गर्भ संस्कार के 7 भ्रम और उनका सच
जीनियस शिशु, 108 बार जप, रोज़ एक घंटा? जानिए गर्भ संस्कार के 7 भ्रम और मिथकों का सच, और 5 मिनट से शुरुआत करने का आसान तरीक़ा।
गर्भशिक्षा की ओर से · · पढ़ने में 7 मिनट
जिस दिन आयशा ने घर में ख़ुशख़बरी सुनाई, परिवार के व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज की बाढ़ आ गई।
पहले बधाइयाँ आईं। फिर शुरू हुए फ़ॉरवर्ड।
यह मंत्र 108 बार जपो। जीनियस शिशु चाहिए, तो मोज़ार्ट सुनो। यह सब तो गर्भ ठहरने से पहले शुरू करना था। कभी उदास मत होना, शिशु को पता चल जाता है।
आयशा दुबई में रहती है। तब वह 16 हफ़्ते की गर्भवती थी। उसने हर मैसेज दो-दो बार पढ़ा। हफ़्ता बीतते-बीतते ख़ुशी से ज़्यादा उसे चिंता होने लगी।
फिर उसकी सास का फ़ोन आया। उन्होंने चुपचाप सारी बात सुनी, और फिर ऐसी बात कही जिसकी आयशा को उम्मीद नहीं थी: "बेटा, ये मैसेज सब प्यार में ही भेजते हैं। पर कोई नहीं चाहता कि तुम परेशान हो। चलो, देखते हैं कि असल में ज़रूरी क्या है।"
दोनों ने मिलकर यही किया। ऐसी सात बातें निकलीं, जिन्हें लोग सच मान बैठे हैं, पर जो सच नहीं हैं। इन्हीं को भ्रम या मिथक कहते हैं। चलिए, एक-एक करके इनका सच जानते हैं।
इस पेज पर
- पहले जानिए, गर्भ संस्कार है क्या?
- भ्रम 1: गर्भ संस्कार से शिशु जीनियस बनता है
- भ्रम 2: गर्भ ठहरने से पहले शुरू नहीं किया, तो देर हो गई
- भ्रम 3: इसके लिए रोज़ एक घंटा चाहिए
- भ्रम 4: हर मंत्र 108 बार, बिल्कुल सही उच्चारण से जपना ज़रूरी है
- भ्रम 5: गर्भ संस्कार सिर्फ़ धार्मिक परिवारों के लिए है
- भ्रम 6: गर्भ संस्कार सिर्फ़ माँ कर सकती है
- भ्रम 7: हर समय ख़ुश रहना ज़रूरी है, वरना शिशु को नुक़सान होगा
- एक और सच: गर्भ संस्कार कोई दवा नहीं है
- तो गर्भ संस्कार के लिए असल में क्या चाहिए?
- फिर क्या हुआ?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पहले जानिए, गर्भ संस्कार है क्या?
गर्भ संस्कार का मतलब है: गर्भ में ही अच्छे संस्कार। सीधे शब्दों में, गर्भावस्था में अपने शिशु के साथ प्यार और सुकून से थोड़ा समय बिताना। कुछ पढ़ना, गाना, प्रार्थना करना, संगीत सुनना, या बस शिशु से बातें करना।
यह भारत की पुरानी परंपरा है, और आज दुनिया भर के परिवार इसे अपनाते हैं। इससे जुड़ी ज़्यादातर सलाह आपके अपने ही देते हैं। बस, कुछ बातें समय के साथ उलझ गई हैं।
भ्रम 1: गर्भ संस्कार से शिशु जीनियस बनता है
आयशा के ग्रुप में सबसे ज़्यादा यही फ़ॉरवर्ड घूम रहा था।
सच: ऐसी कोई रिसर्च नहीं है, जो कहे कि गर्भ संस्कार से शिशु का आईक्यू बढ़ता है। मशहूर मोज़ार्ट इफ़ेक्ट 1993 की एक रिसर्च से निकला था। वह रिसर्च कॉलेज के छात्रों पर हुई थी, शिशुओं पर नहीं, और उसका असर बस 10 से 15 मिनट रहा।
पर विज्ञान इससे भी प्यारी बात बताता है। लगभग 18वें हफ़्ते से शिशु सुनने लगता है, और जन्म के क़रीब आते-आते वह माँ की आवाज़ पहचानने लग सकता है। तो असली तोहफ़ा होशियार शिशु नहीं, एक जानी-पहचानी आवाज़ है। रिसर्च पर पूरी बात यहाँ पढ़िए: क्या गर्भ संस्कार से शिशु होशियार बनता है?
