शांति: सुकून भरी कहानियाँ
चंदा मामा पास आए
नई कहानी · लगभग 2 मिनट · 32वाँ सप्ताह
हर रात चंदा मामा नन्ही जान को देखने थोड़ा और पास आते हैं।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
पहली रात, दूर पहाड़ी के पार, पतली-सी हँसी, चाँदी की धार। चंदा मामा चुपके से आए, दूर से ही बस मुस्काए। हर रात, चंदा मामा थोड़ा और पास आए।
अगली रात, आम की डाली, चंदा मामा ने जगह बना ली। पत्तों से झाँकें, पूछें ये बात, "कहाँ है नन्ही जान आज रात?" हर रात, चंदा मामा थोड़ा और पास आए।
तीसरी रात, छत पर आ बैठे, बिल्ली देखे, गैया देखे। धीरे से पूछें, "क्या यहीं है? नन्ही जान का घर यहीं कहीं है?" हर रात, चंदा मामा थोड़ा और पास आए।
चौथी रात, बड़े और गोल, खिड़की पे आए, कान दिए खोल। मेरे पेट पे चाँदनी बिछाई, धक-धक सुनकर हँसी आई। हर रात, चंदा मामा थोड़ा और पास आए।
चंदा मामा, कितने प्यारे, आए हैं बस तुम्हारे द्वारे। तुम्हारी मुस्कान देखना चाहें, बैठे हैं वो फैलाए बाँहें। हर रात, चंदा मामा थोड़ा और पास आए।
आँखें मूँदो, नन्ही जान, चंदा मामा रखें ध्यान। चंदा मामा पास हैं, मैं और भी पास, मेरी धड़कन, तुम्हारी धड़कन, एक साथ। हर रात, चंदा मामा थोड़ा और पास आए।
“कोई न कोई हमेशा प्यार से हमारा ध्यान रखता है।”
गर्भ संवाद
मैं हर रात तुम्हारा इंतज़ार करती हूँ। चंदा मामा भी तुम्हें देखने का इंतज़ार कर रहे हैं। एक दिन हम साथ बैठकर उन्हें देखेंगे।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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यहाँ हर कहानी प्यार से, शांति से ख़त्म होती है। डराने वाले या दुखी अंत हम नहीं रखते, और पुरानी कथाएँ आसान शब्दों में सुनाते हैं।
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