गर्भ संवाद: शिशु से बातें
हमारा घर, तुम्हारा घर
गर्भ संवाद · लगभग 2 मिनट · 17वाँ सप्ताह
नन्ही जान का इंतज़ार करते घर की एक धीमी, प्यार भरी सैर।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
चलो नन्ही जान, आज हम अपने घर में धीरे-धीरे घूमते हैं। मैं अपना एक हाथ तुम पर रखूँगी, ताकि तुम भी साथ चलो।
शुरू करते हैं घर के दरवाज़े से। सुना? यह हमारे दरवाज़े की आवाज़ है। यहाँ रहने वाला हर कोई इसे पहचानता है। जल्द ही यह आवाज़ तुम्हें भी जानी-पहचानी लगेगी।
यह है [वो कमरा जहाँ हम साथ बैठते हैं]। यहीं हम बातें करते हैं, हँसते हैं, और शाम को पास-पास बैठते हैं। नंगे पैरों के नीचे फ़र्श ठंडा लगता है।
यह हमारा घर है। जल्द ही यह तुम्हारा भी घर होगा।
अब यह रही [मेरी पसंदीदा खिड़की]। सुबह सबसे पहले रोशनी यहीं से आती है। फ़र्श पर धूप का एक गर्म, चमकता चौकोर टुकड़ा बन जाता है। मुझे उसमें खड़े होकर आँखें बंद करना अच्छा लगता है। कल सुबह हम दोनों उसमें साथ खड़े होंगे।
देखो, ये रहे हमारे पौधे। [हमारे पौधे]। मैं इन्हें पानी देती हूँ, और ये धीरे-धीरे, चुपचाप बढ़ते हैं। बिल्कुल तुम्हारी तरह।
अगर हम चुपचाप खड़े रहें, तो गली की आवाज़ें सुनाई देती हैं। [हमारी गली की आवाज़ें]। वो बताती हैं कि बाहर दुनिया जाग रही है, अपने काम में लगी है। और हम अंदर सुरक्षित हैं।
यह हमारा घर है। जल्द ही यह तुम्हारा भी घर होगा।
और यह है [वो जगह जहाँ मैं तुम्हें झुलाकर सुलाऊँगी]। धीमे-धीमे घूमता पंखा। हल्की सी रोशनी। और तुम, मेरी बाँहों की गर्माहट में।
घर छोटा हो या बड़ा, घर उसमें रहने वाले लोगों से बनता है। और यहाँ हर कोई तुम्हें अभी से प्यार करता है।
यह हमारा घर है। जल्द ही यह तुम्हारा भी घर होगा। एक प्यारा सा घर तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है।
“जहाँ प्यार है, वहीं घर है।”
गर्भ संवाद
एक प्यारा सा घर तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है। हमारा दरवाज़ा, हमारी खिड़की, हमारे पौधे और हमारी गली। और हम सब, खुली बाँहों के साथ।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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