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अर्थ सहित 8 श्लोक

प्रेगनेंसी में मधुराष्टकम्: आठों श्लोक

‘अधरं मधुरं’ से शुरू होने वाला मधुराष्टकम् संत वल्लभाचार्य की रचना माना जाता है। आठ छोटे-छोटे श्लोकों में यह श्रीकृष्ण की हर बात को मधुर बताता है — उनकी मुस्कान, उनकी बाँसुरी, उनकी लीला, यहाँ तक कि उनके चरणों की धूल भी। हर पंक्ति घूम-फिरकर ‘मधुरं’ पर लौट आती है, इसलिए गाने में यह लोरी जैसा लगता है। यही वजह है कि बहुत-सी माँएँ गर्भावस्था में इसे चुनती हैं। इसे किसी भी महीने में गा सकती हैं, इसके कोई ख़ास नियम नहीं।

कोई एक सरल धुन चुन लीजिए और हमेशा उसी में गाइए। शाम को शांत कमरे में, पेट पर हाथ रखकर एक-दो श्लोक गाइए, या आठों एक साथ, एक गीत की तरह। कोई अपना और शिशु के बड़े भाई-बहन भी साथ गा सकते हैं। शोध में देखा गया है कि लगभग 19वें सप्ताह से शिशु आवाज़ पर प्रतिक्रिया देने लग सकते हैं, गर्भावस्था के आख़िरी महीनों में बार-बार सुनी आवाज़ें सीख सकते हैं, और नवजात शिशु किसी और महिला की आवाज़ के मुक़ाबले अपनी माँ की आवाज़ ज़्यादा पसंद करते हैं। इसलिए हो सकता है कि जो धुन आप आज गा रही हैं, वह जन्म के बाद शिशु को जानी-पहचानी लगे। बहुत-से माता-पिता जन्म के बाद भी शिशु को सुलाते समय इसे गाते रहते हैं।

सच कहें तो, शिशु किसी गीत की धुन पहचानना सीख सकते हैं, उसका अर्थ नहीं, और गाने से उनकी सेहत या विकास नहीं बदलता। यह आपके और शिशु के बीच की एक मीठी रस्म बन सकती है। तबीयत ठीक न लगे या कोई चिंता हो, तो सबसे पहले डॉक्टर से बात कीजिए। ज़रूरी सूचना पढ़ें

इन श्लोकों को कैसे जपें

नीचे के हर श्लोक के लिए — जब तक उसके साथ कुछ और न लिखा हो।

सबसे अच्छा समय
शाम को, शांत कमरे में, पेट पर हाथ रखकर
जपने का तरीका
किसी सरल धुन में एक-दो बार धीमे स्वर में गाएँ
कौन जप सकता है
माँ, पिता, बड़े भाई-बहन
सबसे सही सप्ताह
18–28 सप्ताह

सच कहें तोलगभग 19वें सप्ताह से शिशु आवाज़ पर प्रतिक्रिया देने लगते हैं, और गर्भावस्था के आख़िरी हफ़्तों में बार-बार सुनी आवाज़ें सीख लेते हैं। वे आवाज़ सीखते हैं, उसका मतलब नहीं।

शिशु के लिए लोरी

मधुराष्टकम् – श्लोक 1

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥

मधुराष्टकम्, श्लोक 1

अर्थ

उनके होंठ, मुख, आँखें और मुस्कान मधुर हैं। उनका हृदय मधुर है, उनकी चाल मधुर है। मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

नन्हे कृष्ण की मधुरता पर एक गुनगुनाने लायक, लोरी जैसी स्तुति। जो शिशु अब सुनने लगा है, उसके लिए इसकी धुन और बार-बार लौटते शब्द बहुत अच्छे हैं।

इससे क्या मिल सकता है

ख़ुशी और मन का हल्कापन। इसे लोरी की तरह गाइए, और जन्म के बाद भी गाती रहिए।

विषय: शिशु से जुड़ाव

लोरी का सिलसिला बनाए रखना

मधुराष्टकम् – श्लोक 2

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥

मधुराष्टकम्, श्लोक 2

अर्थ

उनकी वाणी, उनके कर्म, उनके वस्त्र और उनकी चाल — सब मधुर है। उनका सब कुछ मधुर है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

अगर आपने गर्भावस्था में मधुराष्टकम् गाया है, तो इसे गाती रहिए। हो सकता है आपके शिशु को यह धुन जानी-पहचानी लगे।

इससे क्या मिल सकता है

हर रोज़ की एक सुकून भरी लोरी।

सबसे अच्छा समय
जन्म के समय, नामकरण के दिन, सोते समय
जपने का तरीका
सोते समय धीमे स्वर में गाएँ
कौन जप सकता है
माता-पिता और दादा-दादी, नाना-नानी
सबसे सही सप्ताह
जन्म के बाद से

