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14 श्लोक · 4–13 सप्ताह

पहली तिमाही के लिए श्लोक और मंत्र

पहली तिमाही अक्सर सबसे मुश्किल होती है — जी मिचलाना, थकान, बात-बात पर बदलता मूड और मन में दबी चिंता, कई बार तब, जब अभी किसी को बताया तक नहीं होता। इस पेज के छोटे और जाने-पहचाने श्लोक 4 से 13 सप्ताह के लिए चुने गए हैं। इनमें सुबह बिस्तर छोड़ने से पहले बोली जाने वाली प्रार्थनाएँ हैं, गीता का वह श्लोक है जो याद दिलाता है कि तकलीफ़ आती-जाती रहती है, और माँ दुर्गा का वह श्लोक है जिसका सहारा परिवार डर के समय लेते आए हैं। साथ ही ॐ और ॐ गं गणपतये नमः जैसे सरल मंत्र भी हैं।

लंबे समय तक बैठने की ज़रूरत नहीं। कोई एक श्लोक चुनिए और उसे 3 से 11 बार जपिए — पाँच मिनट काफ़ी हैं। धीरे-धीरे, लय में जपने से साँस धीमी हो सकती है, और बहुत-से लोगों को इससे सुकून मिलता है। उतना ही धीरे जपिए जितना आराम से हो सके, और साँस फूलने लगे या चक्कर आए, तो रुक जाइए। जिस दिन बहुत थकान हो या तबीयत ठीक न लगे, उस दिन बस अर्थ पढ़ लेना भी बहुत है, या घर में किसी से कहिए कि पढ़कर सुना दे।

इन श्लोकों से मन को थोड़ा सहारा मिल सकता है, पर ये जी मिचलाने का इलाज नहीं हैं। अगर इतनी उल्टी हो कि खाना-पानी भी न टिके, या कोई भी बात परेशान करे, तो अपने डॉक्टर को फ़ोन कीजिए। ज़रूरी सूचना पढ़ें

इन श्लोकों को कैसे जपें

नीचे के हर श्लोक के लिए — जब तक उसके साथ कुछ और न लिखा हो।

सबसे अच्छा समय
सुबह जागते ही, या जब भी मन बेचैन हो
जपने का तरीका
एक श्लोक, 3–11 बार। 5 मिनट का छोटा-सा अभ्यास काफ़ी है
कौन जप सकता है
माँ; थकान वाले दिनों में परिवार पढ़कर सुना सकता है
सबसे सही सप्ताह
4–13 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह जी मिचलाने का इलाज नहीं है। बहुत ज़्यादा उल्टी हो, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

जी मिचलाने और तकलीफ़ में सहारा

आती-जाती लहरों को सह लें

मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः ।आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥

भगवद्गीता 2.14

अर्थ

सर्दी-गर्मी, सुख-दुख के एहसास आते-जाते रहते हैं। वे टिकते नहीं। उन्हें धीरज से सहिए।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

जी मिचलाना, थकान और मूड का बार-बार बदलना अक्सर 12–16 सप्ताह तक आते-आते कम हो जाते हैं। यह श्लोक याद दिलाता है कि ‘यह समय भी बीत जाएगा’।

इससे क्या मिल सकता है

तकलीफ़ को पहले से ज़्यादा शांत मन से सहने का एक तरीका।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

संतुलित दिनचर्या

खान-पान, नींद और काम में संतुलन

युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु ।युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ॥

भगवद्गीता 6.17

अर्थ

जिसका खाना-पीना, आराम, काम, सोना और जागना संतुलित है, योग उसके दुख दूर कर देता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह आयुर्वेद में बताई गई गर्भवती स्त्री की देखभाल (गर्भिणी परिचर्या) से मेल खाता है: सही मात्रा में खाना, आराम और शांत दिनचर्या।

इससे क्या मिल सकता है

प्यार से याद दिलाता है कि आराम करें, थोड़ा-थोड़ा करके समय पर खाएँ और ख़ुद को ज़्यादा न थकाएँ।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

डर और घबराहट में राहत

हर डर से हमारी रक्षा करें

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) 11.24

अर्थ

हे देवी, आप हर रूप में विराजमान हैं, सबकी स्वामिनी हैं और हर शक्ति से भरी हैं — हमें हर डर से बचाइए। हे दुर्गा, हम आपको प्रणाम करते हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

पहला स्कैन, जाँच के नतीजे और पहले कभी गर्भ खो देने की याद मन में गहरा डर जगा सकते हैं। यह देवी का वह जाना-माना श्लोक है जो डर दूर करता है।

इससे क्या मिल सकता है

घबराहट के समय मन को थामने वाला एहसास। अगर घबराहट हर समय बनी रहती है, तो कृपया अपने डॉक्टर से बात करें।

