आख़िरी हफ़्तों में उत्साह, थकान और डर — सब एक साथ महसूस हो सकते हैं। ये श्लोक जन्म की ऐसी शांत छवियाँ देते हैं, जिन्हें आप मन में सँजोकर रख सकती हैं। ऋग्वेद में जन्म की तुलना उस हवा से की गई है, जो कमल के तालाब में लहरें उठाती है। अथर्ववेद के श्लोकों में प्रार्थना है कि शरीर तनाव छोड़े और जन्म के लिए खुल जाए। ‘भए प्रगट कृपाला’ में राम के जन्म पर माता कौशल्या की ख़ुशी गाई गई है। गीता के दो श्लोक याद दिलाते हैं कि अपनी ओर से पूरी तैयारी कीजिए, फिर यह सोच छोड़ दीजिए कि प्रसव बिल्कुल वैसा ही हो, जैसा आपने सोचा था।
ज़्यादातर श्लोक 28 से 37 सप्ताह के लिए हैं। दो श्लोक गोद भराई (सीमंतोन्नयन) संस्कार के हैं, जो छठे या आठवें महीने में होता है — चाहें तो उस दिन इन्हें पढ़ सकती हैं। एक-दो श्लोक चुन लीजिए और प्रसव का समय आने तक उन्हें रोज़ एक ही समय पर बोलिए। प्रसव के समय जो आपके साथ रहेंगे, उन्हें भी ये श्लोक सिखा दीजिए। जाने-पहचाने शब्द मुश्किल घड़ी में आसानी से याद आते हैं।
जप से मन शांत रहने में मदद मिल सकती है, पर जप यह तय नहीं कर सकता कि प्रसव कैसे होगा। हर सुरक्षित जन्म अच्छा जन्म है — सिज़ेरियन से हुआ जन्म भी। अपने डॉक्टर या दाई की सलाह मानिए, कोई भी जाँच मत छोड़िए, और कुछ भी ठीक न लगे, तो तुरंत उन्हें फ़ोन कीजिए। ज़रूरी सूचना पढ़ें