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अर्थ सहित 19 श्लोक

गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

क्या प्रेगनेंसी में गीता पढ़ सकती हैं? बिल्कुल। बहुत-सी माँएँ रोज़ गीता के कुछ श्लोक पढ़ती हैं, और कुछ एक बार में पूरा अध्याय। गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, इसलिए पूरी गीता पढ़ना ज़रूरी नहीं। हमने ऐसे 19 श्लोक चुने हैं जो गर्भावस्था के दिनों से मेल खाते हैं, और उन्हें गीता के ही क्रम में रखा है।

कुछ श्लोक शुरुआती हफ़्तों के लिए हैं। ‘आती-जाती लहरों को सह लें’ (2.14) याद दिलाता है कि थकान और जी मिचलाने वाले दिन भी बीत जाते हैं, और 6.17 खान-पान, नींद और काम में संतुलन की बात करता है। अध्याय 14 में श्रीकृष्ण सृष्टि को समझाने के लिए गर्भ का ही उदाहरण देते हैं (14.3), और उसके बाद वाला श्लोक होने वाले पिता के पढ़ने के लिए बहुत सुंदर है। बीच के महीनों के लिए श्लोक 16.1–3 उन ‘दैवी गुणों’ को गिनाते हैं, जिन्हें बहुत-से माता-पिता बड़े होते बच्चे में देखना चाहते हैं। आख़िरी हफ़्तों में 2.47 — अपना कर्म कीजिए, फल की चिंता छोड़िए — बहुत-सी माँओं को यह मानने में मदद करता है कि प्रसव हर बार योजना के मुताबिक़ नहीं चलता।

किसी भी तिमाही में, दिन के जिस समय मन लगे, पढ़िए; सुबह का समय बहुत-सी माँओं को भाता है। पहले अर्थ पढ़िए, फिर एक श्लोक धीरे-धीरे कुछ बार जपिए, या बस शिशु को पढ़कर सुनाइए। गीता से न शिशु का स्वभाव तय होता है, न यह कि प्रसव कैसा होगा; हाँ, यह दिन में कुछ ठहरे हुए, शांत पल ज़रूर दे सकती है। सेहत से जुड़ी हर बात में सबसे पहले डॉक्टर की सलाह मानिए। ज़रूरी सूचना पढ़ें

जी मिचलाने और तकलीफ़ में सहारा

आती-जाती लहरों को सह लें

मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः ।आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥

भगवद्गीता 2.14

अर्थ

सर्दी-गर्मी, सुख-दुख के एहसास आते-जाते रहते हैं। वे टिकते नहीं। उन्हें धीरज से सहिए।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

जी मिचलाना, थकान और मूड का बार-बार बदलना अक्सर 12–16 सप्ताह तक आते-आते कम हो जाते हैं। यह श्लोक याद दिलाता है कि ‘यह समय भी बीत जाएगा’।

इससे क्या मिल सकता है

तकलीफ़ को पहले से ज़्यादा शांत मन से सहने का एक तरीका।

सबसे अच्छा समय
सुबह जागते ही, या जब भी मन बेचैन हो
जपने का तरीका
एक श्लोक, 3–11 बार। 5 मिनट का छोटा-सा अभ्यास काफ़ी है
कौन जप सकता है
माँ; थकान वाले दिनों में परिवार पढ़कर सुना सकता है
सबसे सही सप्ताह
4–13 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह जी मिचलाने का इलाज नहीं है। बहुत ज़्यादा उल्टी हो, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

विषय: पहली तिमाही में राहत

प्रसव की योजना पर पकड़ ढीली करना

अपना काम कीजिए, फल की चिंता छोड़िए

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥

भगवद्गीता 2.47

अर्थ

तुम्हारा अधिकार सिर्फ़ अपने कर्म पर है, उसके फल पर नहीं। केवल फल के लिए कर्म मत करो, और कर्म करना छोड़ो भी मत।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

प्रसव शायद ही कभी पूरी तरह योजना के मुताबिक़ होता है। यह श्लोक आपको अच्छी तैयारी करने और फिर चिंता छोड़ देने में मदद करता है।

