गर्भ संवाद: शिशु से बातें
सबसे पहले तुम्हें गोद में कौन लेगा?
नई कहानी · लगभग 3 मिनट · 38वाँ सप्ताह
पूरा परिवार प्यार से, ज़ोर-ज़ोर से बहस करता है: पहले गोद में कौन लेगा?
हेलो, नन्ही जान। मैं पापा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
नन्ही जान, कल रात खाने के वक़्त क्या हुआ, सुनो। बहुत शोर हुआ। पर वो खुशी वाला शोर था।
शुरुआत दादी ने की। उन्होंने चम्मच नीचे रखा और बोलीं, "नन्ही जान को सबसे पहले गोद में मैं लूँगी। आखिर स्वेटर तो मैं ही बुन रही हूँ!" खट, खट, उनकी सलाइयाँ चलीं।
नाना जी सीधे होकर बैठ गए। "ना, ना, ना," उन्होंने भारी आवाज़ में कहा। "सबसे पहले मैं गोद में लूँगा। मैंने तो प्रैक्टिस भी की है! देखो!" उन्होंने एक कुशन उठाया और उसे झुलाने लगे। हौले-हौले, हौले-हौले। कुशन बड़े आराम में लग रहा था।
फिर बुआ बीच में कूद पड़ीं। उनकी आवाज़ ऊँची और तेज़ थी। "एक मिनट! मैं बुआ हूँ! हमारे घर में बुआ का नंबर पहले आता है। मैंने तो तीन लोरियाँ भी सीख ली हैं!" और वो गाने लगीं। ला-ला-ला-लाऽऽ!
"पहले मैं!" दादी बोलीं। "नहीं, पहले मैं!" नाना जी बोले। "मैं, मैं, मैं!" बुआ ने गाया।
मैंने हाथ उठाया और गला खँखारा। "सुनिए, सब लोग। मैं पापा हूँ। तो पापा का तो..."
"पहले मैं! नहीं, पहले मैं!" सब फिर से बोल पड़े। किसी ने मेरी सुनी ही नहीं।
दादी ने चम्मच हिलाया। नाना जी ने कुशन हिलाया। बुआ ने लोरियों से भरा फ़ोन हिलाया। कुत्ता भौंका, भौं, भौं! प्रेशर कुकर ने भी सीटी मार दी। सीऽऽऽ!
तभी मम्मा हँसीं। धीमी, मीठी हँसी। सब चुप हो गए।
"आप सबको पता है," उन्होंने कहा, "इस वक़्त नन्ही जान को कौन थामे हुए है?"
सबने मम्मा को देखा। फिर उनके पेट को। फिर एक-दूसरे को।
"मैं!" मम्मा ने मुस्कुराकर कहा। "मैं तो महीनों से इस नन्ही जान को थामे हुए हूँ। दिन-रात। तो मेरे हिसाब से पहला नंबर तो मेरा हो चुका।"
एक पल सब चुप रहे। फिर नाना जी ठहाका मारकर हँसे। हो हो हो! दादी हँसीं। ही ही ही! बुआ ताली बजा-बजाकर हँसीं। और सबसे ज़ोर से मैं हँसा।
फिर हमने एक प्लान बनाया। बारी की लिस्ट! दादी ने उसे कागज़ पर लिखा और फ़्रिज पर चिपका दिया। सबसे पहले मम्मा, हमेशा। फिर पापा। फिर दादी, फिर नाना जी, फिर बुआ। और फिर से गोल-गोल, बार-बार।
अब घर में "पहले मैं! नहीं, पहले मैं!" नहीं होता। अब बस होता है, "चलो, अब आपकी बारी!"
तो नन्ही जान, बहुत सारी बाँहें तुम्हारा इंतज़ार कर रही हैं। गरम बाँहें। प्यार भरी बाँहें। नरम बाँहें। सब बारी-बारी से तुम्हें गले लगाएँगे, और हर झप्पी प्यार से भरी होगी।
“एक बच्चे को बहुत सारी बाँहें प्यार करती हैं।”
गर्भ संवाद
हमारा पूरा परिवार तुम्हारे साथ अपनी बारी के लिए तैयार है। सब तुम्हें गोद में लेने का इंतज़ार कर रहे हैं। और मैं भी मुस्कुराते हुए अपनी बारी का इंतज़ार करूँगा।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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