शांति: सुकून भरी कहानियाँ
बीज और मिट्टी
नई कहानी · लगभग 2 मिनट · 5वाँ सप्ताह
नन्हा बीज गरम, अँधेरी मिट्टी में आराम करता है, फिर पहली पत्ती निकलती है।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
चलो, आँखें बंद करें... और एक शांत से बगीचे में चलें।
शाम बड़ी सुहानी है। ठंडी हवा घास के बीच से धीरे-धीरे बह रही है। हम नीचे बैठते हैं और एक नन्हा सा बीज मिट्टी में रख देते हैं। थप, थप, थप... मिट्टी उसे एक नरम कंबल की तरह ढक लेती है।
मिट्टी के अंदर अँधेरा है। नन्हा बीज इधर-उधर देखता है। "सूरज कहाँ है?" वो धीरे से पूछता है। "आसमान कहाँ है?" उसे थोड़ी सी घबराहट होती है।
तभी चारों तरफ़ से एक नरम सी आवाज़ आती है। ये मिट्टी की आवाज़ है। "श्श्श... मैं यहीं हूँ। ये अँधेरा गरम है। ये अँधेरा प्यारा है। आराम करो, नन्हे बीज। मैंने तुम्हें थाम रखा है।"
बीज आराम से सिमट कर बैठ जाता है। मिट्टी गरम है, जैसे माँ की नरम शॉल। ऊपर ज़मीन पर बारिश गिरती है... टिप, टिप, टिप। ठंडा पानी धीरे-धीरे नीचे आता है। बीज आराम से थोड़ा-थोड़ा पानी पीता है।
दिन बीतते जाते हैं... धीरे-धीरे, चुपचाप। बीज को खुद पता नहीं चलता कि वो बढ़ रहा है। पर वो बढ़ रहा है। एक नन्ही सी जड़ नीचे जाती है। एक नन्हा सा तना ऊपर की ओर बढ़ता है।
कभी-कभी बीज पूछता है, "क्या मैं ठीक से बढ़ रहा हूँ?" मिट्टी मुस्कुराती है। "चुपचाप बढ़ना भी काफ़ी है। आराम करो, नन्हे बीज। मैंने तुम्हें थाम रखा है।"
एक सुबह बीज को कुछ नया महसूस होता है। ऊपर से एक हल्की सी गरमाहट आ रही है। तना ऊपर की ओर बढ़ता है... ऊपर... और ऊपर... नरम भूरी मिट्टी के बीच से।
और फिर... रोशनी! धूप में एक छोटी सी हरी पत्ती खुलती है। वो एक नन्हे से हरे झंडे जैसी चमकती है।
नीचे मिट्टी अब भी जड़ों को थामे हुए है। "देखा?" वो धीरे से कहती है। "मैं हर पल तुम्हारे साथ थी। आराम करो, नन्हे बीज। मैंने तुम्हें थाम रखा है।"
छोटी सी हरी पत्ती गरम धूप में धीरे-धीरे झूलती है। और हम भी यहीं उसके पास बैठे हैं... शांत, सुकून भरे, और सुरक्षित।
“चुपचाप बढ़ना भी बढ़ना ही है।”
गर्भ संवाद
मिट्टी ने नन्हे बीज को प्यार से थाम कर रखा। शांत अँधेरे में भी तुम सुरक्षित हो। मैंने भी तुम्हें ऐसे ही थाम रखा है, मेरी जान।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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हेलो, नन्ही जान
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