इससे क्या मिल सकता है

‘एकदम सही प्रसव’ का दबाव कम होता है।

सबसे अच्छा समय
रोज़ एक ही समय पर
जपने का तरीका
अपने 1–2 “प्रसव के श्लोक” चुनें और प्रसव का समय आने तक रोज़ उन्हें दोहराएँ
कौन जप सकता है
माँ और प्रसव के समय साथ रहने वाले
सबसे सही सप्ताह
28–37 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह पक्का नहीं कर सकता कि प्रसव सामान्य ही होगा। हर सुरक्षित जन्म अच्छा जन्म है — सिज़ेरियन से हुआ जन्म भी।

विषय: प्रसव की तैयारी

उतार-चढ़ाव में स्थिर रहना

दुख और सुख में स्थिर

दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः ।वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥

भगवद्गीता 2.56

अर्थ

जो दुख में घबराता नहीं, सुख में लालच नहीं करता, और मोह, भय और क्रोध से मुक्त है, उसे स्थिर बुद्धि वाला कहा जाता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

पहली तिमाही में हार्मोन के कारण मूड बार-बार बदलता है। यह श्लोक स्थिर मन का आदर्श सामने रखता है।

इससे क्या मिल सकता है

भावुक दिनों में एक कोमल सहारा। मूड का बार-बार बदलना आम बात है; ख़ुद के साथ प्यार से पेश आइए।

सबसे अच्छा समय
सुबह जागते ही, या जब भी मन बेचैन हो
जपने का तरीका
एक श्लोक, 3–11 बार। 5 मिनट का छोटा-सा अभ्यास काफ़ी है
कौन जप सकता है
माँ; थकान वाले दिनों में परिवार पढ़कर सुना सकता है
सबसे सही सप्ताह
4–13 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह जी मिचलाने का इलाज नहीं है। बहुत ज़्यादा उल्टी हो, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

विषय: पहली तिमाही में राहत

भोजन के लिए आभार

ब्रह्मार्पणम् – भोजन का अर्पण

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥

भगवद्गीता 4.24

अर्थ

अर्पण ईश्वर का रूप है, अन्न ईश्वर का रूप है, अग्नि भी ईश्वर का रूप है। जो हर कर्म में ईश्वर को देखता है, वह ईश्वर को पा लेता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

भारत में भोजन से पहले बोली जाने वाली सबसे जानी-मानी प्रार्थनाओं में से एक।

इससे क्या मिल सकता है

हर बार खाते समय मन में धन्यवाद का भाव।

सबसे अच्छा समय
भोजन से पहले, या आयरन-कैल्शियम की गोलियाँ लेते समय
जपने का तरीका
हर भोजन से पहले एक बार, या सुबह 11 बार
कौन जप सकता है
माँ; भोजन के समय पूरा परिवार
सबसे सही सप्ताह
किसी भी सप्ताह

सच कहें तोयह धन्यवाद की प्रार्थना है। यह खान-पान की सलाह, आयरन और फ़ॉलिक एसिड की गोलियों या दवाओं की जगह नहीं लेती।

विषय: माँ की सेहत और पोषण

ख़ुद पर भरोसा

ख़ुद को ऊपर उठाइए

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् ।आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥

भगवद्गीता 6.5

अर्थ

अपनी कोशिश से ख़ुद को ऊपर उठाइए। ख़ुद को डूबने मत दीजिए। इंसान ख़ुद ही अपना सबसे अच्छा दोस्त है, और ख़ुद ही अपना दुश्मन भी बन सकता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

आपकी संतान में ख़ुद पर भरोसा जगाने के लिए — और मुश्किल दिनों में आपके लिए भी।

इससे क्या मिल सकता है

मन में आत्मविश्वास बढ़ता है।

सबसे अच्छा समय
सुबह
जपने का तरीका
3–11 बार, फिर इसका अर्थ बोलकर पढ़ें
कौन जप सकता है
माँ और पिता
सबसे सही सप्ताह
16–32 सप्ताह

सच कहें तोयह उम्मीद की प्रार्थना है। बच्चे का स्वभाव जीन, सेहत, प्यार और परवरिश से बनता है। जप करके बच्चे में गुण “भरे” नहीं जा सकते।

विषय: संतान के अच्छे गुण

संतुलित दिनचर्या

खान-पान, नींद और काम में संतुलन

युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु ।युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ॥

