घर पर गर्भ संस्कार कैसे करें: रोज़ 5 मिनट का आसान तरीक़ा
बिना क्लास के घर पर गर्भ संस्कार कैसे करें, और इसका सही समय क्या है? रोज़ 5 मिनट का आसान तरीक़ा, 7 दिन का प्लान, और थकान वाले दिनों के लिए 2 मिनट का उपाय।
गर्भशिक्षा की ओर से · · पढ़ने में 6 मिनट
तारा 18 हफ़्ते की गर्भवती थी, और उसके फ़ोन में गर्भ संस्कार के ग्यारह वीडियो सेव थे।
देखा उसने एक भी नहीं था। हर वीडियो 40 मिनट का था। किसी में पूरे बारह काम करने थे। किसी में ख़ास संगीत, ख़ास कमरा और दिन का ख़ास समय चाहिए था।
तारा मेलबर्न के एक स्कूल में पढ़ाती है। घर लौटते-लौटते वह पूरी तरह थक जाती है।
एक शाम उसकी बहन का फ़ोन आया। उसने बस इतना कहा, "वीडियो छोड़ो। शिशु को रोज़ पाँच मिनट दो।"
यह बात तारा के मन में बैठ गई। तारा ने पाँच मिनट का जो तरीक़ा शुरू किया, वही हम यहाँ बता रहे हैं। आप भी इसी तरह घर पर गर्भ संस्कार कर सकती हैं।
इस पेज पर
- क्या घर पर गर्भ संस्कार के लिए क्लास ज़रूरी है?
- रोज़ 5 मिनट का गर्भ संस्कार: पूरा तरीक़ा
- गर्भ संस्कार का सही समय: सुबह या रात?
- घर पर गर्भ संस्कार में क्या-क्या करें?
- गर्भ संस्कार का 7 दिन का आसान प्लान
- हर तिमाही में गर्भ संस्कार कैसे करें?
- आज बहुत थकान है, तो क्या करें?
- फिर क्या हुआ?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या घर पर गर्भ संस्कार के लिए क्लास ज़रूरी है?
नहीं। न क्लास चाहिए, न कोई सिखाने वाला, न कोई किट, न कोई ख़ास कमरा।
गर्भ संस्कार का सीधा-सा मतलब है: गर्भावस्था में अपने शिशु के साथ प्यार और सुकून से थोड़ा समय बिताना। कुछ पढ़ना, गाना, सुनना, प्रार्थना करना, या बस शिशु से बातें करना।
यह सब आप सोफ़े पर, बिस्तर पर या खाने की मेज़ पर बैठकर कर सकती हैं। पहले पूरी बात जानना चाहती हैं, तो हमारी गर्भ संस्कार गाइड पढ़िए।
रोज़ 5 मिनट का गर्भ संस्कार: पूरा तरीक़ा
बस चार छोटे-छोटे काम, और कुल पाँच मिनट।
- पहला मिनट: आराम से बैठिए। फ़ोन साइलेंट पर कर दीजिए। आराम से एक धीमी साँस लीजिए और कंधे ढीले छोड़ दीजिए। चाहें तो पेट पर हाथ रख लीजिए।
- दूसरा मिनट: शिशु से बात कीजिए। उसे अपने दिन की कोई एक बात बताइए। किसी भी भाषा में।
- तीसरा और चौथा मिनट: कोई एक काम कीजिए। नीचे दी गई लिस्ट में से बस एक चुन लीजिए।
- पाँचवाँ मिनट: शुक्रिया कहिए। आख़िर में किसी एक बात के लिए शुक्रिया कहिए: अपने दिन, अपने शरीर, परिवार या शिशु के लिए।
तीसरे और चौथे मिनट में आज जो मन करे, वह कीजिए:
- शिशु को एक छोटी कहानी पढ़कर सुनाइए
- कोई छोटा-सा श्लोक अर्थ के साथ जपिए या सुनिए
- कोई हल्की पहेली या जोड़ी मिलाओ खेल खेलिए
- अपना पसंदीदा गाना गाइए या गुनगुनाइए
बस, हो गया।
श्लोक जपते समय साँस सहज रखिए, रोकिए मत। चक्कर आए या साँस फूले, तो रुककर आराम कीजिए।
आपकी आवाज़ क्यों ख़ास है? लगभग 18वें हफ़्ते से शिशु आपके शरीर के अंदर की आवाज़ें सुनने लगता है। लगभग 27 से 29 हफ़्ते तक वह बाहर की कुछ आवाज़ें भी सुनने लगता है, जैसे आपकी आवाज़। इसीलिए उससे बातें करना और उसे पढ़कर सुनाना उसके क़रीब आने का एक प्यारा तरीक़ा है। इस पर और पढ़िए: गर्भ में शिशु को पढ़कर सुनाने का महत्व।
गर्भ संस्कार का सही समय: सुबह या रात?
