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अर्थ सहित 9 श्लोक

प्रेगनेंसी में रामायण की चौपाई: भए प्रगट कृपाला और राम जन्म

क्या प्रेगनेंसी में रामायण पढ़ सकती हैं? बहुत-से घरों में गर्भावस्था के पूरे नौ महीने तुलसीदास का रामचरितमानस पढ़ा जाता है, और अक्सर इसका सबसे ख़ुशी भरा प्रसंग चुना जाता है — बालकांड में श्रीराम का जन्म। इस पेज पर राम जन्म के वही प्रसंग कथा के क्रम में, मूल अवधी में और सरल अर्थ के साथ दिए गए हैं। इनमें चौपाइयाँ भी हैं, ‘भए प्रगट’ का छंद भी और उसके बाद का दोहा भी, पर घरों में इन सबको प्यार से रामायण की चौपाई ही कहा जाता है।

शुरुआत ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ से होती है — एक कोमल भजन, जिसे कोई भी गा सकता है। फिर वह प्रसंग आता है जब प्रभु कौशल्या जी के गर्भ में आए और तुलसीदास रानियों के निखार का वर्णन करते हैं; उसके बाद राम जन्म की वह सुहानी दोपहर, चैत्र की नवमी। फिर आता है चारों पदों में पूरा ‘भए प्रगट कृपाला’ — कौशल्या अचरज से भर उठती हैं कि स्वयं ईश्वर उनके गर्भ में रहे, और फिर उनसे नन्हे शिशु की तरह लीला करने की विनती करती हैं। आख़िर में ऋषि वसिष्ठ के नामकरण का प्रसंग है, जो आपके शिशु के नामकरण संस्कार में भी पढ़ा जा सकता है। बीच के महीनों में शाम को एक-दो चौपाई पढ़िए, आख़िरी हफ़्तों में ‘भए प्रगट’ गाइए, और जन्म के बाद भी गाती रहिए।

इन चौपाइयों में ख़ुशी है, कोई वादा नहीं। ये तय नहीं कर सकतीं कि प्रसव सामान्य होगा या सिज़ेरियन, और हर सुरक्षित जन्म अच्छा जन्म है। कृपया ‘मुहूर्त’ देखकर जन्म की तारीख़ तय न करें। शिशु का जन्म कब और कैसे हो, यह फ़ैसला सेहत को देखकर आप और आपके डॉक्टर मिलकर करते हैं। ज़रूरी सूचना पढ़ें

इन श्लोकों को कैसे जपें

नीचे के हर श्लोक के लिए — जब तक उसके साथ कुछ और न लिखा हो।

जपने का तरीका
फुसफुसाकर बोलें या धीमे स्वर में गाएँ
कौन जप सकता है
माता-पिता और दादा-दादी, नाना-नानी
सबसे सही सप्ताह
जन्म के बाद से

सच कहें तोयह एक आशीर्वाद है और शिशु से जुड़ाव की एक रस्म। जन्म से पहले बार-बार सुनी आवाज़ें शिशु को जानी-पहचानी लग सकती हैं।

परिवार के साथ गाने का मधुर भजन

मंगल भवन अमंगल हारी

मंगल भवन अमंगल हारी ।द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी ॥

रामचरितमानस, बालकांड 112 (चौपाई) · अवधी

अर्थ

जो सब मंगलों के धाम हैं, जो हर अमंगल को दूर करते हैं, और जो बचपन में दशरथ जी के आँगन में खेला करते थे — वे श्रीराम मुझ पर कृपा करें।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें आँगन में खेलते नन्हे राम की झाँकी है। कोमल, सुरीला और घर-घर में गाया जाने वाला भजन।

इससे क्या मिल सकता है

एक आसान भजन, जिसे पूरा परिवार मिलकर गा सकता है।

सबसे अच्छा समय
सोते समय, या जब भी मन घबराए
जपने का तरीका
धीरे-धीरे साँस लेते हुए धीमे स्वर में या मन ही मन जप, 5–10 मिनट
कौन जप सकता है
पूरा परिवार
सबसे सही सप्ताह
किसी भी सप्ताह

सच कहें तोलय में धीरे-धीरे जप करने से साँस धीमी हो सकती है, और बहुत-से लोगों को इससे सुकून मिलता है (यह शोध उन वयस्कों पर हुआ है जो गर्भवती नहीं थे)।