भगवद्गीता 6.17

अर्थ

जिसका खाना-पीना, आराम, काम, सोना और जागना संतुलित है, योग उसके दुख दूर कर देता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह आयुर्वेद में बताई गई गर्भवती स्त्री की देखभाल (गर्भिणी परिचर्या) से मेल खाता है: सही मात्रा में खाना, आराम और शांत दिनचर्या।

इससे क्या मिल सकता है

प्यार से याद दिलाता है कि आराम करें, थोड़ा-थोड़ा करके समय पर खाएँ और ख़ुद को ज़्यादा न थकाएँ।

सबसे अच्छा समय
सुबह जागते ही, या जब भी मन बेचैन हो
जपने का तरीका
एक श्लोक, 3–11 बार। 5 मिनट का छोटा-सा अभ्यास काफ़ी है
कौन जप सकता है
माँ; थकान वाले दिनों में परिवार पढ़कर सुना सकता है
सबसे सही सप्ताह
4–13 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह जी मिचलाने का इलाज नहीं है। बहुत ज़्यादा उल्टी हो, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

विषय: पहली तिमाही में राहत

दीपक पर ध्यान

जैसे हवा से दूर जलता दीपक

यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता ।योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः ॥

भगवद्गीता 6.19

अर्थ

जैसे बिना हवा वाली जगह में रखे दीपक की लौ नहीं काँपती — वैसा ही होता है शांत मन।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

एक दीया जलाइए, उसकी लौ को देखिए और यह श्लोक पढ़िए। यह ध्यान का एक सरल तरीक़ा है।

इससे क्या मिल सकता है

कुछ मिनटों के लिए ठहरा हुआ, शांत मन। दीये को कपड़ों से सुरक्षित दूरी पर रखें।

सबसे अच्छा समय
शाम को दीया जलाते समय
जपने का तरीका
धीरे-धीरे साँस लेते हुए धीमे स्वर में या मन ही मन जप, 5–10 मिनट
कौन जप सकता है
माँ; कोई अपना पढ़कर सुना सकता है
सबसे सही सप्ताह
किसी भी सप्ताह

सच कहें तोलय में धीरे-धीरे जप करने से साँस धीमी हो सकती है, और बहुत-से लोगों को इससे सुकून मिलता है (यह शोध उन वयस्कों पर हुआ है जो गर्भवती नहीं थे)।

विषय: नींद और शांत मन

पूरे परिवार का श्लोक

आप ही जगत के माता-पिता हैं

पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः ।वेद्यं पवित्रमोङ्कार ऋक्साम यजुरेव च ॥

भगवद्गीता 9.17

अर्थ

इस जगत का पिता मैं हूँ, माता मैं हूँ, आधार मैं हूँ और दादा भी मैं हूँ। जो जानने योग्य है, वह मैं हूँ; पवित्र मैं हूँ; ॐ और वेद भी मैं ही हूँ।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें परिवार के हर रिश्ते का नाम आता है, इसलिए पूरा परिवार इसे साथ मिलकर बोल सकता है।

इससे क्या मिल सकता है

यह एहसास कि इस गर्भावस्था में पूरा परिवार शामिल है।

सबसे अच्छा समय
शाम को, शांत कमरे में, पेट पर हाथ रखकर
जपने का तरीका
एक हफ़्ते तक रोज़ वही श्लोक दोहराएँ। धीमे स्वर में गाएँ या बोलें
कौन जप सकता है
पूरा परिवार
सबसे सही सप्ताह
18–28 सप्ताह

सच कहें तोलगभग 19वें सप्ताह से शिशु आवाज़ पर प्रतिक्रिया देने लगते हैं, और गर्भावस्था के आख़िरी हफ़्तों में बार-बार सुनी आवाज़ें सीख लेते हैं। वे आवाज़ सीखते हैं, उसका मतलब नहीं।

विषय: शिशु से जुड़ाव

चिंता के समय भरोसा

उनकी ज़रूरतों का भार मैं उठाता हूँ

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते ।तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥

भगवद्गीता 9.22

अर्थ

जो पूरे विश्वास से मुझे याद करते हैं, उनकी ज़रूरतों का ध्यान मैं रखता हूँ और जो उनके पास है, उसकी रक्षा करता हूँ।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