दोनों ठीक हैं। जो समय आपके दिन में आसानी से निकल आए, वही चुनिए।
सुबह करना तब अच्छा है, जब शाम को फ़ुर्सत न मिलती हो।
- सुबह की पहली चाय या कॉफ़ी के साथ बैठिए
- शिशु को "गुड मॉर्निंग" कहिए
- एक छोटी कहानी पढ़िए या एक श्लोक जपिए
- आख़िर में बताइए कि आज आपको किस बात का इंतज़ार है
रात को करना तब अच्छा है, जब सुबह भागदौड़ रहती हो।
- बिस्तर पर, हल्की रोशनी में बैठिए
- शिशु को बताइए कि आज का दिन कैसा रहा
- कोई प्यारी कहानी पढ़िए या लोरी गुनगुनाइए
- आख़िर में आज की तीन अच्छी बातें याद कीजिए
तारा ने रात का समय चुना। यही उसके दिन का सबसे सुकून भरा समय बन गया। नौकरी के साथ समय निकालना मुश्किल लगता है, तो कामकाजी माँओं के लिए गर्भ संस्कार पढ़िए।
घर पर गर्भ संस्कार में क्या-क्या करें?
रोज़ कुछ अलग करना अच्छा लगता है, तो ये आसान काम आज़माइए:
- कहानी पढ़कर सुनाना: छोटी, प्यारी कहानियाँ
- श्लोक और प्रार्थना: अर्थ के साथ, आराम से
- संगीत: धीमे गीत, लोरियाँ या पंछियों और बारिश की आवाज़ें
- मन शांत करने वाली पहेलियाँ: पैटर्न और जोड़ी मिलाओ खेल
- शिशु से बातें: इसे गर्भ संवाद भी कहते हैं
- चिट्ठी लिखना: हर हफ़्ते शिशु के नाम एक छोटी चिट्ठी
- शुक्रिया की डायरी: रोज़ एक लाइन
- रंग भरना या चित्र बनाना: आड़ी-तिरछी लकीरें भी चलेंगी, बस मज़े के लिए
ये सब करना ज़रूरी नहीं। दिन में एक काम भी बहुत है। जानना चाहती हैं कि इससे आपको क्या मिलता है? पढ़िए: गर्भ संस्कार के 7 फ़ायदे।
गर्भ संस्कार का 7 दिन का आसान प्लान
रोज़ सोचना नहीं चाहतीं कि क्या करें? यह रहा पूरे हफ़्ते का प्लान।
- सोमवार: एक छोटी कहानी पढ़कर सुनाइए
- मंगलवार: एक श्लोक अर्थ के साथ सुनिए
- बुधवार: कोई हल्की पहेली सुलझाइए
- गुरुवार: शिशु को अपने परिवार के बारे में बताइए
- शुक्रवार: अपना पसंदीदा गाना गाइए या गुनगुनाइए
- शनिवार: शिशु के नाम एक छोटी चिट्ठी लिखिए
- रविवार: परिवार का दिन। आपके पति या घर का कोई अपना शिशु को कहानी सुनाए।
चाहें तो यही दोहराइए, चाहें तो बदल लीजिए। यह आपका अपना तरीक़ा है।
हर तिमाही में गर्भ संस्कार कैसे करें?
