शांति: सुकून भरी कहानियाँ
मौसमों की लोरी
नई कहानी · लगभग 2 मिनट · 26वाँ सप्ताह
गर्मी, बारिश, सर्दी और बसंत, हर मौसम नन्ही जान को लोरी सुनाता है।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
गर्मी आई, धूप सुनहरी, नीम की छाँव ठंडी, गहरी। रात को हम छत पर लेटें, ठंडी हवा में सपने समेटें। एक-एक करके तारे आएँ, धीरे-धीरे सब मुस्काएँ। तारों से भर गया सारा आसमान, हर मौसम गाए, सो जाओ, नन्ही जान।
फिर आई बारिश, टप-टप-टप, छत पर बूँदें, छप-छप-छप। प्यासी धरती ने पानी पिया, सोंधी खुशबू ने मन छू लिया। मोर नाचे, अपने पंख फैलाए, कागज़ की नावें तैरती जाएँ। हरे-भरे खेतों में झूमे धान, हर मौसम गाए, सो जाओ, नन्ही जान।
फिर सर्दी आई, चुपके-चुपके, कोहरे में पेड़ खड़े हैं छुपके। नरम रज़ाई में हम सिमटें, गुनगुनी धूप से जा लिपटें। आँगन में मिलकर बैठें सारे, सुनें-सुनाएँ किस्से न्यारे। घास पे चमके ओस, मोती समान, हर मौसम गाए, सो जाओ, नन्ही जान।
फिर आया बसंत, फूल खिले, नए-नए पत्ते पेड़ों को मिले। पीली सरसों हवा में डोले, कोयल मीठा कुहू-कुहू बोले। भौंरे फूलों पर गुन-गुन गाएँ, रंग-बिरंगी तितलियाँ आएँ। नीले आसमान में पतंगों की उड़ान, हर मौसम गाए, सो जाओ, नन्ही जान।
“हर मौसम अपना तोहफ़ा लाता है।”
गर्भ संवाद
गर्मी, बारिश, सर्दी, बसंत, हर मौसम अपना तोहफ़ा लाता है। हर मौसम तुम्हारे लिए गाएगा। और मैं भी उनके साथ गाऊँगी, नन्ही जान।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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यहाँ हर कहानी प्यार से, शांति से ख़त्म होती है। डराने वाले या दुखी अंत हम नहीं रखते, और पुरानी कथाएँ आसान शब्दों में सुनाते हैं।
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