English 

गर्भ संस्कार की परंपराएँ

क्या गर्भ संस्कार से शिशु होशियार बनता है? सच्चा जवाब

कोई रिसर्च नहीं कहती कि गर्भ संस्कार से आईक्यू बढ़ता है। जानिए आपकी आवाज़, संगीत और सुकून पर रिसर्च क्या कहती है, और फिर भी यह क्यों अच्छा है।

गर्भशिक्षा की ओर से · · · पढ़ने में 6 मिनट

व्हाट्सएप

प्रिया 20 हफ़्ते की गर्भवती थी। रात के 11 बजे वह फ़ोन पर स्क्रॉल कर रही थी।

तभी एक विज्ञापन आया: "जन्म से पहले ही बढ़ाइए अपने बच्चे का आईक्यू! बस रोज़ 30 मिनट।"

वह देर तक उसे देखती रही। फिर मन में एक भारी-सा ख़याल आया — अगर मैंने यह नहीं किया, तो क्या मैं अभी से अपने बच्चे के साथ ग़लत कर रही हूँ?

उसने कुछ नहीं ख़रीदा। उसने इंटरनेट पर खोजा: क्या गर्भ संस्कार से बच्चा होशियार बनता है?

अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो यह लेख आपके लिए है। चलिए, मिलकर सच्चा जवाब ढूँढते हैं।

एक लाइन में गर्भ संस्कार क्या है?

गर्भ संस्कार यानी कोख में अच्छी छाप। गर्भावस्था में अपने शिशु के साथ प्यार और सुकून से समय बिताना — पढ़ना, गाना, संगीत सुनना, प्रार्थना करना या बस शिशु से बातें करना। यह भारत की बहुत पुरानी परंपरा से आया है, और आज दुनिया भर के परिवार इसे अपनाते हैं। पूरी जानकारी हमारी गर्भ संस्कार गाइड में है।

क्या गर्भ संस्कार से शिशु का आईक्यू बढ़ता है?

सच्चा जवाब: ऐसी कोई रिसर्च नहीं है जो कहे कि गर्भ संस्कार से शिशु का आईक्यू बढ़ता है या वह ज़्यादा होशियार बनता है।

जन्म से पहले शिशु को कोई पाठ नहीं पढ़ाया जा सकता। आप ज़्यादा से ज़्यादा इतना कर सकती हैं कि कुछ आवाज़ें, गाने या कहानियाँ उसके लिए जानी-पहचानी बन जाएँ।

तो अगर कोई पेज "जीनियस बच्चे" का वादा करे, तो आप निश्चिंत रहिए। आपसे कोई राज़ नहीं छूट रहा।

पर बात यहीं ख़त्म नहीं होती। रिसर्च कुछ प्यारी बातें ज़रूर बताती है।

रिसर्च असल में क्या कहती है?

गर्भ संस्कार और आईक्यू पर सीधे कोई रिसर्च नहीं हुई। पर गर्भ संस्कार में जो चीज़ें आती हैं — जैसे आपकी आवाज़ और संगीत — उन पर अच्छी रिसर्च हुई है।

शिशु आपको सुन सकता है। बच्चों के डॉक्टरों की अमेरिकी संस्था, अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स, के अनुसार लगभग 18वें हफ़्ते से शिशु आपके शरीर के अंदर की आवाज़ें, जैसे दिल की धड़कन, सुनने लगता है। 27 से 29 हफ़्ते तक वह बाहर की कुछ आवाज़ें भी सुनने लगता है — जैसे आपकी आवाज़।

शिशु आपकी आवाज़ पहचान सकता है। कनाडा की क्वींस यूनिवर्सिटी की 2003 की एक रिसर्च में, जन्म के क़रीब पहुँचे 60 शिशुओं को एक रिकॉर्डिंग सुनाई गई — किसी में उनकी माँ पढ़ रही थीं, किसी में कोई अनजान महिला। माँ की आवाज़ पर उनकी धड़कन तेज़ हुई, और अनजान आवाज़ पर धीमी। यानी शिशु माँ की आवाज़ को अलग से पहचान सकता है। पर इससे यह साबित नहीं होता कि वह बाद में ज़्यादा होशियार बनता है।

शिशु कोई कविता याद रख सकता है। अमेरिका की फ़्लोरिडा यूनिवर्सिटी की 2014 की एक रिसर्च में 32 माँओं ने 28वें से 34वें हफ़्ते तक रोज़ दो बार एक ही छोटी कविता बोली। 38वें हफ़्ते में भी उस कविता पर शिशुओं की धड़कन में बदलाव दिखा। यह जानी-पहचानी आवाज़ की शुरुआती याद है, आगे चलकर कुछ सीखने का सबूत नहीं।

संगीत से आपको सुकून मिल सकता है। कुछ छोटी रिसर्च बताती हैं कि अपनी पसंद का संगीत सुनने से गर्भावस्था में घबराहट कुछ कम हो सकती है। नतीजे हर जगह एक जैसे नहीं, इसलिए इसे इलाज नहीं, एक अच्छी आदत मानिए।

ग़ौर किया? सबसे पक्की बातें जुड़ाव और सुकून के बारे में हैं, आईक्यू के बारे में नहीं।

और मोज़ार्ट इफ़ेक्ट का क्या?

