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11 श्लोक · किसी भी सप्ताह

माँ की सेहत और भोजन के श्लोक

ये श्लोक आपके लिए हैं — होने वाली माँ के लिए। गर्भावस्था में आपका शरीर हर दिन एक नई ज़िंदगी को सींचता है, और यह आसान नहीं होता। इसीलिए हमारे घरों में पीढ़ियों से धन्यवाद की एक छोटी-सी प्रार्थना बोली जाती है: थाली सामने आने पर, सुबह की धूप में, या जिस दिन तबीयत ठीक न लगे। यहाँ महामृत्युंजय मंत्र है, जिसमें शिव को ‘पुष्टिवर्धन’ यानी पोषण देने वाले कहा गया है। भोजन से पहले बोलने के लिए अन्नपूर्णा और ब्रह्मार्पणम् जैसे जाने-माने भोजन मंत्र हैं, आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि का मंत्र है, और थकान भरे दिनों के लिए कुछ बहुत छोटी पंक्तियाँ भी।

इन्हें आप किसी भी सप्ताह जप सकती हैं। कई माँएँ कोई एक श्लोक चुन लेती हैं और उसे हर भोजन से पहले, या डॉक्टर की बताई गोलियाँ लेने से पहले बोलती हैं — दिन की भागदौड़ में एक शांत ठहराव की तरह। पहले अर्थ पढ़िए, फिर धीरे-धीरे जपिए और साँस सहज रखिए। हर श्लोक का मूल पाठ देवनागरी में है और अर्थ सरल हिंदी में।

ये धन्यवाद की प्रार्थनाएँ हैं, इलाज नहीं। खान-पान, आयरन-कैल्शियम की गोलियों और दवाओं के बारे में आपके डॉक्टर की सलाह हमेशा सबसे ऊपर है। कुछ भी ठीक न लगे, तो तुरंत डॉक्टर से बात करें। ज़रूरी सूचना पढ़ें

इन श्लोकों को कैसे जपें

नीचे के हर श्लोक के लिए — जब तक उसके साथ कुछ और न लिखा हो।

सबसे अच्छा समय
भोजन से पहले, या आयरन-कैल्शियम की गोलियाँ लेते समय
जपने का तरीका
हर भोजन से पहले एक बार, या सुबह 11 बार
कौन जप सकता है
माँ; भोजन के समय पूरा परिवार
सबसे सही सप्ताह
किसी भी सप्ताह

सच कहें तोयह धन्यवाद की प्रार्थना है। यह खान-पान की सलाह, आयरन और फ़ॉलिक एसिड की गोलियों या दवाओं की जगह नहीं लेती।

सेहत और पोषण

महामृत्युंजय मंत्र

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

ऋग्वेद 7.59.12

अर्थ

हम तीन नेत्रों वाले भगवान की पूजा करते हैं, जो सुगंध से भरे हैं और पोषण बढ़ाते हैं। जैसे पकी हुई ककड़ी अपनी बेल से छूट जाती है, वैसे ही मैं मृत्यु के बंधन से छूट जाऊँ, पर अमरता से नहीं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें शिव को “पुष्टिवर्धन” कहा गया है, यानी जो पोषण देते हैं और हमें बढ़ने में मदद करते हैं। कई परिवार इसमें जन्म की छवि भी देखते हैं: समय पूरा होने पर पका फल आसानी से अलग हो जाता है। (यह हमारी अपनी व्याख्या है, शास्त्रीय अर्थ नहीं।)

इससे क्या मिल सकता है

सेहत के लिए भारत की सबसे ज़्यादा सुकून देने वाली प्रार्थनाओं में से एक। धीरे-धीरे जपें, साँस कभी न फूलने दें।

जपने का तरीका
11 या 21 बार, धीरे-धीरे

यह भी देखें: प्रेगनेंसी में महामृत्युंजय मंत्र

भोजन के लिए आभार

अन्नपूर्णा – भोजन से पहले

अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे ।ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥

अन्नपूर्णा स्तोत्र (आदि शंकराचार्य की रचना मानी जाती है), श्लोक 11

अर्थ

हे अन्नपूर्णा, आप सदा भरी-पूरी रहती हैं, आप शिव की प्रिय हैं। मुझे अन्न दीजिए, ताकि मेरा ज्ञान बढ़े और मन भीतर से मुक्त होता जाए।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

गर्भावस्था में अच्छा खाना बहुत मायने रखता है। यह श्लोक हर भोजन से पहले एक पल रुककर धन्यवाद कहने का मौक़ा देता है।

इससे क्या मिल सकता है

आप धीरे-धीरे और मन लगाकर खाने लगती हैं। इससे सीने की जलन और जी मिचलाने में भी आराम मिल सकता है, पर अगर ये परेशानियाँ हों, तो अपने डॉक्टर से ज़रूर बात करें।

अपनापन और सहारा

पार्वती मेरी माँ, शिव मेरे पिता

माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः ।बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥

अन्नपूर्णा स्तोत्र, श्लोक 12

अर्थ

देवी पार्वती मेरी माँ हैं, भगवान शिव मेरे पिता हैं, भक्तजन मेरा परिवार हैं, और तीनों लोक मेरा घर हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

अपनेपन का एक प्यारा श्लोक — ख़ासकर तब, जब आप अपने परिवार से दूर हों।

इससे क्या मिल सकता है

यह एहसास कि एक बड़ा परिवार आपको थामे हुए है।

भोजन के लिए आभार

ब्रह्मार्पणम् – भोजन का अर्पण

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥

भगवद्गीता 4.24

अर्थ

अर्पण ईश्वर का रूप है, अन्न ईश्वर का रूप है, अग्नि भी ईश्वर का रूप है। जो हर कर्म में ईश्वर को देखता है, वह ईश्वर को पा लेता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

