गर्भ संस्कार के 7 फ़ायदे: शिशु के लिए ही नहीं, माँ के लिए भी
ज़्यादातर लोग गर्भ संस्कार के फ़ायदे सिर्फ़ शिशु के लिए गिनाते हैं। जानिए माँ को मिलने वाले 7 असली फ़ायदे, और शिशु के बारे में रिसर्च क्या कहती है।
गर्भशिक्षा की ओर से · · · पढ़ने में 7 मिनट
नेहा 22 हफ़्ते की गर्भवती थी, और बहुत तनाव में रहती थी।
शाम 7 बजे तक ऑफ़िस की कॉल। फिर खाना। फिर ईमेल। फिर बिस्तर, पर दिमाग़ तब भी चलता रहता।
एक शाम उसकी सहेली ने पूछा, "गर्भ संस्कार कर रही हो?" नेहा हँस पड़ी, "यहाँ तो चाय भी ठंडी हो जाती है, पीने की फ़ुर्सत नहीं मिलती।"
उसी रात सोने से पहले उसने यूँ ही फ़ोन पर खोजा: गर्भ संस्कार के फ़ायदे। लगभग हर पेज पर बस शिशु की बात थी। होशियार शिशु। तेज़ दिमाग़ वाला शिशु। नेहा के बारे में एक शब्द भी नहीं।
नेहा ने सोचा, "और मेरा क्या?"
यह लेख इसी सवाल का जवाब है। गर्भ संस्कार से आपको, यानी माँ को, क्या मिलता है, और शिशु को इससे सच में क्या फ़ायदा होता है।
इस पेज पर
- पहले जानिए, गर्भ संस्कार है क्या?
- फ़ायदा 1: भागदौड़ भरे दिन में सुकून के पाँच मिनट
- फ़ायदा 2: शिशु से जुड़ाव महसूस होने लगता है
- फ़ायदा 3: आपकी आवाज़ शिशु की जानी-पहचानी बन जाती है
- फ़ायदा 4: पूरा परिवार साथ जुड़ सकता है
- फ़ायदा 5: एक छोटी-सी आदत, जो दिन को सँभाल लेती है
- फ़ायदा 6: ख़ुद पर भरोसा ज़्यादा, दबाव कम
- फ़ायदा 7: यादें, और एक आदत जो आगे भी साथ रहती है
- गर्भ संस्कार क्या नहीं कर सकता
- नेहा ने 5 मिनट से कैसे शुरुआत की
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पहले जानिए, गर्भ संस्कार है क्या?
गर्भ संस्कार का मतलब है: गर्भ में ही अच्छे संस्कार। सीधे शब्दों में, गर्भावस्था में अपने शिशु के साथ प्यार और सुकून से थोड़ा समय बिताना।
आप कोई कहानी पढ़कर सुना सकती हैं, संगीत सुन सकती हैं, कोई छोटा-सा श्लोक बोल सकती हैं, प्रार्थना कर सकती हैं, या बस पेट पर हाथ रखकर शिशु से बातें कर सकती हैं। यह भारत की पुरानी परंपरा है, और आज दुनिया भर के परिवार इसे अपनाते हैं। पहली बार सुन रही हैं? तो कामकाजी माँओं के लिए गर्भ संस्कार में सब कुछ आसान शब्दों में समझाया गया है।
फ़ायदा 1: भागदौड़ भरे दिन में सुकून के पाँच मिनट
गर्भावस्था में कई बार लगता है जैसे कामों की लिस्ट ख़त्म ही नहीं होती। स्कैन, ऑफ़िस, घर-परिवार, आगे की तैयारी।
गर्भ संस्कार आपको ऐसे पाँच मिनट देता है, जिनमें आपसे किसी को कुछ नहीं चाहिए। आप बस बैठती हैं, आराम से साँस लेती हैं, और शिशु के साथ समय बिताती हैं।
विज्ञान भी इसमें थोड़ी हामी भरता है। 2019 में 11 रिसर्च के नतीजों को एक साथ परखा गया। औसतन, संगीत सुनने से गर्भवती महिलाओं की घबराहट कुछ कम हुई। पर हर रिसर्च में नतीजे एक जैसे नहीं थे, इसलिए इसे इलाज नहीं, एक अच्छी आदत मानिए।
आज़माइए: एक हल्की-सी पैटर्न या मेमोरी पहेली, या सोने से पहले कोई धीमा, मीठा गाना।
फ़ायदा 2: शिशु से जुड़ाव महसूस होने लगता है
शुरू के महीनों में बहुत-सी माँओं को शिशु दूर-सा लगता है। आप जानती हैं कि वह है, पर हर समय उसे महसूस नहीं कर पातीं।
शिशु से बातें करने से यह दूरी घटने लगती है। सुबह उठते ही उससे "गुड मॉर्निंग" कहिए, अपने दिन की बातें सुनाइए, बताइए कि घर में कौन-कौन उसका इंतज़ार कर रहा है। धीरे-धीरे उससे एक रिश्ता बनने लगता है।
