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अर्थ सहित श्लोक

प्रेगनेंसी में महामृत्युंजय मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद (7.59.12) में आता है। इसमें तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की स्तुति है, जिन्हें ‘पुष्टिवर्धन’ कहा गया है — यानी जो पोषण देते हैं और हमें फलने-फूलने में मदद करते हैं। नाम में ‘मृत्यु’ शब्द आता है, इसलिए कुछ माँएँ प्रेगनेंसी में इसे जपने से हिचकती हैं। पर ‘मृत्युंजय’ का अर्थ है ‘मृत्यु को जीतने वाला’, जो भगवान शिव का ही एक नाम है। यह डराने वाला मंत्र नहीं है। इसमें मृत्यु के बंधन से छूटने की प्रार्थना है — ठीक वैसे, जैसे पकी हुई ककड़ी बिना ज़ोर लगाए अपनी बेल से अलग हो जाती है। बहुत-से परिवार सेहत और हिम्मत के लिए इसका जप करते हैं, और बहुत-सी माँएँ पूरी गर्भावस्था में इसे जपती हैं।

धीरे-धीरे 11 या 21 बार जपिए, और साँस कभी न फूलने दीजिए। भोजन से पहले, या डॉक्टर की दी हुई गोलियाँ लेते समय इसे जपना अच्छा लगता है, और खाने के समय पूरा परिवार भी साथ जप सकता है। कुछ परिवार इसमें जन्म की छवि भी देखते हैं: दिन पूरे होने पर पका फल बेल से अलग हो जाता है। यह एक भाव है, मंत्र का शास्त्रीय अर्थ नहीं, पर बहुत-सी माँओं को इससे सुकून मिलता है। 108 बार का लंबा जाप ज़रूरी नहीं है। माला से जपना अच्छा लगे, तो पीठ को सहारा देकर बैठिए और थकान लगते ही रुक जाइए।

यह धन्यवाद और उम्मीद की प्रार्थना है। खान-पान, आयरन और फ़ॉलिक एसिड की गोलियों या दवाओं को लेकर डॉक्टर जो सलाह दें, यह उसकी जगह नहीं ले सकती। कुछ भी ठीक न लगे, तो तुरंत अपने डॉक्टर को फ़ोन कीजिए। ज़रूरी सूचना पढ़ें

इसे कैसे जपें

सबसे अच्छा समय
भोजन से पहले, या आयरन-कैल्शियम की गोलियाँ लेते समय
जपने का तरीका
11 या 21 बार, धीरे-धीरे
कौन जप सकता है
माँ; भोजन के समय पूरा परिवार
सबसे सही सप्ताह
किसी भी सप्ताह

सच कहें तोयह धन्यवाद की प्रार्थना है। यह खान-पान की सलाह, आयरन और फ़ॉलिक एसिड की गोलियों या दवाओं की जगह नहीं लेती।

सेहत और पोषण

महामृत्युंजय मंत्र

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

ऋग्वेद 7.59.12

अर्थ

हम तीन नेत्रों वाले भगवान की पूजा करते हैं, जो सुगंध से भरे हैं और पोषण बढ़ाते हैं। जैसे पकी हुई ककड़ी अपनी बेल से छूट जाती है, वैसे ही मैं मृत्यु के बंधन से छूट जाऊँ, पर अमरता से नहीं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें शिव को “पुष्टिवर्धन” कहा गया है, यानी जो पोषण देते हैं और हमें बढ़ने में मदद करते हैं। कई परिवार इसमें जन्म की छवि भी देखते हैं: समय पूरा होने पर पका फल आसानी से अलग हो जाता है। (यह हमारी अपनी व्याख्या है, शास्त्रीय अर्थ नहीं।)

इससे क्या मिल सकता है

सेहत के लिए भारत की सबसे ज़्यादा सुकून देने वाली प्रार्थनाओं में से एक। धीरे-धीरे जपें, साँस कभी न फूलने दें।

विषय: माँ की सेहत और पोषण