सच कहें तोयह एक आशीर्वाद है और शिशु से जुड़ाव की एक रस्म। जन्म से पहले बार-बार सुनी आवाज़ें शिशु को जानी-पहचानी लग सकती हैं।

विषय: शिशु का स्वागत

शिशु के लिए लोरी

मधुराष्टकम् – श्लोक 3

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥

मधुराष्टकम्, श्लोक 3

अर्थ

उनकी बाँसुरी मधुर है, उनके चरणों की धूल मधुर है, उनके हाथ और पैर मधुर हैं, उनका नृत्य मधुर है और उनकी मित्रता मधुर है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह मधुराष्टकम् लोरी का एक श्लोक है। गर्भावस्था के आख़िरी महीनों में बार-बार सुनी आवाज़ें शिशु सीख सकते हैं, इसलिए जो धुन आप दोहराती हैं, वह शिशु को जानी-पहचानी लग सकती है।

इससे क्या मिल सकता है

इसे गाते समय अपने शिशु के नन्हे-नन्हे हाथ-पैरों की कल्पना कीजिए।

विषय: शिशु से जुड़ाव

शिशु के लिए लोरी

मधुराष्टकम् – श्लोक 4

गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥

मधुराष्टकम्, श्लोक 4

अर्थ

उनका गाना, पीना, खाना और सोना — सब मधुर है। उनका रूप मधुर है, उनका तिलक भी मधुर है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह मधुराष्टकम् लोरी का एक श्लोक है। गर्भावस्था के आख़िरी महीनों में बार-बार सुनी आवाज़ें शिशु सीख सकते हैं, इसलिए जो धुन आप दोहराती हैं, वह शिशु को जानी-पहचानी लग सकती है।

इससे क्या मिल सकता है

सोते हुए शिशु में भी बस मिठास ही मिठास होती है। सोने के समय के लिए अच्छा श्लोक।

विषय: शिशु से जुड़ाव

शिशु के लिए लोरी

मधुराष्टकम् – श्लोक 5

करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् ।वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥

मधुराष्टकम्, श्लोक 5

अर्थ

उनके काम मधुर हैं, उनका संकट से उबारना मधुर है, उनकी नटखट चोरी मधुर है और उनकी प्यार भरी लीला मधुर है। उनका सब कुछ मधुर है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह मधुराष्टकम् लोरी का एक श्लोक है। गर्भावस्था के आख़िरी महीनों में बार-बार सुनी आवाज़ें शिशु सीख सकते हैं, इसलिए जो धुन आप दोहराती हैं, वह शिशु को जानी-पहचानी लग सकती है।

इससे क्या मिल सकता है

जब मन ख़ुश हो, तब के लिए एक नटखट-सा श्लोक।

विषय: शिशु से जुड़ाव

शिशु के लिए लोरी

मधुराष्टकम् – श्लोक 6

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥

मधुराष्टकम्, श्लोक 6

अर्थ

उनका गुंजा के दानों का हार मधुर है, उनकी माला मधुर है। यमुना, उसकी लहरें, उसका जल और उसके कमल — सब मधुर हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह मधुराष्टकम् लोरी का एक श्लोक है। गर्भावस्था के आख़िरी महीनों में बार-बार सुनी आवाज़ें शिशु सीख सकते हैं, इसलिए जो धुन आप दोहराती हैं, वह शिशु को जानी-पहचानी लग सकती है।

इससे क्या मिल सकता है

मन को शांत करने वाली पानी की छवि — नहाने के समय के लिए अच्छा श्लोक।

विषय: शिशु से जुड़ाव

शिशु के लिए लोरी

मधुराष्टकम् – श्लोक 7

गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् ।दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥

मधुराष्टकम्, श्लोक 7

अर्थ

गोपियाँ मधुर हैं, श्रीकृष्ण की लीला मधुर है, उनका देखना मधुर है और उनका व्यवहार मधुर है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह मधुराष्टकम् लोरी का एक श्लोक है। गर्भावस्था के आख़िरी महीनों में बार-बार सुनी आवाज़ें शिशु सीख सकते हैं, इसलिए जो धुन आप दोहराती हैं, वह शिशु को जानी-पहचानी लग सकती है।