भारत में भोजन से पहले बोली जाने वाली सबसे जानी-मानी प्रार्थनाओं में से एक।

इससे क्या मिल सकता है

हर बार खाते समय मन में धन्यवाद का भाव।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

अच्छा पाचन

मैं पाचन की अग्नि हूँ

अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः ।प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम् ॥

भगवद्गीता 15.14

अर्थ

मैं जीवों के शरीर में पाचन की अग्नि बन जाता हूँ। साँस के साथ मिलकर मैं चार तरह के भोजन को पचाता हूँ।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

आयुर्वेद गर्भावस्था में अच्छे पाचन (अग्नि) को बहुत महत्व देता है। इसे भोजन से पहले बोलने की परंपरा है।

इससे क्या मिल सकता है

भोजन से पहले एक पल का ठहराव। अगर पेट में जलन या कब्ज़ हो, तो डॉक्टर की बताई खान-पान की सलाह भी मानें।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

सेहत और रोगों से राहत

धन्वंतरि मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः ॥

पारंपरिक धन्वंतरि मंत्र (आयुर्वेद की परंपरा में प्रचलित)

अर्थ

भगवान धन्वंतरि को मेरा प्रणाम — वे विष्णु का रूप हैं, हाथ में अमृत का कलश लिए हैं, और सारे रोग दूर करते हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

धन्वंतरि आयुर्वेद के देवता हैं, इसलिए गर्भावस्था में सेहत के लिए यह बिल्कुल सही प्रार्थना है।

इससे क्या मिल सकता है

मन में उम्मीद और सेहत को लेकर अच्छी सोच। आयरन या कैल्शियम की गोली लेने से पहले इसे बोलें, ताकि गोली लेना याद भी रहे।

सबसे अच्छा समय
सुबह, आयरन-कैल्शियम की गोलियों के साथ

तबीयत ख़राब होने पर सहारा

नाम ही दवा है

अच्युतानन्त गोविन्द नामोच्चारणभेषजात् ।नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ॥

पारंपरिक श्लोक (रचयिता को लेकर अलग-अलग मत हैं)

अर्थ

अच्युत, अनंत और गोविंद — इन नामों को लेना ऐसी दवा है, जिससे सारे रोग दूर हो जाते हैं। यह मेरा सच्चा वचन है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

बहुत छोटा है, और तबीयत ठीक न होने वाले दिनों में भी आसानी से बोला जा सकता है।

इससे क्या मिल सकता है

जब तबीयत ख़राब लगे, तब मन को सहारा। यह दवा की जगह नहीं लेता — दवा भी लें और यह श्लोक भी बोलें।

सुबह की धूप

सेहत के लिए सूर्य को नमस्कार

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥

पारंपरिक श्लोक

अर्थ

जो लोग हर दिन सूर्य को नमस्कार करते हैं, उन्हें लंबी आयु, बुद्धि, बल, ऊर्जा और तेज मिलता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

सुबह कुछ मिनट धूप में निकलने की एक वजह।

इससे क्या मिल सकता है

दिन की ताज़गी भरी शुरुआत।

सबसे अच्छा समय
सुबह-सवेरे की धूप में

सच कहें तोगर्भावस्था में तेज़ी से सूर्य नमस्कार न करें, जब तक गर्भावस्था-योग में प्रशिक्षित कोई शिक्षक आपको न करवाए। सादा नमस्ते ही काफ़ी है।

शांति और रोगों से राहत

द्यौः शांति – हर ओर शांति

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः ।वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥

शुक्ल यजुर्वेद 36.17

अर्थ

आकाश में, हवा में, धरती पर, जल में और जड़ी-बूटियों में शांति हो। हर जगह शांति हो, और वही शांति मुझे भी मिले।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

“ओषधयः शांतिः”, यानी “दवाएँ शांति देने वाली हों” — यह पंक्ति उस माँ पर ठीक बैठती है जो पूरक गोलियाँ ले रही है और अपनी देखभाल करवा रही है।

इससे क्या मिल सकता है

पूरी सृष्टि के लिए शांति की प्रार्थना, जो मन को भी शांत करती है।

सेहत और रोगों से राहत

रोगानशेषान् – सारे रोग दूर करने वाली

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥

देवी माहात्म्य 11.29

अर्थ

आप प्रसन्न होने पर सारे रोग दूर कर देती हैं। जो आपकी शरण में आते हैं, उन पर कोई संकट नहीं आता, और वे ख़ुद दूसरों का सहारा बन जाते हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

दुर्गा सप्तशती का पाठ करने वाले इसे सेहत के लिए परंपरा से बोलते आए हैं।

इससे क्या मिल सकता है

मन को सहारा और उम्मीद।

यह भी देखें: प्रेगनेंसी में दुर्गा सप्तशती

अच्छी भूख

भूख के रूप में देवी

या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती), अध्याय 5

अर्थ

जो देवी सभी प्राणियों में भूख के रूप में बसी हैं, उन्हें मेरा बार-बार प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

भूख भी पवित्र है — इसी के सहारे शरीर शिशु को पोषण देता है। भोजन के समय के लिए एक कोमल-सा श्लोक।

इससे क्या मिल सकता है

भूख और कुछ ख़ास खाने की तलब को लेकर ख़ुद के साथ ज़्यादा नरमी, और मन में कम अपराध-बोध।

यह भी देखें: या देवी सर्वभूतेषु: गर्भावस्था के लिए 11 मंत्र