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अर्थ सहित 5 श्लोक

प्रेगनेंसी में दुर्गा सप्तशती

दुर्गा सप्तशती, जिसे देवी माहात्म्य भी कहते हैं, 13 अध्यायों और 700 श्लोकों का पाठ है। पूरे पाठ में समय लगता है, और बहुत-से घरों में इसके अपने नियम होते हैं। इसीलिए माँओं के मन में सवाल आता है कि क्या प्रेगनेंसी में वे सप्तशती का पाठ कर सकती हैं। इसका कोई एक जवाब नहीं — परंपराएँ अलग-अलग हैं। कुछ महिलाएँ पूरा पाठ ख़ुद करती हैं। कुछ घरों में गर्भावस्था के दौरान पंडित जी या परिवार का कोई और सदस्य पाठ करता है, और माँ पास बैठकर सुनती है। आपके घर में जो चलन है, उसे मानिए, और वही चुनिए जिसमें आपका शरीर आराम से रहे।

देर तक बैठना भारी लगे, तो कुछ छोटे श्लोकों के ज़रिए भी आप सप्तशती से जुड़ी रह सकती हैं। यहाँ उसके पाँच सबसे जाने-माने श्लोक उसी क्रम में दिए गए हैं जिसमें वे पाठ में आते हैं: ‘शूलेन पाहि नो देवि’, रक्षा का श्लोक, जिसमें देवी से त्रिशूल, तलवार, यहाँ तक कि घंटे की ध्वनि से भी रक्षा की विनती है; ‘सर्वमंगल मांगल्ये’, जिसे लगभग हर घर जानता है; ‘शरणागत’, आख़िरी हफ़्तों की उमड़ती भावनाओं के लिए; ‘सर्वस्वरूपे सर्वेशे’, स्कैन या रिपोर्ट से पहले के डर भरे दिनों के लिए; और ‘रोगानशेषान्’, जिसे परंपरा में सेहत के लिए पढ़ा जाता है। पीठ को सहारा देकर बैठिए और एक श्लोक 11 या 21 बार जपिए। पाँचवें अध्याय के ‘या देवी सर्वभूतेषु’ मंत्रों के लिए अलग पेज है।

इन श्लोकों से रक्षा होती है, यह एक पारंपरिक मान्यता है। आपकी असली रक्षा डॉक्टरी देखभाल है, इसलिए ख़ून आए या दर्द हो, तो इलाज में कभी देर न कीजिए। नवरात्रि में पाठ के साथ व्रत भी रखना चाहें, तो पहले डॉक्टर से ज़रूर पूछ लीजिए। ज़रूरी सूचना पढ़ें

हर तरह से रक्षा

त्रिशूल से हमारी रक्षा करो

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके ।घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च ॥

देवी माहात्म्य 4.24

अर्थ

हे देवी, अपने त्रिशूल और तलवार से हमारी रक्षा करो। अपने घंटे की ध्वनि और धनुष की डोरी की टंकार से हमारी रक्षा करो।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

रक्षा का एक जाना-माना श्लोक। ध्यान दीजिए, इसमें घंटे की ध्वनि रक्षा करती है — गर्भ संस्कार में ध्वनि पर जो ज़ोर है, उससे इसका सुंदर मेल है।

इससे क्या मिल सकता है

हिम्मत का एहसास। चाहें तो जप करते समय हल्के-हल्के एक छोटी घंटी बजाइए।

सबसे अच्छा समय
सुबह, या शाम को दीया जलाते समय
जपने का तरीका
11 या 21 बार। परंपरा के अनुसार देवी के श्लोक शुक्रवार को जपे जाते हैं
कौन जप सकता है
माँ और परिवार
सबसे सही सप्ताह
4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)

सच कहें तोइससे रक्षा होती है, यह एक पारंपरिक मान्यता है। आपकी असली रक्षा डॉक्टरी देखभाल है। ख़ून आए या दर्द हो, तो इलाज में कभी देर न करें।

विषय: गर्भ रक्षा

गर्भावस्था पर आशीर्वाद

सर्वमंगल मांगल्ये

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

देवी माहात्म्य 11.10

अर्थ

हे मंगलमयी, सारे मंगल का स्रोत, हर कामना पूरी करने वाली, हमें शरण देने वाली गौरी, नारायणी — तुम्हें हमारा प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

देवी के सबसे जाने-पहचाने श्लोकों में से एक, जिसे पूरा परिवार आसानी से बोल सकता है।

