कथा: सुनाने वाली कहानियाँ
गणेश जी और माँ-पापा की परिक्रमा
पुरानी कथा, नए शब्दों में · लगभग 3 मिनट · 5वाँ सप्ताह
गणेश जी बताते हैं कि माँ-पापा ही उनकी पूरी दुनिया हैं।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
बहुत समय पहले, बर्फ़ से ढके कैलाश पर्वत पर एक खुशहाल परिवार रहता था। वहाँ शिव जी और पार्वती माँ अपने दो बच्चों के साथ रहते थे। एक थे गणेश जी, और दूसरे कार्तिकेय जी।
एक सुबह पार्वती माँ ने दोनों को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, "मेरे पास एक खास तोहफ़ा है। जो सबसे पहले पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर आएगा, ये तोहफ़ा उसी का होगा।"
कार्तिकेय जी ने ताली बजाई। "मैं अभी जाता हूँ!" वो हँसकर बोले। झट से वो अपने मोर पर बैठ गए। सर्र्र! मोर उड़ चला। पहाड़ों के ऊपर, नदियों के ऊपर, जंगलों के ऊपर। ठंडी हवा उनके कानों में गाना गा रही थी। कार्तिकेय जी बहुत खुश थे।
गणेश जी ने अपने नन्हे चूहे को देखा। चूहे ने गणेश जी को देखा। दुनिया तो बहुत-बहुत बड़ी थी। और चूहा बहुत-बहुत छोटा।
तो गणेश जी आराम से बैठ गए और सोचने लगे। उन्होंने माँ की प्यारी मुस्कान देखी। फिर पिता जी की प्यार भरी आँखें देखीं। फिर वो खुश मन से उठ खड़े हुए।
उन्होंने हाथ जोड़े। और शिव जी और पार्वती माँ के चारों ओर चलने लगे। धीरे-धीरे, प्यार से, एक-एक कदम।
हर कदम में प्यार भरा था। उनका नन्हा चूहा भी साथ-साथ चल रहा था। पूरा पर्वत शांत था। बस हल्की-सी हवा बर्फ़ को छूकर निकल रही थी। धीरे-धीरे, प्यार से, एक-एक कदम।
चक्कर पूरा हुआ, तो गणेश जी ने झुककर प्रणाम किया। "मैंने पूरी दुनिया का चक्कर लगा लिया," उन्होंने कहा।
पार्वती माँ हैरान हो गईं। "वो कैसे, गणेश?"
गणेश जी मुस्कुराए। "आप दोनों ही तो मेरी पूरी दुनिया हैं। मुझे जो कुछ भी प्यारा है, सब यहीं है।"
शिव जी खुश होकर खुलकर हँस पड़े। पार्वती माँ की आँखें खुशी से चमक उठीं। उन्होंने वो खास तोहफ़ा गणेश जी को दे दिया।
तभी, सर्र्र! कार्तिकेय जी घर लौट आए। हवा से उनके गाल गुलाबी हो गए थे। "मैंने पूरी दुनिया घूम ली!" उन्होंने कहा। फिर उन्होंने सुना कि गणेश जी ने क्या किया। कार्तिकेय जी मुस्कुरा दिए। "गणेश, ये तो बड़ी समझदारी की बात है!"
पार्वती माँ ने अपनी बाँहें फैला दीं। शिव जी ने भी बाँहें फैला दीं। गणेश जी और कार्तिकेय जी दौड़कर उनसे लिपट गए। पूरा परिवार एक बड़ी-सी, प्यारी-सी झप्पी में समा गया।
पहाड़ की ठंडी हवा धीरे-धीरे बहती रही। आसमान साफ़ और नीला था। धीरे-धीरे, प्यार से, एक-एक कदम, सब कुछ शांत हो गया।
“माँ-पापा ही बच्चे की पूरी दुनिया होते हैं।”
गर्भ संवाद
गणेश जी की पूरी दुनिया उनके पास ही थी। मेरी पूरी दुनिया तो यहीं है, मेरे अंदर। तुम मेरी पूरी दुनिया हो, नन्ही जान।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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