शुरुआती गर्भावस्था में पैसे, काम-काज और सेहत की चिंता होने लगती है। यह श्लोक भरोसा रखने को कहता है।

इससे क्या मिल सकता है

इस बोझ से राहत कि सब कुछ आपको अकेले ही सँभालना है।

सबसे अच्छा समय
सुबह जागते ही, या जब भी मन बेचैन हो
जपने का तरीका
एक श्लोक, 3–11 बार। 5 मिनट का छोटा-सा अभ्यास काफ़ी है
कौन जप सकता है
माँ; थकान वाले दिनों में परिवार पढ़कर सुना सकता है
सबसे सही सप्ताह
4–13 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह जी मिचलाने का इलाज नहीं है। बहुत ज़्यादा उल्टी हो, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

विषय: पहली तिमाही में राहत

नए जीवन का अचरज

जो अभी जन्म लेंगे, उनका स्रोत

मृत्युः सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम् ।कीर्तिः श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा ॥

भगवद्गीता 10.34

अर्थ

जो अभी जन्म लेने वाले हैं, उनका स्रोत मैं हूँ। स्त्रियों के गुणों में मैं यश, शोभा, वाणी, स्मृति, बुद्धि, दृढ़ता और धैर्य हूँ।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो जीव अभी आने वाले हैं, उनका स्रोत वही हैं — इनमें आपका शिशु भी है। फिर वे सात ताक़तें गिनाते हैं, जिनका सहारा एक माँ लेती है।

इससे क्या मिल सकता है

मन में अंदरूनी ताक़त और अचरज का भाव।

सबसे अच्छा समय
शाम को, शांत कमरे में, पेट पर हाथ रखकर
जपने का तरीका
एक हफ़्ते तक रोज़ वही श्लोक दोहराएँ। धीमे स्वर में गाएँ या बोलें
कौन जप सकता है
माँ, पिता, बड़े भाई-बहन
सबसे सही सप्ताह
18–28 सप्ताह

सच कहें तोलगभग 19वें सप्ताह से शिशु आवाज़ पर प्रतिक्रिया देने लगते हैं, और गर्भावस्था के आख़िरी हफ़्तों में बार-बार सुनी आवाज़ें सीख लेते हैं। वे आवाज़ सीखते हैं, उसका मतलब नहीं।

विषय: शिशु से जुड़ाव

दयालुता

सब पर दया

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च ।निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥

भगवद्गीता 12.13

अर्थ

किसी से नफ़रत नहीं, सबसे दोस्ती और दया, न स्वार्थ, न घमंड, सुख-दुख में एक-सा मन, और क्षमा करने का स्वभाव।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

दयालु इंसान कैसा होता है, इसकी एक सुंदर झलक।

इससे क्या मिल सकता है

मन में कोमल भाव; सोने से पहले के लिए अच्छा।

सबसे अच्छा समय
सुबह
जपने का तरीका
3–11 बार, फिर इसका अर्थ बोलकर पढ़ें
कौन जप सकता है
माँ और पिता
सबसे सही सप्ताह
16–32 सप्ताह

सच कहें तोयह उम्मीद की प्रार्थना है। बच्चे का स्वभाव जीन, सेहत, प्यार और परवरिश से बनता है। जप करके बच्चे में गुण “भरे” नहीं जा सकते।

विषय: संतान के अच्छे गुण

संतोष और पक्का इरादा

संतुष्ट और अडिग

सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः ।मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः ॥

भगवद्गीता 12.14

अर्थ

जो हमेशा संतुष्ट रहता है, संयम रखता है, अपने संकल्प पर अडिग है, और जिसने अपना मन और हृदय मुझे सौंप दिया है, वह मुझे प्रिय है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

संतोष और पक्का इरादा — ये दो गुण जीवन भर संतान का साथ देते हैं।

इससे क्या मिल सकता है

मन में सुकून भरा एहसास कि “जितना है, बहुत है”।

सबसे अच्छा समय
सुबह
जपने का तरीका
3–11 बार, फिर इसका अर्थ बोलकर पढ़ें
कौन जप सकता है
माँ और पिता
सबसे सही सप्ताह
16–32 सप्ताह

