जी मिचलाने और तकलीफ़ में सहारा
आती-जाती लहरों को सह लें
भगवद्गीता 2.14
अर्थ
सर्दी-गर्मी, सुख-दुख के एहसास आते-जाते रहते हैं। वे टिकते नहीं। उन्हें धीरज से सहिए।
हमने यह श्लोक क्यों चुना
जी मिचलाना, थकान और मूड का बार-बार बदलना अक्सर 12–16 सप्ताह तक आते-आते कम हो जाते हैं। यह श्लोक याद दिलाता है कि ‘यह समय भी बीत जाएगा’।
इससे क्या मिल सकता है
तकलीफ़ को पहले से ज़्यादा शांत मन से सहने का एक तरीका।
- सबसे अच्छा समय
- सुबह जागते ही, या जब भी मन बेचैन हो
- जपने का तरीका
- एक श्लोक, 3–11 बार। 5 मिनट का छोटा-सा अभ्यास काफ़ी है
- कौन जप सकता है
- माँ; थकान वाले दिनों में परिवार पढ़कर सुना सकता है
- सबसे सही सप्ताह
- 4–13 सप्ताह
सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह जी मिचलाने का इलाज नहीं है। बहुत ज़्यादा उल्टी हो, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।
विषय: पहली तिमाही में राहत