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12 श्लोक · किसी भी सप्ताह

नींद और शांत मन के लिए सोने से पहले के श्लोक

गर्भावस्था में बार-बार नींद टूटना और एकदम सच जैसे लगने वाले सपने आना आम बात है। रात को चिंताएँ भी ज़्यादा घेरती हैं। रात के इन पलों के लिए यहाँ कुछ मधुर श्लोक हैं। ‘रामं स्कन्दं’ सोने से पहले का जाना-माना श्लोक है, जिसे बुरे सपनों से बचाने वाला माना जाता है। ‘शान्ताकारं’ में शेषनाग पर शांति से लेटे विष्णु की छवि है। जिन रातों नींद न आए, उनके लिए ‘ॐ नमः शिवाय’ है, और दुर्गा सप्तशती की वह पंक्ति भी, जिसमें नींद को देवी का रूप माना गया है। शाम को किसी अपने के साथ बोलने के लिए ‘कर्पूरगौरं’ है।

ये श्लोक किसी भी सप्ताह जपे जा सकते हैं। कोई एक श्लोक चुनकर उसे सोते समय या घबराहट होने पर बोलिए। कोई छोटी पंक्ति हल्के स्वर में या मन ही मन दोहराइए। धीमी लय में जप करने से साँस धीमी हो सकती है, और कई माँओं को इससे सुकून मिलता है। जप अपनी सहज रफ़्तार में कीजिए, और साँस फूलने लगे या चक्कर आए, तो रुक जाइए। थकान हो, तो किसी अपने से पढ़कर सुनाने को कहिए — सुन लेना भी काफ़ी है।

ये श्लोक मन को शांत करने का सहारा हैं, नींद की दवा नहीं। अगर ज़्यादातर रातों में नींद नहीं आती, या ज़्यादातर दिन मन उदास रहता है या घबराहट होती है, तो अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएँ। ऐसा बहुत-सी माँओं के साथ होता है, और इसमें मदद मिलती है। ज़रूरी सूचना पढ़ें

इन श्लोकों को कैसे जपें

नीचे के हर श्लोक के लिए — जब तक उसके साथ कुछ और न लिखा हो।

सबसे अच्छा समय
सोते समय, या जब भी मन घबराए
जपने का तरीका
धीरे-धीरे साँस लेते हुए धीमे स्वर में या मन ही मन जप, 5–10 मिनट
कौन जप सकता है
माँ; कोई अपना पढ़कर सुना सकता है
सबसे सही सप्ताह
किसी भी सप्ताह

सच कहें तोलय में धीरे-धीरे जप करने से साँस धीमी हो सकती है, और बहुत-से लोगों को इससे सुकून मिलता है (यह शोध उन वयस्कों पर हुआ है जो गर्भवती नहीं थे)।

अच्छी नींद, कम बुरे सपने

रामं स्कन्दं – सोने से पहले का श्लोक

रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम् ।शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति ॥

सोने से पहले बोला जाने वाला पारंपरिक श्लोक

अर्थ

जो सोते समय राम, स्कंद, हनुमान, गरुड़ और भीम को याद करता है, उसे बुरे सपने नहीं आते।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

गर्भावस्था में एकदम असली लगने वाले सपने आना और बार-बार नींद टूटना बहुत आम है। यह भारत में सोते समय बोला जाने वाला जाना-माना पारंपरिक श्लोक है।

इससे क्या मिल सकता है

सोने से पहले का एक शांत नियम। करवट लेकर लेटें और घुटनों के बीच तकिया रखें।

सबसे अच्छा समय
सोते समय

सोने से पहले शांत मन

शान्ताकारं – शांत स्वरूप विष्णु

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

पारंपरिक विष्णु ध्यान श्लोक

अर्थ

उन विष्णु को मेरा प्रणाम, जिनका रूप शांत है, जो शेषनाग पर लेटे हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो जगत का आधार हैं, आकाश जैसे विशाल और बादल जैसे साँवले हैं, जिनकी आँखें कमल जैसी हैं, और जो संसार के भय को दूर करते हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

शांति से लेटे विष्णु की छवि अपने आप नींद का भाव जगाती है। उनकी नाभि से निकलता कमल जन्म की भी छवि है।

