कथा: सुनाने वाली कहानियाँ
कान्हा के मुँह में पूरी दुनिया
पुरानी कथा, नए शब्दों में · लगभग 3 मिनट · 10वाँ सप्ताह
यशोदा माँ नन्हे कान्हा के मुँह में पूरा आसमान देखती हैं।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
बहुत समय पहले, गोकुल गाँव में यशोदा माँ रहती थीं। उनके नन्हे कृष्ण बड़े ही नटखट थे। सब उन्हें प्यार से कान्हा बुलाते थे।
एक धूप भरे दिन कान्हा आँगन में अपने दोस्तों के साथ खेल रहे थे। सब बड़े पेड़ के नीचे दौड़ रहे थे, हँस रहे थे। पास में गायें आराम कर रही थीं, और उनकी घंटियाँ टन-टन बज रही थीं।
तभी कान्हा के दोस्त दौड़ते हुए यशोदा माँ के पास आए। "मैया, कान्हा ने मुँह में कुछ डाल लिया!"
यशोदा माँ मुस्कुराईं और सिर हिलाया। उन्होंने कान्हा को अपनी गोद में बिठा लिया। "कान्हा, ज़रा मुँह खोलो," उन्होंने कहा। "दिखाओ तो।" जैसे हर माँ कहती है।
कान्हा ने अपनी बड़ी-बड़ी, चमकती आँखों से माँ को देखा। फिर उन्होंने अपना नन्हा-सा मुँह पूरा खोल दिया। "आ...," उन्होंने कहा।
यशोदा माँ ने झुककर देखा। और फिर... उन्हें आसमान दिखा।
छोटा-सा आसमान नहीं। पूरा का पूरा, खुला आसमान। पास-दूर, हर तरफ़ तारे टिमटिमा रहे थे। चाँद चाँदी-सा, हल्का-हल्का चमक रहा था। सूरज सुनहरा-सा, गर्म रोशनी दे रहा था।
यशोदा माँ देखती रहीं, देखती रहीं, देखती रहीं।
उन्हें समुंदर की ओर बहती नदियाँ दिखीं। बर्फ़ से ढके ऊँचे-ऊँचे पहाड़ दिखे। हरे-भरे जंगल और शांत गाँव दिखे। यहाँ तक कि गोकुल भी दिखा। और उन्होंने खुद को भी देखा, गोद में अपने कान्हा को लिए हुए।
यशोदा माँ देखती रहीं, देखती रहीं, देखती रहीं। अचरज से उनकी आँखें बड़ी हो गईं। इतनी बड़ी दुनिया, उनके नन्हे कान्हा के अंदर कैसे समा गई?
फिर कान्हा ने मुँह बंद कर लिया। वो खिलखिलाकर हँस पड़े। अब वो फिर से वही नन्हे कान्हा थे, माथे पर घुँघराली लट वाले।
यशोदा माँ ने कोई सवाल नहीं पूछा। पूछने की ज़रूरत ही नहीं थी। उनका अचरज धीरे-धीरे प्यार में बदल गया। ढेर सारा, गर्माहट भरा, नरम-सा प्यार।
उन्होंने कान्हा को अपने पास खींचा और कसकर गले लगा लिया। उनके गोल-गोल गालों को चूम लिया। "मेरे कान्हा," उन्होंने धीरे से कहा। "तुम्हारे अंदर जो कुछ भी है, मुझे वो सब प्यारा है।"
ठंडी हवा पत्तों को सरसराती रही। गाय की घंटी धीरे से बजी, टन-टन। कान्हा ने माँ के कंधे पर सिर रखा और आँखें बंद कर लीं।
यशोदा माँ उन्हें देखती रहीं, देखती रहीं, देखती रहीं। और मुस्कुराती रहीं।
“हर बच्चे में एक पूरी दुनिया होती है।”
गर्भ संवाद
यशोदा माँ ने नन्हे कान्हा के अंदर पूरी दुनिया देखी। तुम्हारे अंदर पूरी दुनिया है, और मुझे वो सब प्यारी है। जैसे यशोदा माँ ने कान्हा को गले लगाया, वैसे ही मैं तुम्हें अपने पास रखती हूँ।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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