इससे क्या मिल सकता है

यह एहसास कि पूरी गर्भावस्था पर आशीर्वाद बना हुआ है।

सबसे अच्छा समय
सुबह, या शाम को दीया जलाते समय
जपने का तरीका
11 या 21 बार। परंपरा के अनुसार देवी के श्लोक शुक्रवार को जपे जाते हैं
कौन जप सकता है
माँ और परिवार
सबसे सही सप्ताह
4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)

सच कहें तोइससे रक्षा होती है, यह एक पारंपरिक मान्यता है। आपकी असली रक्षा डॉक्टरी देखभाल है। ख़ून आए या दर्द हो, तो इलाज में कभी देर न करें।

विषय: गर्भ रक्षा

प्रसव की तारीख़ पास आने पर उमड़ती भावनाएँ

शरणागत – शरण में आने वालों की रक्षक

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

देवी माहात्म्य 11.12

अर्थ

हे देवी, आप अपनी शरण में आए दीन-दुखियों को बचाने में लगी रहती हैं, आप सबका दुख-दर्द हर लेती हैं — आपको मेरा प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

आख़िरी हफ़्तों में मन में उमड़ती भावनाओं के लिए एक श्लोक।

इससे क्या मिल सकता है

मन को सहारा; प्रसव के समय के लिए भी सँभालकर रखने लायक़ श्लोक।

सबसे अच्छा समय
रोज़ एक ही समय पर
जपने का तरीका
अपने 1–2 “प्रसव के श्लोक” चुनें और प्रसव का समय आने तक रोज़ उन्हें दोहराएँ
कौन जप सकता है
माँ और प्रसव के समय साथ रहने वाले
सबसे सही सप्ताह
28–37 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह पक्का नहीं कर सकता कि प्रसव सामान्य ही होगा। हर सुरक्षित जन्म अच्छा जन्म है — सिज़ेरियन से हुआ जन्म भी।

विषय: प्रसव की तैयारी

डर और घबराहट में राहत

हर डर से हमारी रक्षा करें

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) 11.24

अर्थ

हे देवी, आप हर रूप में विराजमान हैं, सबकी स्वामिनी हैं और हर शक्ति से भरी हैं — हमें हर डर से बचाइए। हे दुर्गा, हम आपको प्रणाम करते हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

पहला स्कैन, जाँच के नतीजे और पहले कभी गर्भ खो देने की याद मन में गहरा डर जगा सकते हैं। यह देवी का वह जाना-माना श्लोक है जो डर दूर करता है।

इससे क्या मिल सकता है

घबराहट के समय मन को थामने वाला एहसास। अगर घबराहट हर समय बनी रहती है, तो कृपया अपने डॉक्टर से बात करें।

सबसे अच्छा समय
सुबह जागते ही, या जब भी मन बेचैन हो
जपने का तरीका
एक श्लोक, 3–11 बार। 5 मिनट का छोटा-सा अभ्यास काफ़ी है
कौन जप सकता है
माँ; थकान वाले दिनों में परिवार पढ़कर सुना सकता है
सबसे सही सप्ताह
4–13 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह जी मिचलाने का इलाज नहीं है। बहुत ज़्यादा उल्टी हो, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

विषय: पहली तिमाही में राहत

सेहत और रोगों से राहत

रोगानशेषान् – सारे रोग दूर करने वाली

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥

देवी माहात्म्य 11.29

अर्थ

आप प्रसन्न होने पर सारे रोग दूर कर देती हैं। जो आपकी शरण में आते हैं, उन पर कोई संकट नहीं आता, और वे ख़ुद दूसरों का सहारा बन जाते हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

दुर्गा सप्तशती का पाठ करने वाले इसे सेहत के लिए परंपरा से बोलते आए हैं।

इससे क्या मिल सकता है

मन को सहारा और उम्मीद।

सबसे अच्छा समय
भोजन से पहले, या आयरन-कैल्शियम की गोलियाँ लेते समय
जपने का तरीका
हर भोजन से पहले एक बार, या सुबह 11 बार
कौन जप सकता है
माँ; भोजन के समय पूरा परिवार
सबसे सही सप्ताह
किसी भी सप्ताह

सच कहें तोयह धन्यवाद की प्रार्थना है। यह खान-पान की सलाह, आयरन और फ़ॉलिक एसिड की गोलियों या दवाओं की जगह नहीं लेती।

विषय: माँ की सेहत और पोषण

यह भी देखें: या देवी सर्वभूतेषु: गर्भावस्था के लिए 11 मंत्र