इससे क्या मिल सकता है

सोने से पहले धीमी, सुकून देने वाली लय।

सबसे अच्छा समय
सोते समय

किसी अपने के साथ शाम का सुकून

कर्पूरगौरं

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

पारंपरिक (आरती के अंत में बोला जाने वाला श्लोक)

अर्थ

शिव को मेरा प्रणाम, जो कपूर जैसे गोरे हैं, करुणा का रूप हैं, गले में नाग पहने हैं, और भवानी के साथ सदा हृदय रूपी कमल में बसते हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें ईश्वर को एक जोड़ी के रूप में देखा गया है — भवानी के साथ शिव। शाम को किसी अपने के साथ बोलने के लिए अच्छा श्लोक।

इससे क्या मिल सकता है

साथ मिलकर बिताया एक प्यारा पल।

सबसे अच्छा समय
शाम को दीया जलाते समय
कौन जप सकता है
माँ और पिता, साथ मिलकर

जल्दी शांति, नींद न आने पर

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ।

पंचाक्षर मंत्र (यजुर्वेद, श्री रुद्रम्)

अर्थ

मंगल करने वाले शिव को मेरा प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

बहुत छोटा है और धीमी साँसों के साथ दोहराना आसान है — जैसे साँस छोड़ते हुए “ॐ नमः” और अगली साँस पर “शिवाय”।

इससे क्या मिल सकता है

मन जल्दी शांत होता है। नींद न आने वाली रातों में यह अच्छा है; मन ही मन दोहराएँ।

जपने का तरीका
मन ही मन या धीमे स्वर में जप, 5–10 मिनट

पूर्णता और शांति

पूर्णमदः – पूर्ण से पूर्ण

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते ।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥

ईश उपनिषद् का शांति मंत्र; बृहदारण्यक उपनिषद् 5.1.1

अर्थ

वह पूर्ण है, यह भी पूर्ण है। पूर्ण से पूर्ण निकलता है। पूर्ण में से पूर्ण निकाल लेने पर भी पूर्ण ही बचता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

कई माँएँ इसमें जन्म की छवि देखती हैं: आपसे एक पूरा नया इंसान जन्म लेता है, और आप फिर भी पूरी रहती हैं।

इससे क्या मिल सकता है

गहरी शांति। गर्भावस्था के आख़िरी दिनों में और जन्म के बाद यह विचार मन को सहारा देता है।

थकान भरे दिनों का आसान अभ्यास

श्रीराम राम रामेति

श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे ।सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥

विष्णु सहस्रनाम, अंतिम भाग (प्रचलित संस्करणों में)

अर्थ

शिव पार्वती से कहते हैं: “राम, राम, राम” कहने से वही फल मिलता है जो विष्णु के हज़ार नामों के पाठ से मिलता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

थकान भरे दिनों में यह एक पंक्ति पूरे विष्णु सहस्रनाम की जगह ले सकती है।

इससे क्या मिल सकता है

जब ताक़त कम लगे, तब के लिए आसान अभ्यास — मन में कोई अपराध-बोध नहीं।

दीपक पर ध्यान

जैसे हवा से दूर जलता दीपक

यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता ।योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः ॥

भगवद्गीता 6.19

अर्थ

जैसे बिना हवा वाली जगह में रखे दीपक की लौ नहीं काँपती — वैसा ही होता है शांत मन।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

एक दीया जलाइए, उसकी लौ को देखिए और यह श्लोक पढ़िए। यह ध्यान का एक सरल तरीक़ा है।

इससे क्या मिल सकता है

कुछ मिनटों के लिए ठहरा हुआ, शांत मन। दीये को कपड़ों से सुरक्षित दूरी पर रखें।

सबसे अच्छा समय
शाम को दीया जलाते समय

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

परिवार के साथ गाने का मधुर भजन

मंगल भवन अमंगल हारी

मंगल भवन अमंगल हारी ।द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी ॥

रामचरितमानस, बालकांड 112 (चौपाई) · अवधी

अर्थ

जो सब मंगलों के धाम हैं, जो हर अमंगल को दूर करते हैं, और जो बचपन में दशरथ जी के आँगन में खेला करते थे — वे श्रीराम मुझ पर कृपा करें।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें आँगन में खेलते नन्हे राम की झाँकी है। कोमल, सुरीला और घर-घर में गाया जाने वाला भजन।

