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गर्भ संवाद: शिशु से बातें

आराम करना भी ठीक है

गर्भ संवाद · लगभग 2 मिनट · 7वाँ सप्ताह

थकान भरा दिन, और अपनों की प्यारी सीख: नई ज़िंदगी पालना भी असली काम है।

लगभग 2 मिनटआराम से बैठिए, एक हाथ पेट पर रखिए, और धीरे-धीरे, प्यार से पढ़िए।

हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।

आज का दिन बहुत धीमा और भारी था। आँखें बार-बार बंद हो रही थीं। हाथ-पैर ऐसे लग रहे थे, जैसे उनमें रेत भरी हो। करने को कामों की लंबी लिस्ट थी। मैंने लगभग कुछ भी नहीं किया।

दोपहर को मैं लेट गई। अंदर से एक छोटी सी आवाज़ आई, "उठो। कितना काम पड़ा है।"

तभी [परिवार के सदस्य का नाम] ने मेरे पास बिस्तर पर बैठकर मेरे बालों पर प्यार से हाथ फेरा। फिर धीमी आवाज़ में कहा, "आराम करो। तुम खाली नहीं बैठी हो। तुम्हारे अंदर एक नई ज़िंदगी बन रही है। यह भी असली काम है। सबसे बड़ा काम।"

आराम करना भी ठीक है।

पंखा धीरे-धीरे घूम रहा था। खिड़की पर एक कबूतर गुटर-गूँ कर रहा था। चादर ठंडी और नरम थी। [परिवार के सदस्य का नाम] ने चादर मेरे पैरों तक खींच दी और कहा, "काम इंतज़ार कर सकता है। तुम्हारा आराम नहीं।"

तो मैंने आँखें बंद कर लीं। कंधे ढीले छोड़ दिए। अपनी धीमी साँसें सुनती रही, अंदर... बाहर...

आराम करना भी ठीक है।

पता है, नन्ही जान, अभी हर दिन तुम्हारा नन्हा सा शरीर थोड़ा-थोड़ा बन रहा है। मैं चुपचाप लेटी भी रहूँ, तब भी मेरा शरीर तुम्हारे लिए काम करता रहता है। तो जब मैं आराम करती हूँ, तब भी मैं तुम्हारी मदद करती हूँ। और तुम्हारी वजह से मैं थोड़ा रुकना सीख रही हूँ।

जब आँख खुली, तो बाहर धूप सुनहरी हो चुकी थी। कामों की लिस्ट वहीं की वहीं थी। और यह बिल्कुल ठीक था।

आराम करना भी ठीक है। आज मैंने हम दोनों के लिए आराम किया। इतना काफ़ी है।

कहानी की सीख
“आराम करना भी देखभाल है।”

गर्भ संवाद

आज मैंने हम दोनों के लिए आराम किया। इतना काफ़ी है। जब मैं आराम करती हूँ, तब भी तुम्हारा ख़याल रखती हूँ। चलो, अब धीरे से सो जाते हैं, नन्ही जान।

इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।

मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।

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यहाँ हर कहानी प्यार से, शांति से ख़त्म होती है। डराने वाले या दुखी अंत हम नहीं रखते, और पुरानी कथाएँ आसान शब्दों में सुनाते हैं।

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