आयुर्वेद का प्रसव मंत्र
चरक का प्रसव मंत्र
संस्कृत विद्वान की जाँच बाक़ी है
चरक संहिता, शारीर स्थान 8 (जातिसूत्रीय); श्लोक संख्या संस्करण के अनुसार बदलती है
अर्थ
धरती, जल, आकाश, अग्नि, वायु, विष्णु और प्रजापति सदा आपकी और आपके शिशु की रक्षा करें, और आपको आसान, बिना रुकावट का प्रसव दें।
हमने यह श्लोक क्यों चुना
यह आयुर्वेद का प्रसव मंत्र है। चरक कहते हैं कि कोई दयालु, सहारा देने वाली स्त्री इसे प्रसव से गुज़र रही माँ के कान में बोले। हम सिर्फ़ यही पंक्ति सुझाते हैं, जिसमें शिशु के बेटा या बेटी होने की कोई बात नहीं है।
इससे क्या मिल सकता है
प्रसव के दौरान कोई भरोसेमंद व्यक्ति प्यार से बात करे, तो डर कम हो सकता है। प्रसव के समय आपके साथ रहने वाले व्यक्ति से कहिए कि वे यह पंक्ति याद कर लें।
- कौन जप सकता है
- प्रसव के समय साथ रहने वाले, आपकी माँ या दाई आपको पढ़कर सुनाएँ