सच कहें तोयह उम्मीद की प्रार्थना है। बच्चे का स्वभाव जीन, सेहत, प्यार और परवरिश से बनता है। जप करके बच्चे में गुण “भरे” नहीं जा सकते।

विषय: संतान के अच्छे गुण

गर्भावस्था को सृष्टि मानकर उसका सम्मान

मैं ही महान गर्भ हूँ

मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम् ।सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥

भगवद्गीता 14.3

अर्थ

महान प्रकृति मेरा गर्भ है। उसमें मैं बीज रखता हूँ। उसी से सब प्राणी जन्म लेते हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

श्रीकृष्ण सृष्टि को समझाने के लिए गर्भावस्था को ही उदाहरण बनाते हैं। आपका शरीर इस समय जो कर रहा है, यह श्लोक उसका सम्मान करता है।

इससे क्या मिल सकता है

गर्भावस्था को लेकर गरिमा और अचरज का एहसास, जो थकान के दिनों में या अपने शरीर को लेकर चिंता होने पर मदद करता है।

सबसे अच्छा समय
सुबह, दोनों साथ मिलकर
जपने का तरीका
धीरे-धीरे 3 या 11 बार जपें
कौन जप सकता है
माँ और पिता, साथ मिलकर
सबसे सही सप्ताह
गर्भधारण से पहले और 8वें सप्ताह तक

सच कहें तोयह एक आशीर्वाद है, उम्मीद जताने का एक ढंग। यह गर्भ ठहरने में मदद करने वाला इलाज नहीं है।

विषय: संतान की कामना और शुरुआती हफ़्ते

पिता के लिए एक श्लोक

बीज देने वाले पिता

सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः ।तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता ॥

भगवद्गीता 14.4

अर्थ

किसी भी गर्भ से जन्म लेने वाले हर रूप के लिए प्रकृति माँ है, और मैं बीज देने वाला पिता हूँ।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

पिता के पढ़ने के लिए एक सुंदर श्लोक। इसमें माता-पिता दोनों को पावन साथी के रूप में देखा गया है।

इससे क्या मिल सकता है

यह पिता को बिल्कुल शुरुआत से ही साथ जुड़ने का न्योता देता है।

सबसे अच्छा समय
सुबह, दोनों साथ मिलकर
जपने का तरीका
धीरे-धीरे 3 या 11 बार जपें
कौन जप सकता है
पिता (माँ के साथ)
सबसे सही सप्ताह
गर्भधारण से पहले और 8वें सप्ताह तक

सच कहें तोयह एक आशीर्वाद है, उम्मीद जताने का एक ढंग। यह गर्भ ठहरने में मदद करने वाला इलाज नहीं है।

विषय: संतान की कामना और शुरुआती हफ़्ते

अच्छा पाचन

मैं पाचन की अग्नि हूँ

अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः ।प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम् ॥

भगवद्गीता 15.14

अर्थ

मैं जीवों के शरीर में पाचन की अग्नि बन जाता हूँ। साँस के साथ मिलकर मैं चार तरह के भोजन को पचाता हूँ।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

आयुर्वेद गर्भावस्था में अच्छे पाचन (अग्नि) को बहुत महत्व देता है। इसे भोजन से पहले बोलने की परंपरा है।

इससे क्या मिल सकता है

भोजन से पहले एक पल का ठहराव। अगर पेट में जलन या कब्ज़ हो, तो डॉक्टर की बताई खान-पान की सलाह भी मानें।

सबसे अच्छा समय
भोजन से पहले, या आयरन-कैल्शियम की गोलियाँ लेते समय
जपने का तरीका
हर भोजन से पहले एक बार, या सुबह 11 बार
कौन जप सकता है
माँ; भोजन के समय पूरा परिवार
सबसे सही सप्ताह
किसी भी सप्ताह

सच कहें तोयह धन्यवाद की प्रार्थना है। यह खान-पान की सलाह, आयरन और फ़ॉलिक एसिड की गोलियों या दवाओं की जगह नहीं लेती।

विषय: माँ की सेहत और पोषण

अच्छा चरित्र

दैवी गुण – भाग 1

अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः ।दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ॥

