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कथा: सुनाने वाली कहानियाँ

चीकू की खोज

नई कहानी · लगभग 3 मिनट · 14वाँ सप्ताह

नन्ही गौरैया चीकू को बगीचे के एक अनदेखे, छाँव वाले कोने में छिपा ख़ज़ाना मिलता है।

लगभग 3 मिनटआराम से बैठिए, एक हाथ पेट पर रखिए, और धीरे-धीरे, प्यार से पढ़िए।

हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।

एक बड़े-से, धूप भरे बगीचे में चीकू नाम की एक नन्ही भूरी गौरैया रहती थी। चीकू को हर चीज़ के बारे में जानने की बड़ी ललक थी।

हर सुबह वह उड़कर बगीचे के किसी नए कोने में जाती और देखती कि आज वहाँ क्या मिलता है।

सोमवार को वह गुलाबों के पास गई। लाल-लाल गुलाब शान से खड़े थे, और उनसे शहद जैसी ख़ुशबू आ रही थी। "कितने सुंदर!" चीकू ने कहा।

मंगलवार को वह सूरजमुखी के फूलों के पास गई। वे ऊँचे-ऊँचे खड़े थे और अपने ख़ुश-ख़ुश चेहरे सूरज की ओर घुमाए हुए थे। "कितने हँसमुख!" चीकू ने कहा।

बुधवार को वह गेंदे के फूलों के बीच फुदकती रही। नारंगी-सुनहरे गेंदे ऐसे लग रहे थे, जैसे नन्हे दीयों की लौ। वहाँ एक गोल-मटोल भौंरा पराग में लोट-लोटकर पूरा पीला हो गया।

"अब तो तुमने सबसे अच्छे फूल देख ही लिए होंगे," दूसरी चिड़ियों ने कहा। "आओ, हमारे साथ दीवार पर बैठकर आराम करो।"

पर चीकू सोच में पड़ गई। एक कोना ऐसा था, जहाँ वह कभी नहीं गई थी — पुराने आम के पेड़ के नीचे वाला छाँव भरा कोना, जहाँ घास ठंडी रहती थी और रोशनी हल्की और हरी-हरी होती थी।

"वहाँ कुछ नहीं उगता," कौए ने काँव-काँव करके कहा। "वहाँ तो बहुत ही अँधेरा है।"

फिर भी चीकू उड़कर वहाँ चली गई।

पहले तो उसे सिर्फ़ पत्ते और परछाइयाँ दिखीं। उसने इंतज़ार किया। उसने ध्यान से देखा। और फिर उसे वह दिखाई दिया।

तारे जैसा एक नन्हा-सा सफ़ेद फूल छाँव में चुपचाप चमक रहा था। उसकी पंखुड़ियाँ रेशम जैसी मुलायम थीं। उसकी ख़ुशबू हल्की और मीठी थी, जैसे इलायची वाला गरम दूध। उसकी पत्तियों पर ओस की बूँदें नन्हे-नन्हे मोतियों की तरह सजी थीं।

चीकू ने इतनी प्यारी चीज़ पहले कभी नहीं देखी थी।

उसने फूल के लिए एक छोटा-सा गीत गाया, और फूल जैसे थोड़ा और चमक उठा।

उस शाम चीकू ने दूसरी चिड़ियों को इसके बारे में बताया। एक-एक करके वे सब उसे देखने आम के पेड़ के नीचे उतर आईं।

"तुम न बतातीं, तो हम यहाँ कभी झाँकतीं भी नहीं," वे फुसफुसाईं।

चीकू ने ख़ुशी से अपने पंख फुलाए। उसने सीख लिया था कि कई सुंदर चीज़ें चुपचाप छिपी रहती हैं — बस उन्हें खोजने वाला मन चाहिए।

कहानी की सीख
“जो खोजता है, वही पाता है।”

गर्भ संवाद

मेरी नन्ही-सी जान, दुनिया में तुम्हारे लिए खोजने को कितना कुछ है — फूल, चिड़ियाँ, आम के पेड़ की ठंडी छाँव। मुझसे तो इंतज़ार ही नहीं होता कि कब हम यह सब साथ-साथ देखें। हम धीरे-धीरे चलेंगे, और हर चीज़ को ध्यान से निहारेंगे।

इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।

मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।

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