कथा: सुनाने वाली कहानियाँ
मीरा का इंतज़ार
नई कहानी · लगभग 3 मिनट · छठा सप्ताह
हथिनी मीरा की कहानी, जिसे सब्र का सबसे मीठा फल मिलता है।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
एक चौड़ी, धीमे-धीमे बहती नदी के किनारे मीरा नाम की एक हथिनी रहती थी। हर सुबह वह अपनी सबसे पक्की सहेली तारा के साथ नदी पर पानी पीने जाती थी। तारा एक छोटी-सी सलेटी हथिनी थी। उसकी चमकती आँखें हर पल कुछ न कुछ खोजती रहती थीं।
एक सुबह, तारा नहीं आई।
मीरा ने धूल भरे रास्ते पर इधर देखा। फिर उधर देखा। वहाँ बस धीमी-धीमी हवा थी और नदी की हल्की-सी कल-कल।
"शायद वह रास्ते में होगी," मीरा ने मन ही मन कहा। और वह इंतज़ार करने लगी।
सूरज ऊपर चढ़ता गया। पानी के ऊपर से एक नीला किलकिला बिजली-सा चमकता हुआ फुर्र से उड़ गया। बत्तखों का एक परिवार तैरता हुआ पास से गुज़रा — चार नन्हे-मुन्ने बच्चे, एक के पीछे एक, कतार में। मीरा उन्हें देखकर मुस्कुरा दी।
उसने ठंडी नदी में अपनी सूँड डुबोई और अपनी पीठ पर पानी की फुहार छोड़ी। आहा! सरकंडों में मेंढक टर्र-टर्र गा रहे थे। आसमान में बादल ऐसे तैर रहे थे, जैसे धीरे-धीरे चलती सफ़ेद नावें।
"तुम जाकर उसे ढूँढ क्यों नहीं लेतीं?" पेड़ पर बैठे एक बंदर ने चटर-पटर करते हुए कहा।
"तारा जानती है कि यह हमारी जगह है," मीरा ने कहा। "अगर मैं चली गई, तो हो सकता है वह आए और मैं उसे यहाँ न मिलूँ। मैं इंतज़ार करूँगी।"
धूप सुनहरी हो चली। परछाइयाँ लंबी होने लगीं। फिर भी मीरा इंतज़ार करती रही — शांत और अडिग, अपने पास खड़े पुराने बरगद के पेड़ की तरह।
तभी, बहुत दूर से, उसे ख़ुशी भरी एक चिंघाड़ सुनाई दी।
तारा रास्ते पर दौड़ती हुई आई, उसके बड़े-बड़े कान फड़फड़ा रहे थे। उसके पीछे-पीछे उसकी माँ चल रही थी, और माँ के पास हाथी का एक नन्हा-सा बच्चा डगमग-डगमग चल रहा था — अभी-अभी जन्मा, कोमल और प्यारा।
"आज मेरा छोटा भाई आया है!" तारा ख़ुशी से बोल पड़ी। "मैं चाहती थी कि सबसे पहले तुम ही उससे मिलो।"
मीरा का मन ख़ुशी से भर आया। शांत मन से किए इंतज़ार का उसे सबसे प्यारा तोहफ़ा मिला था — ऐसा, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।
“सब्र का फल मीठा होता है।”
गर्भ संवाद
मेरी नन्ही-सी जान, मीरा ने शांत मन से इंतज़ार किया, और उसे सबसे प्यारा तोहफ़ा मिला। मैं भी तुम्हारी राह देख रही हूँ — सुकून से, ख़ुशी-ख़ुशी। हर दिन हमें एक-दूसरे के थोड़ा और क़रीब ले आता है।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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