आज़माइए: हर सुबह शिशु से तीन छोटी-छोटी बातें कहिए। किसी भी भाषा में।
फ़ायदा 3: आपकी आवाज़ शिशु की जानी-पहचानी बन जाती है
यह फ़ायदा शिशु के लिए है, और इस पर सच में रिसर्च हुई है।
लगभग 18वें हफ़्ते से शिशु आपके शरीर के अंदर की आवाज़ें सुनने लगता है। लगभग 27 से 29 हफ़्ते तक वह बाहर की कुछ आवाज़ें भी सुनने लगता है, जैसे आपकी आवाज़।
कनाडा की क्वींस यूनिवर्सिटी ने 2003 में जन्म के क़रीब पहुँचे शिशुओं पर एक रिसर्च की। माँ की आवाज़ पर उनकी धड़कन तेज़ हुई, और किसी अनजान महिला की आवाज़ पर धीमी। इसका मतलब यह नहीं कि शिशु कुछ सीख रहा है। मतलब बस इतना है कि आपकी आवाज़ उसकी जानी-पहचानी बन जाती है। इस पर और पढ़िए: गर्भ में शिशु को पढ़कर सुनाने का महत्व।
आज़माइए: हर शाम शिशु को एक छोटी-सी कहानी पढ़कर सुनाइए।
फ़ायदा 4: पूरा परिवार साथ जुड़ सकता है
गर्भ संस्कार सिर्फ़ माँ के लिए नहीं है। पति, दादा-दादी, नाना-नानी और बड़े भाई-बहन, सब इसमें शामिल हो सकते हैं।
और एक प्यारी बात सुनिए। 2014 की एक रिसर्च में पाया गया कि गर्भ में शिशु की धड़कन सिर्फ़ माँ की ही नहीं, पापा की आवाज़ सुनकर भी बदलती है।
इससे हर किसी को एक छोटा-सा, प्यारा काम मिल जाता है। पापा सोने से पहले का गाना चुनें। दादी कोई पुरानी कहानी सुनाएँ। बड़ी दीदी शिशु के लिए एक तस्वीर बनाए।
आज़माइए: हफ़्ते में एक शाम ऐसी रखिए, जब पूरा परिवार मिलकर शिशु को कहानी सुनाए।
फ़ायदा 5: एक छोटी-सी आदत, जो दिन को सँभाल लेती है
जब दिन भर भागदौड़ लगी रहे, तब एक छोटी-सी आदत सहारा बन जाती है। रोज़ वही समय, वही पाँच मिनट।
इसका मतलब काम बढ़ाना नहीं है। बात बस इतनी है कि दिन में एक पल ऐसा हो, जो पक्का आपका अपना हो।
आज़माइए: इसे किसी ऐसे काम से जोड़ दीजिए, जो आप रोज़ करती ही हैं, जैसे शाम की चाय या रात को ब्रश करना।
फ़ायदा 6: ख़ुद पर भरोसा ज़्यादा, दबाव कम
गर्भावस्था में लोग इतनी सलाहें देते हैं कि दबाव-सा लगने लगता है। यह करो। वह कभी मत करो। यह खाओ। एक दिन भी मत छोड़ो।
बिना बड़े-बड़े वादों के किया जाए, तो गर्भ संस्कार इसका बिल्कुल उल्टा है। इसमें न कोई परीक्षा है, न पूरे नंबर लाने हैं। और अपने शिशु को प्यार करने का कोई ग़लत तरीक़ा होता ही नहीं।
क्या करना है, यह आप चुनती हैं: कोई कहानी, कोई गाना, कोई प्रार्थना, कोई पहेली। यही आज़ादी मन में एक शांत-सा भरोसा जगाती है कि आप सब ठीक कर रही हैं।
और अगर कोई दिन छूट जाए? कोई बात नहीं। कल फिर से शुरू कीजिए।
फ़ायदा 7: यादें, और एक आदत जो आगे भी साथ रहती है
आपकी लिखी चिट्ठियाँ, आपके गाए गाने, आपकी सुनाई कहानियाँ, ये सब ऐसी यादें बन जाती हैं, जिन्हें आप हमेशा सँभालकर रखना चाहेंगी।
बहुत-से माता-पिता वही कहानी या लोरी जन्म के बाद भी सुनाते रहते हैं। वह सोने के समय का एक प्यारा हिस्सा बन जाती है। और शिशु को पढ़कर सुनाना ऐसी आदत है, जिसे आगे भी बनाए रखना अच्छा है।
आज़माइए: एक छोटी-सी डायरी रखिए। हर हफ़्ते उसमें शिशु के लिए एक लाइन लिखिए।
गर्भ संस्कार क्या नहीं कर सकता
चलिए, सच-सच बात करते हैं, क्योंकि आपको सच जानने का पूरा हक़ है।
ऐसी कोई रिसर्च नहीं है, जो कहे कि गर्भ संस्कार से शिशु ज़्यादा होशियार बनता है या उसका आईक्यू बढ़ता है। यह कोई दवा नहीं है, और डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता। रिसर्च पर पूरी बात यहाँ पढ़िए: क्या गर्भ संस्कार से शिशु होशियार बनता है?
