पहली तिमाही अक्सर सबसे मुश्किल होती है — जी मिचलाना, थकान, बात-बात पर बदलता मूड और मन में दबी चिंता, कई बार तब, जब अभी किसी को बताया तक नहीं होता। इस पेज के छोटे और जाने-पहचाने श्लोक 4 से 13 सप्ताह के लिए चुने गए हैं। इनमें सुबह बिस्तर छोड़ने से पहले बोली जाने वाली प्रार्थनाएँ हैं, गीता का वह श्लोक है जो याद दिलाता है कि तकलीफ़ आती-जाती रहती है, और माँ दुर्गा का वह श्लोक है जिसका सहारा परिवार डर के समय लेते आए हैं। साथ ही ॐ और ॐ गं गणपतये नमः जैसे सरल मंत्र भी हैं।
लंबे समय तक बैठने की ज़रूरत नहीं। कोई एक श्लोक चुनिए और उसे 3 से 11 बार जपिए — पाँच मिनट काफ़ी हैं। धीरे-धीरे, लय में जपने से साँस धीमी हो सकती है, और बहुत-से लोगों को इससे सुकून मिलता है। उतना ही धीरे जपिए जितना आराम से हो सके, और साँस फूलने लगे या चक्कर आए, तो रुक जाइए। जिस दिन बहुत थकान हो या तबीयत ठीक न लगे, उस दिन बस अर्थ पढ़ लेना भी बहुत है, या घर में किसी से कहिए कि पढ़कर सुना दे।
इन श्लोकों से मन को थोड़ा सहारा मिल सकता है, पर ये जी मिचलाने का इलाज नहीं हैं। अगर इतनी उल्टी हो कि खाना-पानी भी न टिके, या कोई भी बात परेशान करे, तो अपने डॉक्टर को फ़ोन कीजिए। ज़रूरी सूचना पढ़ें