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16 श्लोक · 16–32 सप्ताह

अच्छे गुणों और संस्कारों के श्लोक

हर माता-पिता के मन में कुछ सपने होते हैं कि उनकी संतान बड़ी होकर कैसी बने। इस पेज के श्लोक उन्हीं सपनों को शब्द देते हैं — दया, सच्चाई, हिम्मत, धीरज और पढ़ने-सीखने से लगाव। इनमें वह सरस्वती वंदना है, जिसे बहुत-से बच्चे आगे चलकर स्कूल की प्रार्थना में गाते हैं, गीता में गिनाए गए दैवी गुण हैं, सत्यमेव जयते और विद्या ददाति विनयम् हैं, और ‘या देवी सर्वभूतेषु’ के वे छोटे श्लोक हैं, जिनमें देवी को दया, बुद्धि और स्मृति के रूप में नमन किया गया है।

16 से 32 सप्ताह के बीच, सुबह का समय इन श्लोकों के लिए अच्छा है, और कोई अपना भी साथ बैठ सकता है। कोई एक श्लोक चुनिए, उसे 3 से 11 बार जपिए, फिर उसका अर्थ बोलकर पढ़िए। बहुत-से माता-पिता को अर्थ ही सबसे ज़्यादा याद रहता है, इसलिए शुरुआत वहीं से करें, तो भी ठीक है।

सच कहें तो जप करके शिशु में गुण “भरे” नहीं जा सकते। बच्चे का स्वभाव जीन, सेहत, प्यार और परवरिश से बनता है। हाँ, ये श्लोक आपको यह सोचने का मौक़ा देते हैं कि आप अपने घर में कौन-से संस्कार चाहती हैं। और बच्चे ये संस्कार अक्सर अपने बड़ों को देखकर ही सीखते हैं।

इन श्लोकों को कैसे जपें

नीचे के हर श्लोक के लिए — जब तक उसके साथ कुछ और न लिखा हो।

सबसे अच्छा समय
सुबह
जपने का तरीका
3–11 बार, फिर इसका अर्थ बोलकर पढ़ें
कौन जप सकता है
माँ और पिता
सबसे सही सप्ताह
16–32 सप्ताह

सच कहें तोयह उम्मीद की प्रार्थना है। बच्चे का स्वभाव जीन, सेहत, प्यार और परवरिश से बनता है। जप करके बच्चे में गुण “भरे” नहीं जा सकते।

बुद्धि और विद्या

या कुन्देन्दु – सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता ।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता ।सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥

पारंपरिक सरस्वती वंदना

अर्थ

जो कुंद के फूल, चंद्रमा और बर्फ़ जैसी उजली हैं, जो सफ़ेद वस्त्र पहने हैं, जिनके हाथों में वीणा है, जो सफ़ेद कमल पर विराजमान हैं, और ब्रह्मा, विष्णु और शिव जिनकी पूजा करते हैं — वे देवी सरस्वती मेरी रक्षा करें और मन की सारी जड़ता दूर करें।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

सरस्वती विद्या और संगीत की देवी हैं — संतान की बुद्धि के लिए परंपरा से उन्हीं की वंदना की जाती है।

इससे क्या मिल सकता है

शांत और सुरीला जप, जो किसी सरल धुन में गाने पर बहुत सुंदर लगता है।

बुद्धि और विद्या

सरस्वति नमस्तुभ्यं

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥

पारंपरिक

अर्थ

हे वरदान देने वाली सरस्वती, आपको मेरा प्रणाम। अब मेरी पढ़ाई शुरू हो रही है। मुझे हमेशा सफलता मिले।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

स्कूल में बच्चे सबसे पहले यही श्लोक सीखते हैं। पर आपका शिशु इसे “सबसे पहले” आपसे सुन सकता है।

इससे क्या मिल सकता है

गर्भ से बचपन तक जोड़ने वाली एक कड़ी; जन्म के बाद भी आप इसे बोलती रह सकती हैं।

ताक़त और हिम्मत

बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं

बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वमरोगता ।अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत् ॥