इसके असली फ़ायदे हैं सुकून, जुड़ाव और भरोसा। और सच कहें, तो ये कोई छोटी बातें नहीं हैं।
नेहा ने 5 मिनट से कैसे शुरुआत की
नेहा ने अपने दिन में एक घंटा नहीं जोड़ा। बस पाँच मिनट जोड़े।
- एक समय चुना: रात के खाने के ठीक बाद।
- एक काम चुना: एक छोटी कहानी पढ़कर सुनाना।
- इसे छोटा रखा: बस पाँच मिनट, फ़ोन साइलेंट पर।
दो हफ़्ते में ही ये पाँच मिनट दिन का वह हिस्सा बन गए, जिसका उसे सबसे ज़्यादा इंतज़ार रहता। छुट्टी वाले दिन उसके पति भी साथ बैठने लगे। नेहा कहती है कि पूरे दिन में सबसे ज़्यादा सुकून उसे इन्हीं पाँच मिनटों में मिलता है।
गर्भ संस्कार के लिए घंटा भर नहीं चाहिए। बस पाँच मिनट का सुकून, और आप।
चाहती हैं कि ये पाँच मिनट आपके लिए पहले से तैयार मिलें? गर्भशिक्षा पर आज की गतिविधियाँ देखिए: आपकी गर्भावस्था के हफ़्ते के हिसाब से रोज़ कुछ छोटी-छोटी गतिविधियाँ, जैसे कोई कहानी, श्लोक, मन शांत करने वाली पहेली या लोरी। एक कीजिए या सारी, आपकी मर्ज़ी। यह बिल्कुल मुफ़्त है, और दुनिया में कहीं से भी चलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गर्भ संस्कार के क्या फ़ायदे हैं? माँ को रोज़ कुछ पल का सुकून मिलता है, शिशु से जल्दी जुड़ाव बनता है, शिशु के लिए माँ की आवाज़ जानी-पहचानी बनती है, और पूरा परिवार ख़ुशी-ख़ुशी इसमें शामिल हो पाता है।
माँ के लिए गर्भ संस्कार के क्या फ़ायदे हैं? इससे आपको हर दिन कुछ शांत पल मिलते हैं, शिशु से जुड़ाव महसूस होने लगता है, और बिना किसी दबाव के एक प्यारी-सी आदत बनती है। संगीत से भी मन को कुछ सुकून मिल सकता है।
शिशु के लिए गर्भ संस्कार के क्या फ़ायदे हैं? रिसर्च बताती है कि शिशु गर्भ में सुनता है और बार-बार सुनी आवाज़ें पहचान सकता है। गर्भ संस्कार से आपकी आवाज़ भी उन्हीं जानी-पहचानी आवाज़ों में शामिल हो जाती है।
क्या गर्भ संस्कार से तनाव कम होता है? संगीत सुनने जैसे शांत कामों से मन हल्का हो सकता है, पर गर्भ संस्कार कोई इलाज नहीं है। अगर आप बहुत तनाव में हैं या मन अक्सर उदास रहता है, तो अपने डॉक्टर से बात कीजिए।
क्या गर्भ संस्कार का कोई वैज्ञानिक आधार है? इसका कोई सबूत नहीं कि इससे शिशु ज़्यादा होशियार बनता है। पर भरोसेमंद रिसर्च बताती है कि शिशु गर्भ में सुनता है और बार-बार सुनी आवाज़ें पहचान सकता है, और संगीत से माँ को सुकून मिल सकता है।
गर्भ संस्कार कब से शुरू करना चाहिए? किसी भी दिन, किसी भी तिमाही में। पूरी बात यहाँ पढ़िए: गर्भ संस्कार कब शुरू करें?