भगवद्गीता 16.1

अर्थ

निडरता, साफ़ मन, स्थिर ज्ञान, उदारता, संयम, पूजा, अध्ययन, अनुशासन और ईमानदारी।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

गीता 16.1–3 में ख़ुद गीता ने “दैवी गुणों” की सूची दी है।

इससे क्या मिल सकता है

माता-पिता के रूप में सोचने-विचारने के लिए कुछ साफ़-साफ़ संस्कार।

सबसे अच्छा समय
सुबह
जपने का तरीका
3–11 बार, फिर इसका अर्थ बोलकर पढ़ें
कौन जप सकता है
माँ और पिता
सबसे सही सप्ताह
16–32 सप्ताह

सच कहें तोयह उम्मीद की प्रार्थना है। बच्चे का स्वभाव जीन, सेहत, प्यार और परवरिश से बनता है। जप करके बच्चे में गुण “भरे” नहीं जा सकते।

विषय: संतान के अच्छे गुण

दयालुता

दैवी गुण – भाग 2

अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम् ।दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् ॥

भगवद्गीता 16.2

अर्थ

अहिंसा, सच्चाई, गुस्सा न करना, त्याग, शांति, चुगली न करना, सभी प्राणियों पर दया, लालच न होना, कोमलता, लज्जा और स्थिरता।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

दया और कोमलता — यही वे गुण हैं जो माता-पिता अपनी संतान में सबसे ज़्यादा चाहते हैं।

इससे क्या मिल सकता है

यह याद दिलाता है कि ये गुण पहले आप ख़ुद अपनाएँ — बच्चे असल में इसी तरह सीखते हैं।

सबसे अच्छा समय
सुबह
जपने का तरीका
3–11 बार, फिर इसका अर्थ बोलकर पढ़ें
कौन जप सकता है
माँ और पिता
सबसे सही सप्ताह
16–32 सप्ताह

सच कहें तोयह उम्मीद की प्रार्थना है। बच्चे का स्वभाव जीन, सेहत, प्यार और परवरिश से बनता है। जप करके बच्चे में गुण “भरे” नहीं जा सकते।

विषय: संतान के अच्छे गुण

अच्छा चरित्र

दैवी गुण – दैवी स्वभाव लेकर जन्मे व्यक्ति के

तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता ।भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत ॥

भगवद्गीता 16.3

अर्थ

तेज, क्षमा, दृढ़ता, साफ़-सफ़ाई, किसी से बैर न रखना और घमंड न करना — ये गुण उसमें होते हैं जो दैवी स्वभाव लेकर जन्मा है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें “अभिजात” शब्द आता है, जिसका अर्थ है “जन्मा हुआ”। इसी वजह से गीता की गुणों वाली सूची में यह श्लोक जन्म से सबसे ज़्यादा जुड़ा है।

इससे क्या मिल सकता है

तीन श्लोकों के इस सिलसिले का एक सार्थक अंत।

सबसे अच्छा समय
सुबह
जपने का तरीका
3–11 बार, फिर इसका अर्थ बोलकर पढ़ें
कौन जप सकता है
माँ और पिता
सबसे सही सप्ताह
16–32 सप्ताह

सच कहें तोयह उम्मीद की प्रार्थना है। बच्चे का स्वभाव जीन, सेहत, प्यार और परवरिश से बनता है। जप करके बच्चे में गुण “भरे” नहीं जा सकते।

विषय: संतान के अच्छे गुण

आस्था के साथ मेहनत

जहाँ ज्ञान और मेहनत मिलते हैं

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ।तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ॥

भगवद्गीता 18.78 (गीता का आख़िरी श्लोक)

अर्थ

जहाँ योग के स्वामी श्रीकृष्ण हैं और जहाँ धनुष लिए तैयार अर्जुन हैं, वहाँ सौभाग्य, विजय, ख़ुशहाली और सही आचरण होंगे।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

आस्था और मेहनत साथ-साथ: एक ओर आपकी प्रार्थनाएँ, दूसरी ओर आपकी देखभाल करने वाले डॉक्टर और नर्स।