हनुमान जी का पारंपरिक श्लोक

अर्थ

हनुमान जी को याद करने से बुद्धि, बल, अच्छा नाम, साहस, निडरता, अच्छी सेहत, सजगता और बोलने की कला मिलती है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

एक ही पंक्ति में वे आठ अच्छे गुण आ जाते हैं, जो माता-पिता अपनी संतान के लिए चाहते हैं।

इससे क्या मिल सकता है

रोज़ अपनी अच्छी कामनाएँ बोलकर दोहराने का मौक़ा।

अच्छा चरित्र

दैवी गुण – भाग 1

अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः ।दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ॥

भगवद्गीता 16.1

अर्थ

निडरता, साफ़ मन, स्थिर ज्ञान, उदारता, संयम, पूजा, अध्ययन, अनुशासन और ईमानदारी।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

गीता 16.1–3 में ख़ुद गीता ने “दैवी गुणों” की सूची दी है।

इससे क्या मिल सकता है

माता-पिता के रूप में सोचने-विचारने के लिए कुछ साफ़-साफ़ संस्कार।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

दयालुता

दैवी गुण – भाग 2

अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम् ।दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् ॥

भगवद्गीता 16.2

अर्थ

अहिंसा, सच्चाई, गुस्सा न करना, त्याग, शांति, चुगली न करना, सभी प्राणियों पर दया, लालच न होना, कोमलता, लज्जा और स्थिरता।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

दया और कोमलता — यही वे गुण हैं जो माता-पिता अपनी संतान में सबसे ज़्यादा चाहते हैं।

इससे क्या मिल सकता है

यह याद दिलाता है कि ये गुण पहले आप ख़ुद अपनाएँ — बच्चे असल में इसी तरह सीखते हैं।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

अच्छा चरित्र

दैवी गुण – दैवी स्वभाव लेकर जन्मे व्यक्ति के

तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता ।भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत ॥

भगवद्गीता 16.3

अर्थ

तेज, क्षमा, दृढ़ता, साफ़-सफ़ाई, किसी से बैर न रखना और घमंड न करना — ये गुण उसमें होते हैं जो दैवी स्वभाव लेकर जन्मा है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें “अभिजात” शब्द आता है, जिसका अर्थ है “जन्मा हुआ”। इसी वजह से गीता की गुणों वाली सूची में यह श्लोक जन्म से सबसे ज़्यादा जुड़ा है।

इससे क्या मिल सकता है

तीन श्लोकों के इस सिलसिले का एक सार्थक अंत।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

दयालुता

सब पर दया

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च ।निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥

भगवद्गीता 12.13

अर्थ

किसी से नफ़रत नहीं, सबसे दोस्ती और दया, न स्वार्थ, न घमंड, सुख-दुख में एक-सा मन, और क्षमा करने का स्वभाव।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

दयालु इंसान कैसा होता है, इसकी एक सुंदर झलक।

इससे क्या मिल सकता है

मन में कोमल भाव; सोने से पहले के लिए अच्छा।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

बुद्धि और विद्या

हयग्रीव – सारी विद्याओं के आधार

ज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम् ।आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवमुपास्महे ॥

हयग्रीव स्तोत्र, श्लोक 1 (वेदांत देशिक)

अर्थ

हम भगवान हयग्रीव की पूजा करते हैं, जो ज्ञान और आनंद से भरे हैं, स्फटिक जैसे निर्मल हैं और सारी विद्याओं के आधार हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

दक्षिण भारत के घरों में बच्चे की पढ़ाई-लिखाई के लिए यह श्लोक बहुत पसंद किया जाता है।

इससे क्या मिल सकता है

एक शांत, स्पष्ट जप।

विनम्रता के साथ विद्या

विद्या ददाति विनयम्

विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम् ।पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम् ॥

हितोपदेश, प्रस्तावना

अर्थ

विद्या से विनम्रता आती है। विनम्रता से इंसान योग्य बनता है। योग्यता से धन मिलता है। धन का सही उपयोग हो तो भलाई होती है, और फिर सुख मिलता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