यह भी देखें: प्रेगनेंसी में दुर्गा सप्तशती

बिना रुकावट नई शुरुआत

वक्रतुंड महाकाय

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

गणेश जी का पारंपरिक श्लोक (किस ग्रंथ से लिया गया है, यह निश्चित नहीं)

अर्थ

हे गणेश, टेढ़ी सूँड़ और विशाल शरीर वाले, करोड़ सूर्यों जैसी चमक वाले! मेरे सभी कामों में आने वाली बाधाएँ हमेशा दूर कीजिए।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

भारतीय परिवार हर नई शुरुआत गणेश जी के नाम से करते हैं। अपने गर्भ संस्कार के सफ़र की शुरुआत भी उन्हीं से करना स्वाभाविक लगता है।

इससे क्या मिल सकता है

एक जानी-पहचानी, आसान शुरुआत। ज़्यादातर माँएँ इसे पहले से जानती हैं।

चिंता के समय भरोसा

उनकी ज़रूरतों का भार मैं उठाता हूँ

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते ।तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥

भगवद्गीता 9.22

अर्थ

जो पूरे विश्वास से मुझे याद करते हैं, उनकी ज़रूरतों का ध्यान मैं रखता हूँ और जो उनके पास है, उसकी रक्षा करता हूँ।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

शुरुआती गर्भावस्था में पैसे, काम-काज और सेहत की चिंता होने लगती है। यह श्लोक भरोसा रखने को कहता है।

इससे क्या मिल सकता है

इस बोझ से राहत कि सब कुछ आपको अकेले ही सँभालना है।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

2 मिनट में झटपट शांति

अँधेरे से उजाले की ओर ले चलो

असतो मा सद्गमय ।तमसो मा ज्योतिर्गमय ।मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥

बृहदारण्यक उपनिषद् 1.3.28

अर्थ

मुझे असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह छोटा है, धीमा है, और तबीयत ठीक न लगे तब भी आसानी से जपा जा सकता है।

इससे क्या मिल सकता है

धीरे-धीरे बोलने से साँस धीमी हो सकती है; बहुत-से लोग इसे 2 मिनट में मन शांत करने के लिए जपते हैं।

मन शांत करने का सबसे सरल जप

ॐ, पहली ध्वनि

ओमित्येतदक्षरमिदं सर्वम् ।

माण्डूक्य उपनिषद् 1

अर्थ

ॐ ही यह सारा जगत है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

ॐ सबसे सरल जप है। धीमी आवाज़ में लंबा ‘ओ…म्’ साँस छोड़ने का समय बढ़ा देता है, और देर तक साँस छोड़ने से बहुत-से लोगों को आराम महसूस होता है।

इससे क्या मिल सकता है

कुछ ही बार जपने में बहुत-से लोगों का मन शांत होने लगता है। धीमी आवाज़ में जपिए, इसे लंबा खींचने के लिए कभी ज़ोर न लगाइए, और जब भी ज़रूरत हो, साँस ले लीजिए।

जपने का तरीका
धीमे स्वर में 7–11 बार “ॐ” का जप करें; हर बार के बीच साँस को अपने-आप चलने दें

यह भी देखें: प्रेगनेंसी में ॐ का जाप

तबीयत ठीक न होने पर शक्ति

नासै रोग हरै सब पीरा

नासै रोग हरै सब पीरा ।जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥

हनुमान चालीसा (तुलसीदास), चौपाई 25 · अवधी

अर्थ

जो वीर हनुमान का नाम लगातार जपता है, उसके रोग नष्ट हो जाते हैं और सारी पीड़ा दूर हो जाती है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

बहुत-से भारतीय घरों में हनुमान चालीसा सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली प्रार्थना है, और दादी-नानी अक्सर गर्भावस्था में इसे पढ़ने की सलाह देती हैं।

इससे क्या मिल सकता है

सुकून और हिम्मत। यह शक्ति के लिए प्रार्थना है, दवा नहीं; डॉक्टर ने जो इलाज और देखभाल बताई है, उसे जारी रखें।

यह भी देखें: प्रेगनेंसी में हनुमान चालीसा

थकान भरे दिनों में मन की ताक़त

मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

हनुमान चालीसा, शुरुआत का दोहा 2 · अवधी

अर्थ

अपनी बुद्धि को कमज़ोर जानकर मैं पवनपुत्र हनुमान को याद करती हूँ। मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए, और मेरे कष्ट दूर कीजिए।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

शुरुआती हफ़्तों की थकान में यह मन की ताक़त के लिए एक विनम्र प्रार्थना है।

इससे क्या मिल सकता है

मन थोड़ा हल्का होता है और सहारा मिलने का एहसास होता है।

यह भी देखें: प्रेगनेंसी में हनुमान चालीसा

सजग मन से दिन की शुरुआत

धरती माँ को सुबह का प्रणाम

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले ।विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे ॥

