गर्भावस्था में बार-बार नींद टूटना और एकदम सच जैसे लगने वाले सपने आना आम बात है। रात को चिंताएँ भी ज़्यादा घेरती हैं। रात के इन पलों के लिए यहाँ कुछ मधुर श्लोक हैं। ‘रामं स्कन्दं’ सोने से पहले का जाना-माना श्लोक है, जिसे बुरे सपनों से बचाने वाला माना जाता है। ‘शान्ताकारं’ में शेषनाग पर शांति से लेटे विष्णु की छवि है। जिन रातों नींद न आए, उनके लिए ‘ॐ नमः शिवाय’ है, और दुर्गा सप्तशती की वह पंक्ति भी, जिसमें नींद को देवी का रूप माना गया है। शाम को किसी अपने के साथ बोलने के लिए ‘कर्पूरगौरं’ है।
ये श्लोक किसी भी सप्ताह जपे जा सकते हैं। कोई एक श्लोक चुनकर उसे सोते समय या घबराहट होने पर बोलिए। कोई छोटी पंक्ति हल्के स्वर में या मन ही मन दोहराइए। धीमी लय में जप करने से साँस धीमी हो सकती है, और कई माँओं को इससे सुकून मिलता है। जप अपनी सहज रफ़्तार में कीजिए, और साँस फूलने लगे या चक्कर आए, तो रुक जाइए। थकान हो, तो किसी अपने से पढ़कर सुनाने को कहिए — सुन लेना भी काफ़ी है।
ये श्लोक मन को शांत करने का सहारा हैं, नींद की दवा नहीं। अगर ज़्यादातर रातों में नींद नहीं आती, या ज़्यादातर दिन मन उदास रहता है या घबराहट होती है, तो अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएँ। ऐसा बहुत-सी माँओं के साथ होता है, और इसमें मदद मिलती है। ज़रूरी सूचना पढ़ें