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शांति: सुकून भरी कहानियाँ

छत पर तारे गिनना

नई कहानी · लगभग 3 मिनट · 24वाँ सप्ताह

ठंडी छत पर लेटकर हम तारे गिनते हैं, और शहर धीरे-धीरे चुप हो जाता है।

लगभग 3 मिनटआराम से बैठिए, एक हाथ पेट पर रखिए, और धीरे-धीरे, प्यार से पढ़िए।

हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।

दिन गर्म था। पर अब सूरज ढल गया है, और रात आ गई है। हम सीढ़ियाँ चढ़कर छत पर आते हैं।

शाम को किसी ने छत पर पानी छिड़का था। अब फ़र्श पैरों के नीचे ठंडा लगता है। चलो, एक नरम दरी बिछाते हैं... और धीरे से लेट जाते हैं।

आहा... पीठ के नीचे फ़र्श ठंडा है। एक हल्की हवा हमारे ऊपर से गुज़रती है। मेरे बालों को उड़ाती है। मेरे गाल को छूती है।

नीचे शहर अभी जाग रहा है। दूर कहीं हॉर्न बजते हैं। सड़क के आगे वाले मंदिर में घंटी बजती है। बगल की छत पर कोई हँसता है। स्ट्रीटलाइटें नारंगी चमक रही हैं।

चलो, आसमान की ओर देखते हैं... पहले बस कुछ ही तारे दिखते हैं। शहर की बत्तियाँ बहुत तेज़ हैं, और तारे जैसे शरमा रहे हैं।

पर हमें कोई जल्दी नहीं है। हम इंतज़ार कर सकते हैं।

चलो, एक-एक करके उन्हें गिनते हैं।

एक... एक चमकीला तारा, ठीक हमारे ऊपर। दो... एक नन्हा-सा, पानी की टंकी के पास। तीन... एक टिमटिमाता हुआ, नीम के पेड़ के ऊपर।

एक तारा... और फिर एक और।

धीरे-धीरे शहर चुप होने लगता है। हॉर्न बंद हो जाते हैं। एक खिड़की की बत्ती बुझती है। फिर दूसरी। फिर तीसरी।

और जैसे-जैसे बत्तियाँ बुझती हैं, वैसे-वैसे और तारे निकल आते हैं। जैसे वे शहर के सोने का ही इंतज़ार कर रहे थे।

चार... पाँच... छह... और सात। वो रहे सप्तऋषि! सात तारे एक साथ, आसमान में रखे एक बड़े चम्मच जैसे।

एक तारा... और फिर एक और।

आठ... नौ... दस...

आँखें भारी हो रही हैं। गिनती धीमी हो रही है। ग्यारह... बारह... हवा नरम है। फ़र्श ठंडा है। मेरी साँस धीमी और गहरी है।

चलो, साँस अंदर लेते हैं... और बाहर छोड़ते हैं... अब तो बहुत सारे तारे हैं। इतने कि गिने ही न जाएँ। आसमान चौड़ा है, गहरा है, और सबको अपने अंदर समेटे हुए है।

नन्ही जान, आसमान कितना बड़ा है। उसमें हर तारे के लिए जगह है। और हर सपने के लिए भी... तुम्हारे सपनों के लिए भी, और मेरे सपनों के लिए भी।

अब हमें और गिनने की ज़रूरत नहीं। बस आराम करना है। शहर सो गया है। तारे जाग रहे हैं। वे हमारी रखवाली कर रहे हैं।

एक तारा... और फिर एक और... और फिर एक और...

अब सो जाओ... आराम से... हमारे तारों के नीचे।

कहानी की सीख
“आसमान हर सपने के लिए काफ़ी बड़ा है।”

गर्भ संवाद

हमने एक-एक करके तारे गिने, जब तक पूरा आसमान भर नहीं गया। हमारे तारों के नीचे आराम से सो जाओ। आसमान में हमारे सारे सपनों के लिए जगह है, नन्ही जान।

इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।

मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।

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