अच्छे चरित्र के साथ पढ़ाई-लिखाई पर एक मशहूर कथन।

इससे क्या मिल सकता है

अपनी संतान के लिए आपकी उम्मीदें, सीधे-सरल शब्दों में।

सच्चाई

सत्यमेव जयते

सत्यमेव जयते नानृतम् ।

मुण्डक उपनिषद् 3.1.6 (भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य)

अर्थ

सच की ही जीत होती है, झूठ की नहीं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

छोटा, असरदार और दोहराने में आसान।

इससे क्या मिल सकता है

एक ऐसा संस्कार, जिस पर आप अपने परिवार की नींव रख सकती हैं।

ख़ुद पर भरोसा

ख़ुद को ऊपर उठाइए

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् ।आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥

भगवद्गीता 6.5

अर्थ

अपनी कोशिश से ख़ुद को ऊपर उठाइए। ख़ुद को डूबने मत दीजिए। इंसान ख़ुद ही अपना सबसे अच्छा दोस्त है, और ख़ुद ही अपना दुश्मन भी बन सकता है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

आपकी संतान में ख़ुद पर भरोसा जगाने के लिए — और मुश्किल दिनों में आपके लिए भी।

इससे क्या मिल सकता है

मन में आत्मविश्वास बढ़ता है।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

दयालुता

दया के रूप में देवी

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती), अध्याय 5

अर्थ

जो देवी सभी प्राणियों में दया के रूप में बसी हैं, उन्हें मेरा बार-बार प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

दयालु दिल वाली संतान के लिए एक पंक्ति की प्रार्थना।

इससे क्या मिल सकता है

एक कोमल, अपनेपन से भरा एहसास।

यह भी देखें: या देवी सर्वभूतेषु: गर्भावस्था के लिए 11 मंत्र

बुद्धि और विद्या

बुद्धि के रूप में देवी

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती), अध्याय 5

अर्थ

जो देवी सभी प्राणियों में बुद्धि के रूप में बसी हैं, उन्हें मेरा बार-बार प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

साफ़ और तेज़ बुद्धि के लिए एक पंक्ति की प्रार्थना।

इससे क्या मिल सकता है

एक सरल जप, जिसकी अपनी एक लय है।

यह भी देखें: या देवी सर्वभूतेषु: गर्भावस्था के लिए 11 मंत्र

बुद्धि और विद्या

स्मृति के रूप में देवी

या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती), अध्याय 5

अर्थ

जो देवी सभी प्राणियों में स्मृति के रूप में बसी हैं, उन्हें मेरा बार-बार प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यहाँ स्मृति, यानी याददाश्त को देवी का एक रूप मानकर नमन किया गया है। तेज़ दिमाग़ के लिए एक प्रार्थना।

इससे क्या मिल सकता है

एक शांत, सधा हुआ अभ्यास।

यह भी देखें: या देवी सर्वभूतेषु: गर्भावस्था के लिए 11 मंत्र

संतोष और पक्का इरादा

संतुष्ट और अडिग

सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः ।मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः ॥

भगवद्गीता 12.14

अर्थ

जो हमेशा संतुष्ट रहता है, संयम रखता है, अपने संकल्प पर अडिग है, और जिसने अपना मन और हृदय मुझे सौंप दिया है, वह मुझे प्रिय है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

संतोष और पक्का इरादा — ये दो गुण जीवन भर संतान का साथ देते हैं।

इससे क्या मिल सकता है

मन में सुकून भरा एहसास कि “जितना है, बहुत है”।

यह भी देखें: गर्भावस्था के लिए गीता के श्लोक

बुद्धि और विद्या

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ॥

पारंपरिक सरस्वती बीज मंत्र

अर्थ

देवी सरस्वती को नमन। “ऐं” उनका बीज अक्षर है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

छोटा है और दोहराने में आसान — संतान की विद्या के लिए।

इससे क्या मिल सकता है

मन को एकाग्र करने वाला एक कोमल अभ्यास।

जपने का तरीका
माला फेरते हुए 108 बार, या 11 बार