कथा: सुनाने वाली कहानियाँ
तेनाली राम और चोर
पुरानी कथा, नए शब्दों में · लगभग 3 मिनट · 19वाँ सप्ताह
समझदार तेनाली दो चोरों से सारी रात अपने सूखे बगीचे में पानी डलवाते हैं।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
बहुत पहले की बात है। विजयनगर शहर में तेनाली राम नाम के एक बड़े समझदार आदमी रहते थे।
गर्मी के दिन थे। धूप बहुत तेज़ थी और बारिश न के बराबर हुई थी। तेनाली का बगीचा सूखा और थका-थका सा लग रहा था। पत्ते नीचे लटक गए थे। फूल भी जैसे ऊँघ रहे थे।
तेनाली की पत्नी बोलीं, "कुआँ तो गहरा है, पर इतना पानी खींचना बड़ी मेहनत का काम है।" तेनाली ने सिर हिलाया और सोच में पड़ गए।
उस शाम तेनाली घर के बाहर बैठे थे। आम के पत्तों में ठंडी हवा चल रही थी। तभी झाड़ियों में हल्की सी सरसराहट हुई। वहाँ दो चोर छिपे बैठे थे! वो अँधेरा होने का इंतज़ार कर रहे थे, ताकि चुपके से घर में घुस सकें।
तेनाली न चिल्लाए, न भागे। बस मुस्कुरा दिए। समझदार दिमाग हमेशा कोई न कोई रास्ता निकाल लेता है।
वो अंदर गए और इतनी ज़ोर से बोले कि बाहर तक आवाज़ जाए, "अजी सुनती हो, आजकल चोर बहुत घूम रहे हैं। चलो, अपना सारा खज़ाना कुएँ में छिपा देते हैं। वहाँ किसी को कभी नहीं मिलेगा!"
पत्नी फ़ौरन सब समझ गईं। दोनों ने मिलकर एक पुराना संदूक भारी पत्थरों से भर दिया। हाँफते-हाँफते उसे बाहर लाए। और फिर... छपाक! संदूक सीधा कुएँ में।
झाड़ियों में बैठे चोरों की आँखें चमक उठीं। "खज़ाना कुएँ में है," वो फुसफुसाए। "सारा पानी निकाल देंगे और खज़ाना ले जाएँगे!"
तेनाली ने जम्हाई ली और सोने चले गए। पर सोने से पहले उन्होंने कुएँ के पास वाली छोटी सी नाली चुपके से खोल दी। अब वहाँ जो भी पानी गिरता, सीधा पौधों तक बहता।
चाँद ऊपर चढ़ आया। चोरों ने काम शुरू किया। बाल्टी नीचे गई। पानी ऊपर आया। छपाक, छपाक, सारी रात।
पानी नाली में बहता गया। कभी गुलाब तक पहुँचा, कभी चमेली तक। आम के पेड़ की जड़ों तक भी जा पहुँचा। छपाक, छपाक, सारी रात।
तेनाली अपनी चारपाई पर लेटे-लेटे सुनते रहे। करवट बदली और मुस्कुरा दिए। समझदार दिमाग हमेशा कोई न कोई रास्ता निकाल लेता है।
सुबह होते ही चिड़ियाँ चहचहाने लगीं। थके-हारे चोरों ने आखिरकार संदूक बाहर खींच ही लिया। खोला तो... पत्थर! सिर्फ़ पत्थर!
तभी तेनाली ताज़ा और खुश बाहर आए। "राम-राम, दोस्तो!" उन्होंने कहा। "मेरे बगीचे को पानी देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। पूरी गर्मी में ये इतना हरा कभी नहीं दिखा!"
चोरों ने एक-दूसरे की तरफ़ देखा। शर्म से उनके चेहरे लाल हो गए। फिर वो हँस पड़े, और तेनाली भी हँसने लगे। दोनों ने हाथ जोड़कर माफ़ी माँगी। ईमानदारी से काम करने का वादा किया और अपने रास्ते चले गए।
तेनाली ने अपने बगीचे पर नज़र डाली। पत्ते चमक रहे थे। फूल पूरी तरह जाग गए थे। गीली मिट्टी से ठंडी, सोंधी खुशबू आ रही थी।
उन्होंने पत्नी से कहा, "देखा? मुसीबत हमारे दरवाज़े पर आई थी, और मदद बनकर चली गई।"
“एक समझदार तरकीब मुसीबत को मदद में बदल देती है।”
गर्भ संवाद
तेनाली घबराए नहीं, उन्होंने ठंडे दिमाग से तरकीब सोची। अपनी सूझबूझ से काम लेना, नन्ही जान। मैं हमेशा यहीं हूँ, तुम्हारे साथ मुस्कुराने के लिए।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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