कथा: सुनाने वाली कहानियाँ
गार्गी के बड़े सवाल
पुरानी कथा, नए शब्दों में · लगभग 3 मिनट · 21वाँ सप्ताह
राजा जनक की सभा में ज्ञानी गार्गी दुनिया के बारे में बड़े-बड़े सवाल पूछती हैं।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
बहुत पहले, मिथिला में जनक नाम के एक बड़े ज्ञानी राजा थे। उन्हें सीखना बहुत अच्छा लगता था। दूर-दूर से ज्ञानी लोग उनकी सभा में बातचीत करने आते थे।
एक सुबह, धूप खिली हुई थी और सभा भरी हुई थी। ठंडे पत्थर के फ़र्श पर रोशनी पड़ रही थी। ऊँची खिड़कियों के बाहर चिड़ियाँ गा रही थीं। बीच में महान ऋषि याज्ञवल्क्य बैठे थे, शांत, जैसे ठहरी हुई झील।
तभी एक महिला उठकर खड़ी हुईं। उनका नाम था गार्गी। उनकी आँखों में चमक थी और चेहरे पर अपनापन। गार्गी को दुनिया के बारे में सोचना, जानना बहुत अच्छा लगता था।
उन्होंने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, "ऋषिवर, क्या मैं आपसे कुछ सवाल पूछ सकती हूँ?"
याज्ञवल्क्य बोले, "ज़रूर पूछो, गार्गी।"
गार्गी ने नदियों और बारिश के बारे में सोचा। फिर बोलीं, "ये सारी दुनिया पानी पर टिकी है। तो बताइए, पानी को किसने थाम रखा है?"
ऋषि ने कहा, "पानी को हवा ने थाम रखा है, गार्गी।"
गार्गी मुस्कुराईं और एक और सवाल पूछा।
"और हवा? हवा को किसने थाम रखा है?"
ऋषि ने सिर हिलाया। "हवा को इस खुले आकाश ने थाम रखा है।"
सभा में सन्नाटा छा गया। सब ध्यान से सुनने के लिए आगे झुक गए। गार्गी मुस्कुराईं और एक और सवाल पूछा।
"और आकाश? आकाश को किसने थाम रखा है?"
याज्ञवल्क्य ने ऊपर देखा, जैसे छत के पार बहुत दूर तक देख रहे हों। "आकाश अपने ऊपर के उजले लोकों पर टिका है," उन्होंने कहा। "सूरज, चाँद और तारों के लोकों पर।"
गार्गी की आँखें चमक उठीं। वो किसी को हराना नहीं चाहती थीं। उन्हें तो बस और जानना अच्छा लगता था। हर जवाब एक नया दरवाज़ा खोल देता, और गार्गी उसके पार झाँककर देखना चाहतीं।
गार्गी मुस्कुराईं और एक और सवाल पूछा। फिर एक और। फिर एक और। हर सवाल पहले से ऊँचा, पहले से गहरा।
ऋषि ने हर सवाल का जवाब बड़े प्यार से दिया। आखिर में उन्होंने धीरे से कहा, "गार्गी, इन सबके पीछे एक शांत, अटल सच है। वही सूरज और चाँद को उनकी जगह थामे रखता है। वो सब कुछ ऐसे प्यार से थामे रखता है, जैसे माँ अपनी नन्ही जान को थामती है।"
सभा बिल्कुल शांत हो गई। फिर धीरे-धीरे हलचल हुई। लोग सिर हिला रहे थे। मुस्कुरा रहे थे।
राजा जनक खड़े हुए। "कितने सुंदर सवाल हैं!" उन्होंने कहा। "आज गार्गी ने हम सबको और गहराई से सोचना सिखाया है।"
सभा के ज्ञानी लोग आदर से गार्गी की ओर देखने लगे। किसी ने हाथ जोड़े। कोई धीरे से बोला, "कितनी गहरी सोच है इनकी!"
गार्गी ने ऋषि को प्रणाम किया, और ऋषि ने भी उन्हें प्रणाम किया। दोनों खुश थे। एक अच्छा सवाल और एक अच्छा जवाब, पुराने दोस्तों की तरह मिले थे।
बाहर नदी बहती रही। आकाश ने सूरज को थामे रखा। और हज़ारों साल बाद, आज भी लोग गार्गी के सवालों को याद करते हैं।
“अच्छे सवाल मन को बड़ा बनाते हैं।”
गर्भ संवाद
गार्गी पूछती गईं, और हर जवाब के साथ उनका मन और बड़ा होता गया। जितने चाहो सवाल पूछना, नन्ही जान। मुझे हर सवाल प्यारा लगेगा। हम दोनों मिलकर आकाश और तारों के बारे में सोचेंगे।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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