नवजात शिशु को पहला आशीर्वाद
मेरे हृदय से तुम्हारा जन्म (जातकर्म)
कौषीतकि उपनिषद् 2.11; आश्वलायन गृह्यसूत्र 1.15
अर्थ
तुम्हारा जन्म मेरे अंग-अंग से हुआ है, मेरे हृदय से हुआ है। संतान के रूप में तुम मेरी अपनी ही आत्मा हो। सौ शरद ऋतुओं तक जियो।
हमने यह श्लोक क्यों चुना
यह वह पारंपरिक पहला आशीर्वाद है, जो नवजात शिशु को धीरे से, फुसफुसाकर सुनाया जाता है। ‘पुत्र’ का अर्थ बेटा भी होता है और संतान भी; हम इसे ‘संतान’ के अर्थ में पढ़ते हैं, इसलिए इसे बेटी और बेटे — दोनों के लिए बोलिए।
इससे क्या मिल सकता है
यह सबसे ज़्यादा मन को छू लेने वाले पलों में से एक है। जब शिशु आपके सीने से सटा हो और उसकी त्वचा आपकी त्वचा से लगी हो, तब इसे फुसफुसाकर कहिए।
- सबसे अच्छा समय
- जन्म के तुरंत बाद