शांति: सुकून भरी कहानियाँ
भारी बादल
नई कहानी · लगभग 2 मिनट · 8वाँ सप्ताह
एक भारी बादल हल्की बारिश बनकर बरसता है और फिर से हल्का हो जाता है।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
चलो, नरम घास पर लेट जाएँ... और ऊपर आसमान को देखें।
बहुत ऊपर एक बड़ा सा सलेटी बादल तैर रहा है। वो पानी से बहुत भरा हुआ है। उसमें ढेर सारी बूँदें हैं। वो धीरे चलता है... बहुत धीरे। उसे भारी-भारी और थका-सा लग रहा है।
"मुझमें बहुत ज़्यादा भरा है," बादल आह भरता है। "मैं इतना सब उठाए हुए हूँ। मैं छोटे सफ़ेद बादलों की तरह हल्का होकर नहीं उड़ पाता।"
तभी ठंडी हवा आती है। वो बादल को धीरे से छूती है। "सब कुछ उठाए रखना ज़रूरी नहीं," हवा कहती है। "थोड़ा सा जाने दो।"
बादल थोड़ी देर सोचता है। फिर वो एक नन्ही सी बूँद गिरा देता है। टिप... बूँद एक हरी पत्ती पर गिरती है। बादल को थोड़ा हल्का लगता है। जाने दो... हौले-हौले।
तो वो कुछ और बूँदें गिरा देता है। टिप... टप... टिप... खेतों पर हल्की-हल्की बारिश होती है। टीन की छतों पर टप-टप होती है। तालाब में छोटे-छोटे गोल घेरे बनते हैं। जाने दो... हौले-हौले।
नीचे धरती मुस्कुराती है। घास अपनी नोकें ऊपर उठाती है। फूल बूँदों की तरफ़ अपना चेहरा खोलते हैं। एक गौरैया अपने पंख झटकती है और चहचहाती है।
ऊपर बादल हल्का, और हल्का होता जाता है। उसका सलेटी रंग नरम सफ़ेद हो जाता है। वो फैल जाता है, लंबा और रुई जैसा मुलायम। जाने दो... हौले-हौले।
अब बारिश रुक जाती है। हवा ठंडी और साफ़ है। बादल नीले आसमान में आगे तैरता चला जाता है। अब वो हल्का है। अब वो मुस्कुरा रहा है।
हम साँस अंदर लेते हैं... और बाहर छोड़ते हैं। शायद हमारे मन में भी कुछ चिंताएँ हैं। कोई बात नहीं। चलो, उन्हें भी हल्की बारिश की तरह बरस जाने दें। एक-एक करके... टिप... टप... और हमारा मन भी उस छोटे सफ़ेद बादल जैसा हल्का हो जाता है।
“चिंता छोड़ दें, तो मन हल्का हो जाता है।”
गर्भ संवाद
बादल ने अपनी बूँदें गिरा दीं और हल्का हो गया। चलो, अपनी चिंताएँ बारिश की तरह बहा दें। फिर हम भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ेंगे, मेरी जान।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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