सुबह की पारंपरिक प्रार्थना

अर्थ

हे पृथ्वी देवी, समुद्र जिनके वस्त्र हैं और पर्वत जिनका शृंगार हैं, हे विष्णु की पत्नी! आपको मेरा प्रणाम। अपने पैरों से आपको छूने के लिए मुझे क्षमा करें।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यहाँ धरती को दूध पिलाती माँ के रूप में देखा गया है। यह वेदों की उस बात से जुड़ता है जिसमें धरती शिशु को सँभाले रखती है (देखें श्लोक “जैसे धरती सबको सँभाले है, वैसे ही आपका शिशु सँभला रहे”)।

इससे क्या मिल सकता है

बिस्तर से उठते समय एक कोमल, सजग पहला क़दम। धीरे-धीरे खड़ी हों; शुरुआती गर्भावस्था में चक्कर आ सकते हैं।

सबसे अच्छा समय
जागते ही, बिस्तर से उतरने से पहले

दिन की अच्छी शुरुआत

सुबह उठते ही हथेलियों के दर्शन

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती ।करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥

सुबह की पारंपरिक प्रार्थना

अर्थ

उँगलियों के सिरों पर लक्ष्मी बसती हैं, हथेली के बीच में सरस्वती और कलाई के पास गोविंद। इसलिए सुबह उठकर अपनी हथेलियों को देखिए।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

10 सेकंड में दिन की अच्छी शुरुआत, और जिस सुबह जी मिचला रहा हो, तब भी आसान।

इससे क्या मिल सकता है

रोज़ का एक छोटा-सा नियम, जिससे दिनचर्या बनने लगती है।

सबसे अच्छा समय
जागते ही

संतोष

संतोष के रूप में देवी

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

देवी माहात्म्य, अध्याय 5

अर्थ

जो देवी सभी प्राणियों में संतोष के रूप में बसी हैं, उन्हें मेरा बार-बार प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

शुरुआती गर्भावस्था में बेचैनी हो सकती है और मन दूसरों से अपनी तुलना करने लगता है। यह पंक्ति कहती है कि आज जो है, उसी में संतोष रखिए।

इससे क्या मिल सकता है

एक ठहरा हुआ, आभार भरा एहसास।

यह भी देखें: या देवी सर्वभूतेषु: गर्भावस्था के लिए 11 मंत्र

उतार-चढ़ाव में स्थिर रहना

दुख और सुख में स्थिर

दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः ।वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥

भगवद्गीता 2.56

अर्थ

जो दुख में घबराता नहीं, सुख में लालच नहीं करता, और मोह, भय और क्रोध से मुक्त है, उसे स्थिर बुद्धि वाला कहा जाता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

पहली तिमाही में हार्मोन के कारण मूड बार-बार बदलता है। यह श्लोक स्थिर मन का आदर्श सामने रखता है।

इससे क्या मिल सकता है

भावुक दिनों में एक कोमल सहारा। मूड का बार-बार बदलना आम बात है; ख़ुद के साथ प्यार से पेश आइए।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

रोज़ का छोटा जप

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ गं गणपतये नमः ॥

गणपति अथर्वशीर्ष की परंपरा

अर्थ

सबके नायक गणेश जी को प्रणाम। ‘गं’ उनका बीज मंत्र है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

बहुत छोटा है, इसलिए माला पर आसानी से दोहराया जा सकता है — उन दिनों भी जब शरीर में ताक़त कम लगे।

इससे क्या मिल सकता है

एक शांत, लयबद्ध अभ्यास, जिसमें बस कुछ ही मिनट लगते हैं।

जपने का तरीका
माला फेरते हुए 108 बार, या 11 बार

स्रोत

हम किसी शोध की बस उतनी ही बात करते हैं, जितनी उसमें सच में पाई गई। ज़्यादातर शोध थोड़े-से लोगों पर हुए हैं, और कोई भी शोध आपके डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकता। ज़रूरी सूचना पढ़ें

  • धीमी लय में जप और साँस

    शोध में क्या पता चला
    23 स्वस्थ वयस्कों पर हुए इस शोध में, प्रार्थना या मंत्र को धीमी लय में बोलने से उनकी साँस धीमी होकर लगभग 6 बार प्रति मिनट रह गई (आराम के समय यह लगभग 14 बार थी)। जप के दौरान उनकी धड़कन का स्वाभाविक उतार-चढ़ाव भी बढ़ा और साँस के साथ लय में आ गया।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    इसमें न गर्भवती महिलाएँ थीं, न संस्कृत श्लोक, न शिशु। असर बस थोड़ी देर के लिए, प्रयोगशाला में मापा गया, और यह गर्भावस्था, प्रसव या शिशु के लिए कोई सेहत-लाभ नहीं दिखाता। ‘6 साँस प्रति मिनट’ बस मापा गया नतीजा है, कोई लक्ष्य नहीं जिसे पाने की कोशिश करनी हो।

    Bernardi et al. (2001). Effect of rosary prayer and yoga mantras on autonomic cardiovascular rhythms: comparative study. BMJ 323(7327):1446-1449.

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