दूधिया नदी बहती है। कुछ तारे चमकीले और सफ़ेद हैं। कुछ नन्हे-नन्हे हैं, टिमटिमाते हुए। कुछ हल्के नीले लगते हैं, कुछ हल्के सुनहरे।
टीलों के ऊपर से एक धीमी हवा चलती है। श्श्श... वह रेत पर नरम लकीरें बनाती है। हमारे गालों को छूती है, ठंडी और प्यारी।
चलो, रज़ाई पर पीछे लेट जाते हैं... साँस अंदर लेते हैं... और बाहर छोड़ते हैं... रेत ने हमें थाम रखा है। आसमान हमें तारों भरी एक बड़ी चादर की तरह ढक रहा है।
पहले रेगिस्तान कितना बड़ा और खाली लग रहा था। इतनी सारी रेत। घर से इतनी दूर। पर अब समझ आता है, हम बिल्कुल अकेले नहीं हैं। ऊँट पास हैं। हवा पास है। और ऊपर हज़ारों नन्ही रोशनियाँ चमक रही हैं।
नीचे इतनी सारी रेत... और ऊपर इतनी सारी रोशनी।
धीरे... धीरे... रेगिस्तान सो रहा है।
एक ऊँट की घंटी एक बार और बजती है। टुन... फिर सब शांत। रात ठंडी है। तारे चमकते रहते हैं। और हम यहीं आराम करते हैं, धीमे-धीमे, सुकून से, इस बड़े, खुले आसमान के नीचे।
“रेगिस्तान में भी आसमान रोशनी से भरा होता है।”
गर्भ संवाद
ऊँट सो गए हैं, और तारे जाग रहे हैं। पूरा आसमान तुम्हारी रखवाली कर रहा है। इस सारी रोशनी के नीचे आराम से सो जाओ, नन्ही जान।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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