हर तरह से रक्षा
त्रिशूल से हमारी रक्षा करो
देवी माहात्म्य 4.24
अर्थ
हे देवी, अपने त्रिशूल और तलवार से हमारी रक्षा करो। अपने घंटे की ध्वनि और धनुष की डोरी की टंकार से हमारी रक्षा करो।
हमने यह श्लोक क्यों चुना
रक्षा का एक जाना-माना श्लोक। ध्यान दीजिए, इसमें घंटे की ध्वनि रक्षा करती है — गर्भ संस्कार में ध्वनि पर जो ज़ोर है, उससे इसका सुंदर मेल है।
इससे क्या मिल सकता है
हिम्मत का एहसास। चाहें तो जप करते समय हल्के-हल्के एक छोटी घंटी बजाइए।
- सबसे अच्छा समय
- सुबह, या शाम को दीया जलाते समय
- जपने का तरीका
- 11 या 21 बार। परंपरा के अनुसार देवी के श्लोक शुक्रवार को जपे जाते हैं
- कौन जप सकता है
- माँ और परिवार
- सबसे सही सप्ताह
- 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)
सच कहें तोइससे रक्षा होती है, यह एक पारंपरिक मान्यता है। आपकी असली रक्षा डॉक्टरी देखभाल है। ख़ून आए या दर्द हो, तो इलाज में कभी देर न करें।
विषय: गर्भ रक्षा