इससे क्या मिल सकता है

मन में ख़ुशी और हल्कापन।

विषय: शिशु से जुड़ाव

शिशु के लिए लोरी

मधुराष्टकम् – श्लोक 8

गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥

मधुराष्टकम्, श्लोक 8

अर्थ

ग्वाल-बाल मधुर हैं, गायें मधुर हैं, श्रीकृष्ण की छड़ी मधुर है और सारी सृष्टि मधुर है। वे जो तोड़ते हैं, वह भी मधुर है और जिसे फलने-फूलने देते हैं, वह भी मधुर है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह मधुराष्टकम् लोरी का एक श्लोक है। गर्भावस्था के आख़िरी महीनों में बार-बार सुनी आवाज़ें शिशु सीख सकते हैं, इसलिए जो धुन आप दोहराती हैं, वह शिशु को जानी-पहचानी लग सकती है।

इससे क्या मिल सकता है

इससे 8 श्लोकों का यह गीत पूरा होता है; आठों श्लोक एक साथ, एक लोरी की तरह गाइए।

विषय: शिशु से जुड़ाव

स्रोत

हम किसी शोध की बस उतनी ही बात करते हैं, जितनी उसमें सच में पाई गई। ज़्यादातर शोध थोड़े-से लोगों पर हुए हैं, और कोई भी शोध आपके डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकता। ज़रूरी सूचना पढ़ें

  • गर्भ में शिशु कब से आवाज़ पर प्रतिक्रिया देने लगता है

    शोध में क्या पता चला
    माँ के पेट पर रखे स्पीकर से आवाज़ सुनाने पर, गर्भ में शिशु सबसे पहले लगभग 19वें सप्ताह में हरकत करते दिखे। 27वें सप्ताह तक लगभग सभी शिशु भारी, नीचे सुर वाली आवाज़ों पर प्रतिक्रिया देने लगे थे।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    इसमें सिर्फ़ ‘बीप’ जैसी सादी ध्वनियाँ सुनाई गई थीं — न बोली, न संगीत, न जप। इसलिए यह नहीं बताता कि शिशु शब्द समझते हैं, या श्लोक, कहानी और संगीत सुनने से उन्हें कोई फ़ायदा होता है।

    Hepper & Shahidullah (1994). Development of fetal hearing. Archives of Disease in Childhood - Fetal and Neonatal Edition 71(2):F81-F87.

    शोध का सारांश पढ़ें (अंग्रेज़ी में)पूरा शोध पढ़ें (अंग्रेज़ी में, मुफ़्त)

  • जन्म से पहले बार-बार सुनी आवाज़ें सीखना

    शोध में क्या पता चला
    जिन शिशुओं ने गर्भावस्था के आख़िरी तीन महीनों में एक बेमतलब, बनाया हुआ शब्द बार-बार सुना, जन्म के बाद उनके दिमाग़ ने उस शब्द की ध्वनियों पर ज़्यादा तेज़ प्रतिक्रिया दी। यानी आख़िरी महीनों में बार-बार सुनी आवाज़ें शिशु सीख और याद रख सकते हैं।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    यह आवाज़ों की याद दिखाता है, मतलब की समझ नहीं। यह बुद्धि, भाषा या आगे के विकास पर किसी असर को नहीं दिखाता। शोधकर्ता यह भी चेताते हैं कि गर्भ में विकसित हो रहे सुनने के तंत्र को शोर से नुक़सान पहुँच सकता है।

    Partanen et al. (2013). Learning-induced neural plasticity of speech processing before birth. Proceedings of the National Academy of Sciences of the United States of America 110(37):15145-15150.

    शोध का सारांश पढ़ें (अंग्रेज़ी में)पूरा शोध पढ़ें (अंग्रेज़ी में, मुफ़्त)

  • नवजात शिशु माँ की आवाज़ ज़्यादा पसंद करते हैं

    शोध में क्या पता चला
    एक छोटे-से शोध में, कुछ ही दिन के नवजात शिशुओं ने चुसनी चूसने का ढंग बदलकर अपनी माँ की आवाज़ किसी दूसरी महिला की आवाज़ से ज़्यादा बार सुनी। यानी जन्म के पहले दिनों से ही शिशु माँ की आवाज़ को ज़्यादा पसंद करते हैं।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    इस शोध में गर्भावस्था के दौरान कुछ नहीं परखा गया। इसलिए यह साबित नहीं करता कि यह पसंद गर्भ में ही बनी। यह भी नहीं दिखाता कि गर्भावस्था में बात करने, पढ़कर सुनाने या जप करने से शिशु ज़्यादा सेहतमंद या होशियार होते हैं, या माँ से उनका जुड़ाव गहरा होता है।

    DeCasper & Fifer (1980). Of human bonding: newborns prefer their mothers' voices. Science 208(4448):1174-1176.

    शोध का सारांश पढ़ें (अंग्रेज़ी में)