इससे क्या मिल सकता है

एक आसान भजन, जिसे पूरा परिवार मिलकर गा सकता है।

कौन जप सकता है
पूरा परिवार

यह भी देखें: प्रेगनेंसी में रामायण की चौपाई: भए प्रगट कृपाला और राम जन्म

शांत मन

शांति के रूप में देवी

या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती), अध्याय 5

अर्थ

जो देवी सभी प्राणियों में शांति के रूप में बसी हैं, उन्हें मेरा बार-बार प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

मन में और घर में शांति लाने के लिए एक पंक्ति की प्रार्थना।

इससे क्या मिल सकता है

बेचैनी वाले दिनों में जल्दी मिलने वाली शांति।

यह भी देखें: या देवी सर्वभूतेषु: गर्भावस्था के लिए 11 मंत्र

अच्छी नींद

नींद के रूप में देवी

या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती), अध्याय 5

अर्थ

जो देवी सभी प्राणियों में नींद के रूप में बसी हैं, उन्हें मेरा बार-बार प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें नींद को ही देवी का एक रूप मानकर उसका आदर किया गया है। जिन रातों नींद मुश्किल से आती है, उन रातों के लिए सोने से पहले की एक प्यारी पंक्ति।

इससे क्या मिल सकता है

सोने से पहले का एक कोमल जप। करवट लेकर लेटते हुए इसे धीमे स्वर में दोहराइए।

यह भी देखें: या देवी सर्वभूतेषु: गर्भावस्था के लिए 11 मंत्र

शांत मन से जप

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

श्रीमद्भागवत पुराण (बारह अक्षरों का मंत्र)

अर्थ

सब प्राणियों में बसने वाले भगवान वासुदेव को मेरा प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

12 अक्षरों का एक जाना-माना मंत्र, जिसे माला पर दोहराना आसान है।

इससे क्या मिल सकता है

एक स्थिर लय, जो मन को शांत करती है।

जपने का तरीका
माला फेरते हुए 108 बार, या 11 बार

चिंता से राहत

कृष्णाय वासुदेवाय हरये

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ॥

पारंपरिक

अर्थ

परमात्मा श्रीकृष्ण, गोविंद को मेरा बार-बार प्रणाम — जो भी उन्हें प्रणाम करता है, वे उसके कष्ट दूर कर देते हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

जब चिंताओं का बोझ बढ़ने लगे, तब के लिए एक छोटी-सी प्रार्थना।

इससे क्या मिल सकता है

कंधों से बोझ उतरा-सा लगता है और मन शांत होता है।

स्रोत

हम किसी शोध की बस उतनी ही बात करते हैं, जितनी उसमें सच में पाई गई। ज़्यादातर शोध थोड़े-से लोगों पर हुए हैं, और कोई भी शोध आपके डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकता। ज़रूरी सूचना पढ़ें

  • धीमी लय में जप और साँस

    शोध में क्या पता चला
    23 स्वस्थ वयस्कों पर हुए इस शोध में, प्रार्थना या मंत्र को धीमी लय में बोलने से उनकी साँस धीमी होकर लगभग 6 बार प्रति मिनट रह गई (आराम के समय यह लगभग 14 बार थी)। जप के दौरान उनकी धड़कन का स्वाभाविक उतार-चढ़ाव भी बढ़ा और साँस के साथ लय में आ गया।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    इसमें न गर्भवती महिलाएँ थीं, न संस्कृत श्लोक, न शिशु। असर बस थोड़ी देर के लिए, प्रयोगशाला में मापा गया, और यह गर्भावस्था, प्रसव या शिशु के लिए कोई सेहत-लाभ नहीं दिखाता। ‘6 साँस प्रति मिनट’ बस मापा गया नतीजा है, कोई लक्ष्य नहीं जिसे पाने की कोशिश करनी हो।

    Bernardi et al. (2001). Effect of rosary prayer and yoga mantras on autonomic cardiovascular rhythms: comparative study. BMJ 323(7327):1446-1449.

    शोध का सारांश पढ़ें (अंग्रेज़ी में)पूरा शोध पढ़ें (अंग्रेज़ी में, मुफ़्त)