‘या देवी सर्वभूतेषु’ देवी माहात्म्य, यानी दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय में आता है। हर पंक्ति में सब प्राणियों में बसी देवी के किसी एक रूप को नमन है, और फिर तीन बार प्रणाम — नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। अध्याय में ऐसे बहुत-से रूप हैं। हमने उनमें से वे ग्यारह चुने हैं जो गर्भावस्था से जुड़ते हैं, और उन्हें उसी क्रम में रखा है जिसमें वे पाठ में आते हैं।
हर प्रार्थना बस एक पंक्ति की है, इसलिए दिन के हिसाब से अपनी पंक्ति चुन लीजिए। ‘मातृरूपेण संस्थिता’ — माँ के रूप में देवी — किसी भी सप्ताह के लिए है; आप भी तो माँ बनने जा रही हैं। बेचैन रातों के लिए नींद के रूप में देवी, भोजन के समय भूख के रूप में, और आख़िरी हफ़्तों के लंबे इंतज़ार में धैर्य के रूप में। शक्ति वाली पंक्ति बहुत-सी माँएँ प्रसव के लिए सँभालकर रखती हैं, और सौभाग्य वाली शिशु के घर आने के दिन के लिए। एक पंक्ति 3 से 11 बार, धीमे स्वर में या मन ही मन जपिए, और साँस सहज रखिए। शुरू करने के लिए नवरात्रि बहुत सुंदर समय है, पर कोई भी दिन अच्छा है।
ये उम्मीद की प्रार्थनाएँ हैं। बुद्धि और स्मृति वाली पंक्तियों से बच्चे में गुण ‘भरे’ नहीं जा सकते; बच्चे का स्वभाव जीन, सेहत, प्यार और परवरिश से बनता है। प्रसव के समय साँस कैसे लें, इसमें सबसे पहले अपने डॉक्टर, दाई या नर्स की बात मानिए। ज़रूरी सूचना पढ़ें