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अर्थ सहित 2 श्लोक

प्रेगनेंसी में ॐ का जाप

क्या प्रेगनेंसी में ॐ का जाप कर सकती हैं? हाँ। ॐ सबसे सरल जप है। माण्डूक्य उपनिषद् की शुरुआत ही यह कहकर होती है कि ॐ ही यह सारा जगत है। इसके लिए न माला चाहिए, न कोई ख़ास समय। ॐ को लेकर आपके घर में कोई अपना नियम हो, तो उसी को मानिए। बहुत-सी माँएँ सुबह आँख खुलते ही, या जब भी मन बेचैन हो, ॐ जपती हैं।

आराम से बैठिए, सहज साँस लीजिए, और साँस छोड़ते हुए धीमे स्वर में ‘ओ…म्’ बोलिए। धीरे-धीरे, देर तक साँस छोड़ने से बहुत-से लोगों को आराम महसूस होता है। एक छोटे शोध में देखा गया कि लय में धीरे-धीरे जप करने से साँस धीमी हो जाती है — हालाँकि यह शोध उन वयस्कों पर हुआ था जो गर्भवती नहीं थे। 7 से 11 बार काफ़ी है। आवाज़ लंबी खींचने के लिए ज़ोर न लगाइए, साँस न रोकिए, और जब भी ज़रूरत हो, साँस ले लीजिए। आख़िरी हफ़्तों में और प्रसव की शुरुआत में कुछ महिलाओं को हर बार साँस छोड़ते हुए नीचे सुर में ‘ॐ’ या ‘म्म्म’ गुनगुनाना अच्छा लगता है। प्रसव की तैयारी कराने वाले बहुत-से प्रशिक्षक भी ऐसी ही धीमी आवाज़ें सिखाते हैं।

ॐ का जाप मन को शांत रखने में मदद कर सकता है। यह जी मिचलाने का इलाज नहीं है, और इंटरनेट पर चाहे जो लिखा हो, इससे शिशु का विकास नहीं बदलता। प्रसव के समय सबसे पहले अपने डॉक्टर, दाई या नर्स की बात मानिए, और जब वे किसी ख़ास ढंग से ज़ोर लगाने को कहें, तब गुनगुनाना छोड़ दीजिए। अगर आपकी गर्भावस्था हाई-रिस्क है, या चक्कर आए या साँस फूले, तो रुक जाइए और आगे जपने से पहले डॉक्टर से पूछिए। ज़रूरी सूचना पढ़ें

मन शांत करने का सबसे सरल जप

ॐ, पहली ध्वनि

ओमित्येतदक्षरमिदं सर्वम् ।

माण्डूक्य उपनिषद् 1

अर्थ

ॐ ही यह सारा जगत है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

ॐ सबसे सरल जप है। धीमी आवाज़ में लंबा ‘ओ…म्’ साँस छोड़ने का समय बढ़ा देता है, और देर तक साँस छोड़ने से बहुत-से लोगों को आराम महसूस होता है।

इससे क्या मिल सकता है

कुछ ही बार जपने में बहुत-से लोगों का मन शांत होने लगता है। धीमी आवाज़ में जपिए, इसे लंबा खींचने के लिए कभी ज़ोर न लगाइए, और जब भी ज़रूरत हो, साँस ले लीजिए।

सबसे अच्छा समय
सुबह जागते ही, या जब भी मन बेचैन हो
जपने का तरीका
धीमे स्वर में 7–11 बार “ॐ” का जप करें; हर बार के बीच साँस को अपने-आप चलने दें
कौन जप सकता है
माँ; थकान वाले दिनों में परिवार पढ़कर सुना सकता है
सबसे सही सप्ताह
4–13 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह जी मिचलाने का इलाज नहीं है। बहुत ज़्यादा उल्टी हो, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

विषय: पहली तिमाही में राहत

जबड़ा ढीला छोड़ना और साँस धीमी रखना

साँस छोड़ते हुए धीमा ॐ

ॐ

माण्डूक्य उपनिषद्

अर्थ

पवित्र ध्वनि।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

साँस को लंबा और आराम से छोड़ते हुए नीचे सुर में ‘ॐ’ या ‘म्म्म’ गुनगुनाना — यह वैसी ही धीमी, गहरी आवाज़ है, जैसी प्रसव की तैयारी कराने वाले बहुत-से प्रशिक्षक सिखाते हैं।

इससे क्या मिल सकता है

कई महिलाओं को लगता है कि इससे जबड़े और पेड़ू की मांसपेशियों को ढीला छोड़ने में मदद मिलती है। पर हमेशा पहले अपने डॉक्टर, दाई या नर्स की बात मानें।

सबसे अच्छा समय
प्रसव की शुरुआत में और दर्द की लहरों के बीच
जपने का तरीका
हर बार साँस छोड़ते हुए धीमी गुनगुनाहट
कौन जप सकता है
प्रसव के समय साथ रहने वाले और माँ
सबसे सही सप्ताह
37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय

सच कहें तोजब दाई या नर्स आपको किसी ख़ास ढंग से ज़ोर लगाने को कहें, तब इसका जप न करें।

विषय: प्रसव का समय

स्रोत

हम किसी शोध की बस उतनी ही बात करते हैं, जितनी उसमें सच में पाई गई। ज़्यादातर शोध थोड़े-से लोगों पर हुए हैं, और कोई भी शोध आपके डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकता। ज़रूरी सूचना पढ़ें

  • धीमी लय में जप और साँस

    शोध में क्या पता चला
    23 स्वस्थ वयस्कों पर हुए इस शोध में, प्रार्थना या मंत्र को धीमी लय में बोलने से उनकी साँस धीमी होकर लगभग 6 बार प्रति मिनट रह गई (आराम के समय यह लगभग 14 बार थी)। जप के दौरान उनकी धड़कन का स्वाभाविक उतार-चढ़ाव भी बढ़ा और साँस के साथ लय में आ गया।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    इसमें न गर्भवती महिलाएँ थीं, न संस्कृत श्लोक, न शिशु। असर बस थोड़ी देर के लिए, प्रयोगशाला में मापा गया, और यह गर्भावस्था, प्रसव या शिशु के लिए कोई सेहत-लाभ नहीं दिखाता। ‘6 साँस प्रति मिनट’ बस मापा गया नतीजा है, कोई लक्ष्य नहीं जिसे पाने की कोशिश करनी हो।

    Bernardi et al. (2001). Effect of rosary prayer and yoga mantras on autonomic cardiovascular rhythms: comparative study. BMJ 323(7327):1446-1449.

    शोध का सारांश पढ़ें (अंग्रेज़ी में)पूरा शोध पढ़ें (अंग्रेज़ी में, मुफ़्त)