कथा: सुनाने वाली कहानियाँ
बीरबल ने गिने कौवे
पुरानी कथा, नए शब्दों में · लगभग 3 मिनट · 11वाँ सप्ताह
बादशाह अकबर बीरबल से पूछते हैं कि शहर में कितने कौवे हैं।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
बहुत समय पहले, आगरा शहर में अकबर नाम के एक बादशाह रहते थे। उनके एक दोस्त थे, बीरबल। बीरबल बहुत समझदार भी थे, और मज़ेदार भी।
एक धूप भरी सुबह, अकबर और बीरबल महल के बगीचे में टहल रहे थे। फव्वारे छप-छप कर रहे थे। ठंडी, नरम हवा चल रही थी। ऊपर बगीचे की दीवार पर बहुत सारे कौवे बैठे थे।
काँव, काँव, काँव! कौवे बोले।
अकबर ने ऊपर देखा। उनके मन में एक मज़ेदार ख़याल आया। वो मुस्कुराए और बीरबल की ओर मुड़े।
"बीरबल," उन्होंने कहा, "ज़रा ये बताओ। हमारे शहर में कितने कौवे हैं?"
सवाल बड़ा मुश्किल था। भला शहर का हर कौवा कोई कैसे गिन सकता है! पर बीरबल ज़रा भी परेशान नहीं हुए। उन्होंने आसमान की ओर देखा। उँगलियों पर कुछ गिनने लगे। फिर एक पल के लिए आँखें बंद कर लीं।
काँव, काँव, काँव! कौवे बोले।
बीरबल ने आँखें खोलीं। "जहाँपनाह," उन्होंने कहा, "हमारे शहर में पूरे पचानवे हज़ार, चार सौ तिरसठ कौवे हैं।"
अकबर ने भौंहें उठाईं। "पक्का, बीरबल? अगर हम गिनें, और कौवे कम निकले तो?"
"तो समझिए कुछ कौवे घूमने गए हैं," बीरबल बोले। "पास के गाँवों में अपनी मौसी और चाचा से मिलने।"
अकबर की आँखें चमक उठीं। "और अगर ज़्यादा निकले तो?"
बीरबल ने मुस्कुराकर सिर झुकाया। "तो समझिए कुछ कौवों के घर मेहमान आए हैं, जहाँपनाह। दूर-दूर से उनके रिश्तेदार मिलने आए हैं।"
एक पल के लिए अकबर चुप रहे। फिर वो हँस पड़े। इतना हँसे, इतना हँसे कि उन्हें बगीचे की बेंच पर बैठना पड़ा। बीरबल भी हँस पड़े। गुलाबों के पास काम करता माली भी मुस्कुराने लगा।
"बीरबल," अकबर ने कहा, "सारे कौवे तो कोई नहीं गिन सकता। पर तुमने मुस्कान से जवाब दे दिया।"
काँव, काँव, काँव! कौवे बोले। ऐसा लगा, जैसे वो भी हँस रहे हों।
धूप गुनगुनी थी। फव्वारे धीरे-धीरे गुनगुना रहे थे। और दोनों दोस्त मुस्कुराते हुए बगीचे में आगे टहलते रहे।
“मुस्कान मुश्किल सवाल का भी जवाब बन सकती है।”
गर्भ संवाद
बीरबल ने एक मुश्किल सवाल का जवाब मुस्कान से दिया। हँसी हमेशा तुम्हारे साथ रहे। आओ, हम दोनों साथ मिलकर मुस्कुराएँ।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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