- पहली तिमाही (1 से 12 हफ़्ते): इसे बहुत हल्का रखिए। थकान हो सकती है, इसलिए धीमा संगीत और शुक्रिया के दो शब्द काफ़ी हैं।
- दूसरी तिमाही (13 से 26 हफ़्ते): इस समय बहुत-सी माँओं की थकान कुछ कम हो जाती है। शिशु को ज़्यादा बार पढ़कर सुनाइए।
- तीसरी तिमाही (27वें हफ़्ते से आगे): सब कुछ धीरे और आराम से। कहानियाँ, लोरियाँ और चिट्ठियाँ अब ख़ूब अच्छी लगती हैं।
आप किसी भी तिमाही में शुरू कर सकती हैं। हर तिमाही की पूरी बात इस लेख में है: गर्भ संस्कार कब शुरू करें? हमारी गाइड में हर महीने के श्लोक भी हैं।
आज बहुत थकान है, तो क्या करें?
कभी-कभी पाँच मिनट भी भारी लगते हैं। कोई बात नहीं।
तब यह दो मिनट वाला तरीक़ा आज़माइए:
- पेट पर हाथ रखिए
- कहिए, "मेरी नन्ही जान, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ"
- एक धीमी साँस लीजिए और मुस्कुराइए
इतना भी काफ़ी है। सच में।
और अगर एक दिन, या पूरा हफ़्ता भी छूट जाए? कल फिर से शुरू कीजिए। यह कोई परीक्षा नहीं है, और छूटे दिनों की भरपाई भी नहीं करनी।
फिर क्या हुआ?
पहली रात, ख़ाली कमरे में अकेले बैठकर शिशु को कहानी सुनाते हुए तारा को थोड़ा अजीब लगा।
पहला हफ़्ता बीतते-बीतते वह झिझक चली गई। 22वें हफ़्ते तक उसके पति ने रविवार की कहानी सँभाल ली। अब वे हर जानवर की मज़ेदार आवाज़ निकालते हैं, और तारा की हँसी नहीं रुकती।
तारा ने ग्यारहों वीडियो डिलीट कर दिए। उसे उनकी ज़रूरत ही नहीं थी। उसे बस पाँच मिनट चाहिए थे, और रोज़ करने के लिए एक छोटा-सा काम।
चाहती हैं कि यह रोज़ आपके लिए तैयार मिले? गर्भशिक्षा आपको हर दिन कुछ छोटी-छोटी गतिविधियाँ देती है, आपकी गर्भावस्था के हफ़्ते के हिसाब से: कोई श्लोक, पहेली, कहानी या लोरी। एक कीजिए या सारी, आपकी मर्ज़ी। यह बिल्कुल मुफ़्त है, और दुनिया में कहीं से भी चलता है। आज की गतिविधियाँ देखिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
घर पर गर्भ संस्कार कैसे करें? रोज़ पाँच मिनट शिशु के साथ सुकून से बिताइए। आराम से बैठिए, शिशु से बात कीजिए, कहानी या श्लोक जैसा कोई एक काम कीजिए, और आख़िर में शुक्रिया कहिए। न क्लास चाहिए, न कोई किट।
रोज़ कितनी देर गर्भ संस्कार करना चाहिए? पाँच मिनट से शुरुआत अच्छी है। देर तक करने से ज़्यादा ज़रूरी है थोड़ा-थोड़ा करते रहना।
गर्भ संस्कार करने का सही समय क्या है? जो समय आपको ठीक लगे। बहुत-सी माँओं को सुबह जल्दी या सोने से ठीक पहले अच्छा लगता है, क्योंकि तब शांति रहती है।
क्या संस्कृत जाने बिना गर्भ संस्कार कर सकते हैं? हाँ। आप कहानी पढ़ सकती हैं, गा सकती हैं, संगीत सुन सकती हैं या शिशु से बातें कर सकती हैं। श्लोक जपना चाहें, तो आसान अर्थ वाले श्लोक चुनिए और धीरे-धीरे जपिए।
क्या गर्भ संस्कार के लिए ख़ास संगीत या सामान चाहिए? नहीं। सबसे ज़रूरी है आपकी आवाज़। एक किताब, एक डायरी, या फ़ोन पर कोई धीमा गाना, बस इतना बहुत है।