भ्रम 2: गर्भ ठहरने से पहले शुरू नहीं किया, तो देर हो गई
इस बात से आयशा घबरा गई थी। वह तो पहले ही 16वें हफ़्ते में थी।
सच: आप किसी भी हफ़्ते में शुरू कर सकती हैं। पहली तिमाही हो, दूसरी, तीसरी, या आख़िरी महीना ही क्यों न हो। 36वें हफ़्ते में भी पाँच मिनट का सुकून, सुकून ही है। पूरी बात यहाँ पढ़िए: गर्भ संस्कार कब शुरू करें?
भ्रम 3: इसके लिए रोज़ एक घंटा चाहिए
इंटरनेट पर कई तरीक़ों में रोज़ 30 से 60 मिनट देने को कहा जाता है। कामकाजी माँ के लिए यह नामुमकिन-सा लग सकता है।
सच: बात इतनी मुश्किल है ही नहीं।
- रोज़ पाँच मिनट से शुरुआत बहुत अच्छी है
- देर तक करने से ज़्यादा ज़रूरी है थोड़ा-थोड़ा करते रहना
- थकान वाले दिन दो मिनट भी काफ़ी हैं
पूरा तरीक़ा यहाँ देखिए: घर पर गर्भ संस्कार कैसे करें।
भ्रम 4: हर मंत्र 108 बार, बिल्कुल सही उच्चारण से जपना ज़रूरी है
108 बार जपना एक सुंदर परंपरा है। आपको अच्छा लगता है, तो ज़रूर कीजिए।
सच: यह कोई नियम नहीं है। अर्थ समझकर धीरे-धीरे एक श्लोक जपना ही काफ़ी है। उच्चारण भी एकदम सही होना ज़रूरी नहीं। शिशु आपकी शांत आवाज़ सुनता है, कोई परीक्षा नहीं लेता।
जपते समय साँस सहज रखिए। चक्कर आए या साँस फूले, तो रुककर आराम कीजिए।
शुरू करना चाहें, तो हमारे श्लोक पेज पर हर श्लोक अर्थ के साथ है। शब्द एक-सी रफ़्तार से, एक के बाद एक चमकते जाते हैं, और आप उनके साथ-साथ जप सकती हैं।
भ्रम 5: गर्भ संस्कार सिर्फ़ धार्मिक परिवारों के लिए है
आयशा के साथ काम करने वाली एक सहेली ने पूछा, "यह तो धार्मिक चीज़ है न?"
सच: इसे आप पूजा-पाठ की तरह कर सकती हैं, परंपरा की तरह, या बस शांत मन से। किसी भी धर्म के परिवार, और वे परिवार भी जो कोई धर्म नहीं मानते, शिशु को कहानी सुना सकते हैं, गा सकते हैं और उससे बातें कर सकते हैं।
आपके घर की अपनी प्रार्थनाएँ हैं, तो उन्हें जोड़ लीजिए। नहीं हैं, तो एक प्यारी कहानी या लोरी भी बहुत है।
भ्रम 6: गर्भ संस्कार सिर्फ़ माँ कर सकती है
आयशा के पति भी यही सोचते थे। जब आयशा पढ़कर सुनाती, तो वे बग़ल के कमरे में बैठे रहते।
सच: इसमें सब शामिल हो सकते हैं। फिर आयशा के पति को पता चला कि 2014 की एक रिसर्च में, माँ की तरह पापा की आवाज़ सुनकर भी गर्भ में शिशु की धड़कन बदली। बस, उनकी सोच बदल गई।
अब रविवार की कहानी वही सुनाते हैं। पति, दादा-दादी, नाना-नानी और बड़े भाई-बहन, सब साथ बैठ सकते हैं। पूरे परिवार का साथ जुड़ना भी गर्भ संस्कार के 7 फ़ायदों में से एक है।
भ्रम 7: हर समय ख़ुश रहना ज़रूरी है, वरना शिशु को नुक़सान होगा
इस बात ने आयशा को सबसे ज़्यादा दुख दिया। उस हफ़्ते वह दो बार रो चुकी थी, और इस फ़ॉरवर्ड को पढ़कर वह ख़ुद को ही दोष देने लगी।
एक बात हम साफ़-साफ़ कहना चाहते हैं। गर्भावस्था में कभी-कभी उदासी, थकान या चिंता होना बिल्कुल आम बात है। इसका मतलब यह नहीं कि आपसे कोई ग़लती हुई है।
गर्भ संस्कार का मतलब ख़ुश होने का दिखावा करना नहीं है। इसका मतलब है अपने लिए प्यार और सुकून के कुछ पल निकालना।
अगर उदासी लंबे समय तक रहे या मन बहुत भारी लगे, तो अपने डॉक्टर से ज़रूर बात कीजिए। मदद माँगना हिम्मत और प्यार की निशानी है। भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए मुफ़्त मदद चाहिए, तो दिन हो या रात, कभी भी टेली-मानस को 14416 पर फ़ोन कीजिए।
एक और सच: गर्भ संस्कार कोई दवा नहीं है
गर्भ संस्कार मन की सेहत के लिए एक अच्छी आदत है। यह आपके स्कैन, चेकअप या डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकता। इसे डॉक्टर की देखभाल के साथ कीजिए, उसकी जगह कभी नहीं। हमारी गाइड में पढ़िए: गर्भ संस्कार क्या नहीं कर सकता।
तो गर्भ संस्कार के लिए असल में क्या चाहिए?
