शांति: सुकून भरी कहानियाँ
धीरे-धीरे झूलती नाव
नई कहानी · लगभग 2 मिनट · 31वाँ सप्ताह
चाँदनी रात में शांत झील पर एक छोटी नाव धीरे-धीरे झूलती है।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
झील के बीच इक छोटी नाव, जागे बस वो, सोया सारा गाँव। ऊपर गोल-गोल चंदा आया, नाव पे चाँदी-सा उजाला लाया। झूले, झूले, नाव झूले, धीरे-धीरे झूले।
एक-दो-तीन, तारे आए, दिन के सारे शोर सुलाए। झील के पानी में झाँकें, मुस्काएँ, धीरे से "सो जा" कह जाएँ। झूले, झूले, नाव झूले, धीरे-धीरे झूले।
धीमी-धीमी, ठंडी हवा चली, नाव को लगी बड़ी भली। इधर झुलाया, उधर झुलाया, प्यार से उसको गले लगाया। झूले, झूले, नाव झूले, धीरे-धीरे झूले।
छोटी लहरें छप-छप गाएँ, नाव को थपकी देती जाएँ। पानी ने उसको गोद में लिया, और मीठा-सा एक गीत दिया। झूले, झूले, नाव झूले, धीरे-धीरे झूले।
नीचे मछलियाँ सो गईं सारी, कमल ने मूँदी पंखुड़ी प्यारी। बत्तख ने सिर पंख में छुपाया, नाव ने भी अब बिस्तर बिछाया। झूले, झूले, नाव झूले, धीरे-धीरे झूले।
मैं चलूँ तो तुम भी झूलो, मेरे अंदर ज़रा-ज़रा डोलो। जैसे झील नाव को थामे सारी रात, वैसे मैं रहूँ हर पल तुम्हारे साथ। झूले, झूले, नाव झूले, धीरे-धीरे झूले।
“धीरे-धीरे झूलना मीठी नींद लाता है।”
गर्भ संवाद
छोटी नाव झील पर धीरे-धीरे झूल रही है। झूलो और आराम करो, नन्ही जान। मैंने तुम्हें प्यार से थाम रखा है।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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