शांति: सुकून भरी कहानियाँ
धीरे-धीरे चलने वाला चाँद
नई कहानी · लगभग 2 मिनट · छठा सप्ताह
चाँद धीरे-धीरे गाँव के ऊपर से गुज़रता है, हर छत को शुभ रात्रि कहता है।
हेलो, नन्ही जान। मैं मम्मा हूँ। आज तुम्हारे लिए एक कहानी है।
दिन ख़त्म हो गया है... और गाँव शांत है। हम नरम बिस्तर पर लेटे हैं। खिड़की खुली है। ठंडी हवा धीरे से अंदर आ रही है।
ऊपर देखो... वो रहा चाँद। गोल और सफ़ेद, जैसे कोई नरम सी कागज़ की लालटेन। वो पहाड़ियों के ऊपर निकल रहा है। धीरे-धीरे।
चाँद को कोई जल्दी नहीं है। वो आसमान में एक-एक छोटा कदम रखता है। धीरे-धीरे, चाँद आगे चलता है।
वो पहली छत पर पहुँचता है। एक छोटा सा घर, लाल टीन की छत वाला। "शुभ रात्रि, छोटे घर," चाँद कहता है। उसकी रोशनी छत पर सफ़ेद शॉल की तरह बिछ जाती है।
फिर आता है मंदिर। उसकी घंटी अब चुप है। "शुभ रात्रि, शांत मंदिर," चाँद कहता है। धीरे-धीरे, चाँद आगे चलता है।
नीम के पेड़ पर एक छोटा सा उल्लू बैठा है। "हू... हू... चाँद, इतनी धीमी चाल क्यों? दौड़ क्यों नहीं लगाते?"
चाँद मुस्कुराता है। "अगर मैं दौड़ूँगा, तो छतें पीछे छूट जाएँगी। धीरे चलूँगा, तो हर एक से मिल पाऊँगा। और आराम भी तो मेरे सफ़र का हिस्सा है।"
उल्लू अपनी बड़ी-बड़ी गोल आँखें झपकाता है। "हू... ये तो अच्छी बात है," वो धीरे से कहता है। फिर वो अपना सिर पंखों में छिपा लेता है।
चाँद पुराने कुएँ के ऊपर से गुज़रता है। गौशाला में सोई गायों के ऊपर से। अँधेरे और चुप स्कूल के ऊपर से। "शुभ रात्रि... शुभ रात्रि... शुभ रात्रि।" धीरे-धीरे, चाँद आगे चलता है।
अब वो हमारी छत पर आ पहुँचा है। उसकी रोशनी खिड़की से चुपके से अंदर आती है। वो हमारे तकिये को छूती है, नरम और चाँदी जैसी। "शुभ रात्रि," चाँद हमसे धीरे से कहता है।
हम धीरे-धीरे साँस लेते हैं। अंदर... और बाहर। आँखें भारी हो रही हैं। आसमान खुला है, शांत है। धीरे-धीरे... हम आराम करते हैं। धीरे-धीरे... हम सो जाते हैं।
“हर सफ़र में आराम भी ज़रूरी है।”
गर्भ संवाद
चाँद धीरे-धीरे चला, और उसने हर घर को शुभ रात्रि कहा। आज रात हम चाँद की तरह धीरे-धीरे आराम करेंगे। शुभ रात्रि, मेरी जान।
इसे धीरे-धीरे बोलकर सुनाइए, चाहें तो अपने शब्दों में।
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, नन्ही जान। तुम सुरक्षित हो। हम साथ हैं।
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