इससे क्या मिल सकता है

आख़िरी हफ़्तों में भरोसे के साथ क़दम रखना।

सबसे अच्छा समय
रोज़ एक ही समय पर
जपने का तरीका
अपने 1–2 “प्रसव के श्लोक” चुनें और प्रसव का समय आने तक रोज़ उन्हें दोहराएँ
कौन जप सकता है
माँ और प्रसव के समय साथ रहने वाले
सबसे सही सप्ताह
28–37 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह पक्का नहीं कर सकता कि प्रसव सामान्य ही होगा। हर सुरक्षित जन्म अच्छा जन्म है — सिज़ेरियन से हुआ जन्म भी।

विषय: प्रसव की तैयारी

स्रोत

हम किसी शोध की बस उतनी ही बात करते हैं, जितनी उसमें सच में पाई गई। ज़्यादातर शोध थोड़े-से लोगों पर हुए हैं, और कोई भी शोध आपके डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकता। ज़रूरी सूचना पढ़ें

  • धीमी लय में जप और साँस

    शोध में क्या पता चला
    23 स्वस्थ वयस्कों पर हुए इस शोध में, प्रार्थना या मंत्र को धीमी लय में बोलने से उनकी साँस धीमी होकर लगभग 6 बार प्रति मिनट रह गई (आराम के समय यह लगभग 14 बार थी)। जप के दौरान उनकी धड़कन का स्वाभाविक उतार-चढ़ाव भी बढ़ा और साँस के साथ लय में आ गया।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    इसमें न गर्भवती महिलाएँ थीं, न संस्कृत श्लोक, न शिशु। असर बस थोड़ी देर के लिए, प्रयोगशाला में मापा गया, और यह गर्भावस्था, प्रसव या शिशु के लिए कोई सेहत-लाभ नहीं दिखाता। ‘6 साँस प्रति मिनट’ बस मापा गया नतीजा है, कोई लक्ष्य नहीं जिसे पाने की कोशिश करनी हो।

    Bernardi et al. (2001). Effect of rosary prayer and yoga mantras on autonomic cardiovascular rhythms: comparative study. BMJ 323(7327):1446-1449.

    शोध का सारांश पढ़ें (अंग्रेज़ी में)पूरा शोध पढ़ें (अंग्रेज़ी में, मुफ़्त)

  • गर्भ में शिशु कब से आवाज़ पर प्रतिक्रिया देने लगता है

    शोध में क्या पता चला
    माँ के पेट पर रखे स्पीकर से आवाज़ सुनाने पर, गर्भ में शिशु सबसे पहले लगभग 19वें सप्ताह में हरकत करते दिखे। 27वें सप्ताह तक लगभग सभी शिशु भारी, नीचे सुर वाली आवाज़ों पर प्रतिक्रिया देने लगे थे।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    इसमें सिर्फ़ ‘बीप’ जैसी सादी ध्वनियाँ सुनाई गई थीं — न बोली, न संगीत, न जप। इसलिए यह नहीं बताता कि शिशु शब्द समझते हैं, या श्लोक, कहानी और संगीत सुनने से उन्हें कोई फ़ायदा होता है।

    Hepper & Shahidullah (1994). Development of fetal hearing. Archives of Disease in Childhood - Fetal and Neonatal Edition 71(2):F81-F87.

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  • जन्म से पहले बार-बार सुनी आवाज़ें सीखना

    शोध में क्या पता चला
    जिन शिशुओं ने गर्भावस्था के आख़िरी तीन महीनों में एक बेमतलब, बनाया हुआ शब्द बार-बार सुना, जन्म के बाद उनके दिमाग़ ने उस शब्द की ध्वनियों पर ज़्यादा तेज़ प्रतिक्रिया दी। यानी आख़िरी महीनों में बार-बार सुनी आवाज़ें शिशु सीख और याद रख सकते हैं।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    यह आवाज़ों की याद दिखाता है, मतलब की समझ नहीं। यह बुद्धि, भाषा या आगे के विकास पर किसी असर को नहीं दिखाता। शोधकर्ता यह भी चेताते हैं कि गर्भ में विकसित हो रहे सुनने के तंत्र को शोर से नुक़सान पहुँच सकता है।

    Partanen et al. (2013). Learning-induced neural plasticity of speech processing before birth. Proceedings of the National Academy of Sciences of the United States of America 110(37):15145-15150.

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