ये सारे भ्रम हटा दें, तो लिस्ट बहुत छोटी रह जाती है।
- पाँच मिनट का सुकून, जब भी आपको ठीक लगे
- आपकी आवाज़, किसी भी भाषा में
- कोई एक छोटा काम: कहानी, श्लोक, गाना या कोई हल्की पहेली
- मन पर कोई बोझ नहीं, अगर कोई दिन छूट जाए। कल फिर से शुरू कीजिए।
फिर क्या हुआ?
आयशा ने उसी शाम शुरुआत कर दी। सोफ़े पर बैठकर उसने शिशु को एक छोटी कहानी पढ़कर सुनाई।
एक हफ़्ते बाद उसने परिवार के ग्रुप में लिखा, "आप सबके प्यार के लिए शुक्रिया। मैं रोज़ पाँच मिनट सुकून से बिताती हूँ, और मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।" सास ने दिल वाला इमोजी भेजा, और फ़ॉरवर्ड आख़िरकार कम हो गए।
आयशा कहती है कि हर नियम मानने की कोशिश छोड़ते ही मन कितना हल्का हो गया, उसे यक़ीन नहीं होता। उसके शिशु को कोई परफ़ेक्ट माँ नहीं चाहिए थी। उसे बस अपनी माँ चाहिए थी।
चाहती हैं कि रोज़ क्या करना है, यह कोई और चुन दे? गर्भशिक्षा आपको हर दिन कुछ छोटी-छोटी गतिविधियाँ देती है, आपकी गर्भावस्था के हफ़्ते के हिसाब से: कोई श्लोक, पहेली, कहानी या लोरी। एक कीजिए या सारी, आपकी मर्ज़ी। यह मुफ़्त है, इसमें कोई बड़ा वादा नहीं, और यह दुनिया में कहीं से भी चलता है। आज की गतिविधियाँ देखिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या गर्भ संस्कार बस एक भ्रम है? नहीं। यह एक असली परंपरा और रोज़ की शांत आदत है। भ्रम वे बड़े वादे और नियम हैं, जो समय के साथ इसमें जुड़ते गए, जैसे जीनियस शिशु या रोज़ घंटों का अभ्यास।
गर्भ संस्कार के बारे में सच क्या है? लगभग 18वें हफ़्ते से शिशु सुनने लगता है, और जन्म से पहले बार-बार सुनी आवाज़ें पहचान सकता है। संगीत जैसी शांत चीज़ों से माँ को आराम मिल सकता है। पर इसका कोई सबूत नहीं कि गर्भ संस्कार से शिशु का आईक्यू बढ़ता है।
क्या मंत्र 108 बार जपना ज़रूरी है? नहीं। यह एक परंपरा है, जिसे आप चाहें तो अपना सकती हैं। अर्थ समझकर धीरे-धीरे एक श्लोक जपना ही काफ़ी है।
क्या गर्भ संस्कार डॉक्टर की सलाह की जगह ले सकता है? नहीं। यह एक अच्छी आदत है, दवा नहीं। गर्भावस्था में हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह मानिए।
क्या पिता भी गर्भ संस्कार कर सकते हैं? हाँ। रिसर्च बताती है कि गर्भ में शिशु की धड़कन पापा की आवाज़ सुनकर भी बदल सकती है। पति और घर के बाक़ी लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।