आपने सुना होगा कि पेट के पास मोज़ार्ट का संगीत बजाने से बच्चे होशियार बनते हैं। प्रिया ने भी सुना था।

यह बात कहाँ से आई? 1993 में एक छोटी रिसर्च में पाया गया कि कॉलेज के छात्रों ने मोज़ार्ट का संगीत सुनने के बाद एक तरह की पहेली थोड़ी बेहतर हल की। यह असर बस 10 से 15 मिनट रहा।

वह रिसर्च बड़ों पर हुई थी, शिशुओं पर नहीं, और बाद की रिसर्च में कोई लंबा असर नहीं मिला। पेट पर स्पीकर या हेडफ़ोन लगाने की भी ज़रूरत नहीं — आपकी अपनी, रोज़ की आवाज़ ही काफ़ी है। संगीत इसलिए सुनिए क्योंकि वह आपको अच्छा लगता है, किसी वादे की वजह से नहीं।

गर्भ संस्कार सच है या बस एक भ्रम?

गर्भ संस्कार एक परंपरा और रोज़ की शांत आदत के रूप में बिल्कुल सच है। भ्रम बस "होशियार बच्चे" का वादा है।

सोचिए, छोटे बच्चे को सोते समय कहानी सुनाना। कोई उसका आईक्यू बढ़ाने के लिए कहानी नहीं सुनाता। हम इसलिए सुनाते हैं क्योंकि अच्छा लगता है, हम एक-दूसरे के क़रीब आते हैं, और बच्चे को हमारी आवाज़ प्यारी लगती है।

गर्भ संस्कार भी यही है, बस थोड़ा पहले।

तो असली फ़ायदे क्या हैं?

सच-सच कहें, तो आप ये उम्मीद कर सकती हैं:

  • आपके लिए सुकून का एक ठहराव। भागदौड़ भरे दिन में पाँच शांत मिनट एक तोहफ़ा हैं।
  • शिशु के लिए जानी-पहचानी आवाज़। शिशु आपकी आवाज़ का आदी होने लगता है।
  • जल्दी जुड़ाव। बहुत-सी माँएँ कहती हैं कि शिशु से बातें करने पर वह उन्हें और भी सच्चा लगने लगा।
  • आगे चलने वाली आदत। जो कहानी या गाना आप अभी शुरू करेंगी, वह जन्म के बाद भी सोने के समय का हिस्सा बन सकता है — जब शिशु से बातें करना और उसे पढ़कर सुनाना सच में बहुत मायने रखता है।
  • परिवार का साथ। जीवनसाथी, दादा-दादी, नाना-नानी और बड़े भाई-बहन, सब शामिल हो सकते हैं।

इनमें से किसी के लिए किसी वादे की ज़रूरत नहीं। ये अपने आप में अच्छे हैं।

बिना दबाव के कैसे शुरू करें

प्रिया ने अपने तरीक़े से शुरू किया। न 30 मिनट, न कोई टारगेट। बस पाँच शांत मिनट:

  • आराम से बैठिए और फ़ोन साइलेंट पर कर दीजिए।
  • शिशु को हेलो कहिए और अपने दिन की एक छोटी-सी बात बताइए।
  • एक छोटी कहानी पढ़कर सुनाइए, या अर्थ के साथ एक शांत श्लोक सुनिए — जैसे हमारे नींद और सुकून के श्लोक।
  • आख़िर में एक प्यारी बात कहिए, अपने लिए या शिशु के लिए।

कोई दिन छूट गया? कल फिर से शुरू कीजिए। अगर चाहें कि यह कोई और चुन दे, तो गर्भशिक्षा पर आज की गतिविधियाँ देखिए — आपकी गर्भावस्था के हफ़्ते के हिसाब से रोज़ कुछ छोटी-छोटी गतिविधियाँ: कोई कहानी, श्लोक, पहेली या लोरी। एक कीजिए या सारी, आपकी मर्ज़ी। मुफ़्त, और बिना किसी बड़े वादे के।

फिर क्या हुआ?

प्रिया ने अपने पाँच मिनट जारी रखे। ज़्यादातर रातों को वह एक छोटी कहानी पढ़कर सुनाती है। किसी रात बस अपने दिन की बातें करती है।

अब वह आईक्यू के बारे में नहीं सोचती। वह उस पल के बारे में सोचती है, जब उसका शिशु जन्म के बाद वही कहानी सुनेगा और पढ़ने वाली आवाज़ को पहचान लेगा।

उसी रात उसने वह विज्ञापन अपनी सेव की हुई पोस्ट से हटा दिया। उसे जीनियस बच्चा नहीं चाहिए था। उसे बस अपना शिशु चाहिए था, और हर दिन साथ के कुछ शांत पल।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या गर्भ संस्कार से आईक्यू बढ़ता है? ऐसी कोई रिसर्च नहीं है। रिसर्च बताती है कि शिशु जन्म से पहले माँ की आवाज़ सुनता है और उसे पहचान सकता है, पर इससे बुद्धि बढ़ने का कोई सबूत नहीं।

क्या गर्भ संस्कार का कोई वैज्ञानिक सबूत है? इससे शिशु के होशियार बनने का कोई सबूत नहीं। पर अच्छी रिसर्च बताती है कि शिशु गर्भ में सुनता है और जानी-पहचानी आवाज़ें पहचान सकता है, और कुछ रिसर्च के अनुसार संगीत से माँ को सुकून मिल सकता है।

क्या पेट के पास संगीत बजाने से शिशु होशियार बनता है? नहीं। मशहूर मोज़ार्ट इफ़ेक्ट वाली रिसर्च बड़ों पर हुई थी, और उसका असर बस कुछ मिनट रहा। संगीत तभी सुनिए, जब उससे आपको आराम मिले।

क्या फिर भी गर्भ संस्कार करना चाहिए? हाँ, अगर आपको अच्छा लगता है। पाँच शांत मिनट आपको आराम दे सकते हैं, शिशु को आपकी आवाज़ पहचानने में मदद कर सकते हैं, और एक प्यारा रिश्ता शुरू कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें

सभी लेख