विषय: नींद और शांत मन

गर्भवती माँ का गुणगान

जब प्रभु गर्भ में आए, चारों ओर ख़ुशी छा गई

जा दिन तें हरि गर्भहिं आए ।सकल लोक सुख संपति छाए ॥मंदिर महँ सब राजहिं रानीं ।सोभा सील तेज की खानीं ॥

रामचरितमानस, बालकांड (दोहा 190 से पहले की चौपाई, गीता प्रेस संस्करण के अनुसार) · अवधी

अर्थ

जिस दिन से प्रभु गर्भ में आए, सारे लोकों में सुख और समृद्धि छा गई। महल में सभी रानियाँ दमक उठीं — सुंदरता, अच्छाई और तेज से भरी हुईं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

तुलसीदास यहाँ गर्भवती स्त्रियों के निखार का वर्णन करते हैं। यह आपका ही गुणगान है।

इससे क्या मिल सकता है

होंठों पर मुस्कान, और अपने ‘निखार’ पर गर्व।

सबसे अच्छा समय
शाम को, शांत कमरे में, पेट पर हाथ रखकर
जपने का तरीका
एक हफ़्ते तक रोज़ वही श्लोक दोहराएँ। धीमे स्वर में गाएँ या बोलें
कौन जप सकता है
माँ, पिता, बड़े भाई-बहन
सबसे सही सप्ताह
18–28 सप्ताह

सच कहें तोलगभग 19वें सप्ताह से शिशु आवाज़ पर प्रतिक्रिया देने लगते हैं, और गर्भावस्था के आख़िरी हफ़्तों में बार-बार सुनी आवाज़ें सीख लेते हैं। वे आवाज़ सीखते हैं, उसका मतलब नहीं।

विषय: शिशु से जुड़ाव

जन्म की सुहानी घड़ी

नवमी का दिन, न सर्दी न गर्मी

नौमी तिथि मधु मास पुनीता ।सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता ॥मध्यदिवस अति सीत न घामा ।पावन काल लोक बिश्रामा ॥

रामचरितमानस, बालकांड 191 (चौपाई) · अवधी

अर्थ

पवित्र चैत्र महीने की नवमी थी, प्रिय अभिजित मुहूर्त था, ठीक दोपहर का समय था — न बहुत ठंड, न बहुत गर्मी। वह एक पावन घड़ी थी, जब सारा संसार विश्राम में था।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें जन्म के लिए एक सुहाने, आरामदेह समय का वर्णन है।

इससे क्या मिल सकता है

जन्म की एक सुकून भरी तस्वीर।

सबसे अच्छा समय
रोज़ एक ही समय पर
जपने का तरीका
अपने 1–2 “प्रसव के श्लोक” चुनें और प्रसव का समय आने तक रोज़ उन्हें दोहराएँ
कौन जप सकता है
माँ और प्रसव के समय साथ रहने वाले
सबसे सही सप्ताह
28–37 सप्ताह

सच कहें तोशिशु जिस दिन भी जन्म ले, वह दिन अच्छा है। किसी भी मंत्र के लिए “मुहूर्त” निकलवाकर सिज़ेरियन कराने की ज़रूरत नहीं है।

विषय: प्रसव की तैयारी

जन्म की ख़ुशी

भए प्रगट कृपाला – पद 1

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी ।हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ॥लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी ।भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी ॥

रामचरितमानस, बालकांड 192 (छंद) · अवधी

अर्थ

दीनों पर दया करने वाले कृपालु प्रभु कौशल्या जी को सुख देने के लिए प्रकट हुए। उनका अद्भुत रूप देखकर माता ख़ुशी से फूली न समाईं — मनोहर आँखें, बादल जैसा साँवला शरीर, चार भुजाएँ, गले में माला और बड़ी-बड़ी आँखें।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

रामनवमी पर और उत्तर भारत में शिशु से जुड़ी रस्मों में गाई जाने वाली जन्म-स्तुति। यह पूरी स्तुति जन्म पर माँ की ख़ुशी के बारे में ही है।

इससे क्या मिल सकता है

ख़ुशी और उमंग भरा इंतज़ार। गाई जाए तो सुनने में बहुत मधुर लगती है।

सबसे अच्छा समय
रोज़ एक ही समय पर
जपने का तरीका
अपने 1–2 “प्रसव के श्लोक” चुनें और प्रसव का समय आने तक रोज़ उन्हें दोहराएँ
कौन जप सकता है
माँ और प्रसव के समय साथ रहने वाले
सबसे सही सप्ताह
28–37 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह पक्का नहीं कर सकता कि प्रसव सामान्य ही होगा। हर सुरक्षित जन्म अच्छा जन्म है — सिज़ेरियन से हुआ जन्म भी।

