शांति: सुकून भरी कहानियाँ
लहरों के साथ साँस
नई कहानी · लगभग 2 मिनट · 7वाँ सप्ताह
शांत समुंदर के किनारे, हम लहरों के साथ पाँच धीमी साँसें लेते हैं।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
चलो, समुंदर के किनारे बैठते हैं... तुम और मैं।
हमारे नीचे रेत नरम और ठंडी है। हल्की हवा हमारे चेहरे को छूती है। आसमान खुला है, हल्का नीला। सामने समुंदर बिल्कुल शांत है।
सुनो... श्श्श... श्श्श... लहरें धीरे-धीरे आती हैं। लहरें धीरे-धीरे लौट जाती हैं। लहर आती है... लहर जाती है।
चलो, लहरों के साथ साँस लें। कोई जल्दी नहीं है। बस आसान, सहज साँसें। हवा को अपने आप अंदर आने दो... और अपने आप बाहर जाने दो।
एक... एक लहर आती है। साँस अंदर लो... धीरे से। लहर पीछे लौटती है। और बाहर... आराम से।
दो... साँस अंदर लो... जैसे पानी रेत पर ऊपर आता है। और बाहर... जैसे वो वापस समुंदर में जाता है।
शायद कोई भागता हुआ ख़याल भी आ जाए। कोई बात नहीं। उसे लहर पर बैठा दो। उसे बह जाने दो। लहर आती है... लहर जाती है।
तीन... साँस अंदर लो... ठंडी हवा को महसूस करो। और बाहर... कंधों को ढीला होने दो।
चार... साँस अंदर लो... आसान और धीमी। और बाहर... समुंदर की तरह, लंबी और नरम साँस।
पाँच... साँस अंदर लो... समुंदर शांत है। हम शांत हैं। और बाहर... सब कुछ नरम है, चुप है।
अब साँस को अपने आप चलने दो। अब गिनने की ज़रूरत नहीं। हमारा शरीर जानता है कि साँस कैसे लेनी है। लहर आती है... लहर जाती है।
हमारे पैरों के पास एक छोटी सी सफ़ेद सीपी पड़ी है। पानी उसे छूता है और लौट जाता है। छप... और वापस। छप... और वापस।
हम थोड़ी देर और यहीं बैठते हैं, सुरक्षित और सुकून से, एक साथ। समुंदर साँस ले रहा है। और हम भी।
“धीमी साँस से मन शांत होता है।”
गर्भ संवाद
हमने शांत समुंदर की तरह धीरे-धीरे साँस ली। मेरे साथ साँस लो: अंदर... और बाहर। हम दोनों साथ में शांत हैं, मेरी जान।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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