शांति: सुकून भरी कहानियाँ
पतंग और डोर
नई कहानी · लगभग 3 मिनट · 21वाँ सप्ताह
हवा वाली शाम, पतंग समझती है कि डोर उसे ऊँचा उड़ने में मदद करती है।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
हवा वाली एक सुहानी शाम है। हम छत पर खड़े हैं। सूरज नीचे उतर आया है, सुनहरा-सा। हल्की हवा मेरे दुपट्टे से खेल रही है।
मेरे हाथों में एक छोटी-सी लाल पतंग है। उसकी डोर लकड़ी की चरखी से खुलती है। चलो, उसे प्यार से पकड़ते हैं... और छोड़ देते हैं।
सर्र... हवा पतंग को उठा लेती है। वह ऊपर जाती है, थोड़ी-सी... फिर थोड़ी और।
पतंग फड़फड़ाती है, नाचती है। फिर डोर से धीरे से कहती है, "डोर, मुझे क्यों बाँधकर रखा है? मुझे छोड़ दो। फिर मैं बादलों तक उड़ जाऊँगी।"
डोर प्यार से जवाब देती है, "नन्ही पतंग, मैं तुम्हें रोकती नहीं हूँ। मैं तुम्हें संभालती हूँ। मुझ पर टिककर देखो, फिर क्या होता है।"
पतंग को पूरा यकीन नहीं है। पर वह डोर पर भरोसा करती है। वह थोड़ा-सा पीछे टिकती है।
और हवा उसे थाम लेती है। सर्र्र... पतंग और ऊँची उठती है।
ऊँची और ऊँची, हौले-हौले, धीरे-धीरे।
"अरे!" पतंग कहती है। "जब मैं तुम पर टिकती हूँ, तो हवा मुझे ऊपर उठा देती है।"
"हाँ," डोर कहती है। "मेरे बिना तुम इधर-उधर बह जाती। मेरे साथ हवा का सामना करना आसान है। मैं ज़ंजीर नहीं हूँ। मैं थामने वाला हाथ हूँ।"
पतंग मुस्कुराती है। वह बाएँ झूलती है... दाएँ झूलती है... और फिर ऊपर चढ़ती है। नीम के पेड़ से ऊपर। पानी की टंकी से ऊपर। ऊपर, और ऊपर, पहले छोटे बादल के पास तक।
ऊँची और ऊँची, हौले-हौले, धीरे-धीरे।
नीचे, मैं डोर थामे खड़ी हूँ। डोर पतली है, पर मज़बूत है। उसके सहारे मुझे पतंग महसूस होती है। एक हल्का-सा खिंचाव, जैसे कोई हेलो कह रहा हो। खिंच... खिंच... मैं यहीं हूँ... मैं यहीं हूँ...
पंछी घर लौट रहे हैं। आसमान गुलाबी होता है, फिर बैंगनी। पतंग छतों के ऊपर शांत और खुश तैर रही है।
नन्ही जान, एक दिन तुम्हारी उड़ान का भी समय आएगा। नई चीज़ें, नई जगहें, नए दोस्त। और मैं यहीं रहूँगी, डोर थामे। तुम्हें रोकने के लिए नहीं। बस तुम्हें संभालने के लिए।
ऊँची और ऊँची, हौले-हौले, धीरे-धीरे।
अब रोशनी ढल रही है। धीरे-धीरे मैं डोर लपेटती हूँ। पतंग पत्ते जैसी हल्की होकर नीचे आती है, सीधे मेरे हाथों में। वह घर आ गई है। सुरक्षित है।
चलो, शाम की ठंडी हवा में साँस अंदर लेते हैं... और बाहर छोड़ते हैं... हम यहीं हैं, साथ-साथ, प्यार से जुड़े हुए।
“प्यार भरा साथ हमें ऊँचा उड़ाता है।”
गर्भ संवाद
डोर ने पतंग को और ऊँचा उड़ने में मदद की। मैं डोर थामे रहूँगी, ताकि तुम ऊँचा उड़ सको। तुम जहाँ भी जाओ, मेरा प्यार तुम्हारे साथ रहेगा।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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