विषय: प्रसव की तैयारी

आभार

भए प्रगट – मैं आपकी स्तुति कैसे करूँ

कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता ।माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता ॥करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता ।सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता ॥

रामचरितमानस, बालकांड 192 (छंद, पद 2) · अवधी

अर्थ

दोनों हाथ जोड़कर कौशल्या कहती हैं: हे अनंत, मैं आपकी स्तुति कैसे करूँ? दया और सुख के सागर, आप मेरे लिए प्रकट हुए हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

तुलसीदास के शब्दों में एक माँ का आभार।

इससे क्या मिल सकता है

मन में धन्यवाद का भाव।

सबसे अच्छा समय
जन्म के समय, नामकरण के दिन, सोते समय

विषय: शिशु का स्वागत

माँ का अचरज

भए प्रगट – वे मेरे गर्भ में रहे

ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै ।मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै ॥उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥

रामचरितमानस, बालकांड 192 (छंद, पद 3) · अवधी

अर्थ

कौशल्या कहती हैं: वेद कहते हैं कि आपके रोम-रोम में पूरे-के-पूरे ब्रह्मांड बसे हैं, फिर भी आप मेरे गर्भ में रहे। प्रभु मुस्कुराए और उन्होंने कौशल्या को एक मीठी कथा सुनाई, ताकि वे उन्हें अपनी संतान मानकर प्रेम करें।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यहाँ एक माँ अचरज से भर उठती है कि स्वयं ईश्वर उसके भीतर रहे। हर माँ के मन में यही अचरज होता है।

इससे क्या मिल सकता है

जन्म के बाद गहरी भावुकता और आभार का एहसास।

सबसे अच्छा समय
जन्म के समय, नामकरण के दिन, सोते समय

विषय: शिशु का स्वागत

शिशु का पहला रोना

भए प्रगट – नन्हे शिशु की तरह खेलो

माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा ।कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा ॥सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा ।यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा ॥

रामचरितमानस, बालकांड 192 (छंद, पद 4) · अवधी

अर्थ

माँ बोलीं: “मेरे लाल, यह भव्य रूप छोड़ दो। नन्हे शिशु की तरह खेलो; यही सबसे बड़ा सुख है।” उनकी बात सुनकर प्रभु शिशु बन गए और रोने लगे।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

भारतीय काव्य में जन्म के सबसे कोमल पलों में से एक। शिशु का पहला रोना — यही वह उपहार है, जो माँ माँगती है।

इससे क्या मिल सकता है

ख़ुशी के आँसू। नवजात के शुरुआती हफ़्तों के लिए एकदम सही लोरी।

सबसे अच्छा समय
जन्म के समय, नामकरण के दिन, सोते समय

विषय: शिशु का स्वागत

प्रभु ने जन्म क्यों लिया

बिप्र धेनु सुर संत हित

बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार ।निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ॥

रामचरितमानस, बालकांड 192 (‘भए प्रगट’ के बाद का दोहा) · अवधी

अर्थ

ज्ञानियों, गायों, देवताओं और संतों के भले के लिए प्रभु ने मनुष्य के रूप में जन्म लिया — अपनी ही इच्छा से बने ऐसे शरीर में, जो हर सीमा से परे है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह दोहा ‘भए प्रगट’ जन्म-स्तुति को पूरा करता है। हर जन्म दुनिया में भलाई लेकर आता है।

इससे क्या मिल सकता है

एक मक़सद का एहसास और उत्सव की ख़ुशी।

सबसे अच्छा समय
जन्म के समय, नामकरण के दिन, सोते समय

विषय: शिशु का स्वागत

नामकरण का दिन

आनंद के सागर – उनका नाम है राम

जो आनंद सिंधु सुखरासी ।सीकर तें त्रैलोक सुपासी ॥सो सुखधाम राम अस नामा ।अखिल लोक दायक बिश्रामा ॥

रामचरितमानस, बालकांड 197 (ऋषि वसिष्ठ द्वारा नामकरण) · अवधी

अर्थ

जो आनंद के सागर हैं, जिनकी एक बूँद से ही तीनों लोकों को ताज़गी मिल जाती है — सुख के उस धाम का नाम राम है, जो सबको चैन देते हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह रामायण में नामकरण का प्रसंग है — आपके शिशु के नामकरण संस्कार के लिए एकदम सही।

