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कथा: सुनाने वाली कहानियाँ

शबरी के मीठे बेर

पुरानी कथा, नए शब्दों में · लगभग 3 मिनट · 33वाँ सप्ताह

शबरी खुशी-खुशी सालों इंतज़ार करती हैं, राम जी के लिए सबसे मीठे बेर रखती हैं।

लगभग 3 मिनटआराम से बैठिए, एक हाथ पेट पर रखिए, और धीरे-धीरे, प्यार से पढ़िए।

हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।

बहुत पहले की बात है। एक घने, हरे जंगल के किनारे शबरी नाम की एक औरत रहती थीं।

उनकी कुटिया छोटी थी, पर दिल बहुत बड़ा। जब वो छोटी थीं, तब उनके गुरु जी ने उनसे एक खास बात कही थी। "एक दिन राम जी तुम्हारे दरवाज़े पर आएँगे।"

उस दिन से शबरी इंतज़ार करने लगीं। और वो भी बड़े खुश मन से।

हर सुबह वो चिड़ियों के साथ उठ जातीं। नरम टहनियों वाली झाड़ू उठातीं। सर्र, सर्र, सर्र। कुटिया तक का रास्ता साफ़ और चिकना कर देतीं। हर नुकीला पत्थर उठा देतीं। हर काँटा हटा देतीं।

"शायद आज," वो धीरे से कहतीं। "शायद आज राम जी आएँगे।"

फिर वो बेर की झाड़ियों के पास जातीं। छोटे-छोटे, लाल, गोल बेर। शबरी एक-एक बेर तोड़तीं। हर बेर को ज़रा-सा चखतीं। खट्टा होता, तो अलग रख देतीं। मीठा होता, तो टोकरी में रख लेतीं।

"राम जी के लिए सिर्फ़ सबसे मीठे बेर," वो मुस्कुराकर कहतीं।

दिन बीते। फिर महीने। फिर साल। कितनी बारिशें आईं और चली गईं। पेड़ ऊँचे हो गए। शबरी के बाल चाँदनी जैसे सफ़ेद हो गए।

पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हर सुबह रास्ता बुहारा। हर दिन मीठे बेर चुने। इंतज़ार ने उन्हें कभी उदास नहीं किया। हर सुबह एक नई उम्मीद लेकर आती।

"शायद आज," वो धीरे से कहतीं। "शायद आज राम जी आएँगे।"

एक शांत सुबह, चिड़ियाँ कुछ ज़्यादा ही मीठा गा रही थीं। पेड़ों के बीच ठंडी हवा चल रही थी। फिर साफ़ रास्ते पर हल्के-हल्के कदमों की आहट आई।

"शायद आज," शबरी ने सोचा, जैसे हर रोज़ सोचती थीं।

उन्होंने ऊपर देखा। और सामने राम जी खड़े थे। लंबे, शांत, और सुबह के सूरज जैसी गरम मुस्कान लिए। साथ में उनके भाई भी थे।

शबरी की आँखें खुशी से चमक उठीं। उन्होंने हाथ जोड़ लिए। "आप आ गए," वो धीरे से बोलीं। "मुझे पता था, आप ज़रूर आएँगे।"

उन्होंने राम जी के बैठने के लिए एक साफ़ चटाई बिछाई। फिर बेरों की टोकरी आगे कर दी। "मैंने हर बेर चखा है," उन्होंने शरमाकर कहा। "आपके लिए सिर्फ़ मीठे बेर रखे हैं।"

राम जी मुस्कुराए। उन्होंने एक बेर उठाया और खाया। "कितना मीठा है," वो बोले। फिर दूसरा उठाया, फिर तीसरा। उन्होंने हर एक बेर आराम से, प्यार से खाया। एक भी बेर नहीं छोड़ा।

"ये दुनिया के सबसे मीठे बेर हैं," राम जी बोले। "इनमें प्यार भरा है।"

शबरी धीरे से हँस पड़ीं। उनका लंबा इंतज़ार पूरा हो गया था। इंतज़ार का एक-एक दिन आज मीठा हो गया था। जंगल शांत था। चिड़ियाँ गा रही थीं। और शबरी की छोटी-सी कुटिया खुशी से भर गई थी।

कहानी की सीख
“धीरज से इंतज़ार करने वाला प्यार कभी खाली नहीं जाता।”

गर्भ संवाद

शबरी ने खुश मन से राम जी का इंतज़ार किया। मैं सबसे मीठे प्यार के साथ तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ। शबरी की तरह, मैं भी हर दिन तुम्हारे लिए तैयारी करती हूँ।

इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।

मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।

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यहाँ हर कहानी प्यार से, शांति से ख़त्म होती है। डराने वाले या दुखी अंत हम नहीं रखते, और पुरानी कथाएँ आसान शब्दों में सुनाते हैं।

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