इससे क्या मिल सकता है

नामकरण के दिन पढ़ने के लिए एक सुंदर पाठ।

सबसे अच्छा समय
नामकरण संस्कार

विषय: शिशु का स्वागत

स्रोत

हम किसी शोध की बस उतनी ही बात करते हैं, जितनी उसमें सच में पाई गई। ज़्यादातर शोध थोड़े-से लोगों पर हुए हैं, और कोई भी शोध आपके डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकता। ज़रूरी सूचना पढ़ें

  • धीमी लय में जप और साँस

    शोध में क्या पता चला
    23 स्वस्थ वयस्कों पर हुए इस शोध में, प्रार्थना या मंत्र को धीमी लय में बोलने से उनकी साँस धीमी होकर लगभग 6 बार प्रति मिनट रह गई (आराम के समय यह लगभग 14 बार थी)। जप के दौरान उनकी धड़कन का स्वाभाविक उतार-चढ़ाव भी बढ़ा और साँस के साथ लय में आ गया।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    इसमें न गर्भवती महिलाएँ थीं, न संस्कृत श्लोक, न शिशु। असर बस थोड़ी देर के लिए, प्रयोगशाला में मापा गया, और यह गर्भावस्था, प्रसव या शिशु के लिए कोई सेहत-लाभ नहीं दिखाता। ‘6 साँस प्रति मिनट’ बस मापा गया नतीजा है, कोई लक्ष्य नहीं जिसे पाने की कोशिश करनी हो।

    Bernardi et al. (2001). Effect of rosary prayer and yoga mantras on autonomic cardiovascular rhythms: comparative study. BMJ 323(7327):1446-1449.

    शोध का सारांश पढ़ें (अंग्रेज़ी में)पूरा शोध पढ़ें (अंग्रेज़ी में, मुफ़्त)

  • गर्भ में शिशु कब से आवाज़ पर प्रतिक्रिया देने लगता है

    शोध में क्या पता चला
    माँ के पेट पर रखे स्पीकर से आवाज़ सुनाने पर, गर्भ में शिशु सबसे पहले लगभग 19वें सप्ताह में हरकत करते दिखे। 27वें सप्ताह तक लगभग सभी शिशु भारी, नीचे सुर वाली आवाज़ों पर प्रतिक्रिया देने लगे थे।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    इसमें सिर्फ़ ‘बीप’ जैसी सादी ध्वनियाँ सुनाई गई थीं — न बोली, न संगीत, न जप। इसलिए यह नहीं बताता कि शिशु शब्द समझते हैं, या श्लोक, कहानी और संगीत सुनने से उन्हें कोई फ़ायदा होता है।

    Hepper & Shahidullah (1994). Development of fetal hearing. Archives of Disease in Childhood - Fetal and Neonatal Edition 71(2):F81-F87.

    शोध का सारांश पढ़ें (अंग्रेज़ी में)पूरा शोध पढ़ें (अंग्रेज़ी में, मुफ़्त)

  • जन्म से पहले बार-बार सुनी आवाज़ें सीखना

    शोध में क्या पता चला
    जिन शिशुओं ने गर्भावस्था के आख़िरी तीन महीनों में एक बेमतलब, बनाया हुआ शब्द बार-बार सुना, जन्म के बाद उनके दिमाग़ ने उस शब्द की ध्वनियों पर ज़्यादा तेज़ प्रतिक्रिया दी। यानी आख़िरी महीनों में बार-बार सुनी आवाज़ें शिशु सीख और याद रख सकते हैं।
    यह शोध क्या नहीं बताता
    यह आवाज़ों की याद दिखाता है, मतलब की समझ नहीं। यह बुद्धि, भाषा या आगे के विकास पर किसी असर को नहीं दिखाता। शोधकर्ता यह भी चेताते हैं कि गर्भ में विकसित हो रहे सुनने के तंत्र को शोर से नुक़सान पहुँच सकता है।

    Partanen et al. (2013). Learning-induced neural plasticity of speech processing before birth. Proceedings of the National Academy of Sciences of the United States of America 110(37):15145-15150.

    शोध का सारांश पढ़ें (अंग्रेज़ी में)पूरा शोध पढ़ें (अंग्रेज़ी में, मुफ़्त)