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16 श्लोक · 4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)

गर्भ रक्षा मंत्र और स्तोत्र

सदियों से भारतीय परिवार देवी माँ से गर्भ रक्षा की प्रार्थना करते आए हैं — कि वे शिशु को सुरक्षित थामे रखें। यहाँ अथर्ववेद का एक सूक्त है, जिसमें माँ की तुलना धरती से की गई है, और गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र के श्लोक हैं। तंजावुर के पास तिरुकरुकावूर मंदिर से जुड़ा 20वीं सदी का यह स्तोत्र दक्षिण भारत के कई परिवारों में बड़े प्रेम से पढ़ा जाता है। सर्वमंगल मांगल्ये जैसे देवी के श्लोक और ॐ शरवणभवाय नमः जैसे छोटे मंत्र भी हैं।

बहुत-से परिवार गर्भावस्था की शुरुआत से ही इनका पाठ करने लगते हैं और पूरे नौ महीने करते रहते हैं, ख़ासकर 4 से 20 सप्ताह के बीच। कोई एक श्लोक चुनिए और सुबह, या शाम को दीया जलाते समय, उसे धीरे-धीरे 11 या 21 बार जपिए। देवी के श्लोकों के लिए शुक्रवार शुभ माना जाता है। अथर्ववेद के इस सूक्त के चारों श्लोक चार हफ़्तों की एक प्यारी शृंखला बनाते हैं — 5वें से 8वें सप्ताह तक, हर हफ़्ते का एक श्लोक। शुरुआत अर्थ पढ़ने से करें, तो भी ठीक है।

यहाँ रक्षा का मतलब है प्रार्थना और मन का भरोसा, डॉक्टरी सुरक्षा नहीं। आपकी असली रक्षा डॉक्टर की देखभाल है। ख़ून आए, दर्द हो या कोई भी बात परेशान करे, तो बिना देर किए अपने डॉक्टर से बात कीजिए। गर्भरक्षाम्बिका के श्लोकों समेत कुछ पाठों की संस्कृत विद्वान से जाँच अभी बाक़ी है; पेज पर ऐसे हर श्लोक के साथ यह बात लिखी है। ज़रूरी सूचना पढ़ें

इन श्लोकों को कैसे जपें

नीचे के हर श्लोक के लिए — जब तक उसके साथ कुछ और न लिखा हो।

सबसे अच्छा समय
सुबह, या शाम को दीया जलाते समय
जपने का तरीका
11 या 21 बार। परंपरा के अनुसार देवी के श्लोक शुक्रवार को जपे जाते हैं
कौन जप सकता है
माँ और परिवार
सबसे सही सप्ताह
4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)

सच कहें तोइससे रक्षा होती है, यह एक पारंपरिक मान्यता है। आपकी असली रक्षा डॉक्टरी देखभाल है। ख़ून आए या दर्द हो, तो इलाज में कभी देर न करें।

गर्भ का टिका रहना

जैसे धरती सबको सँभाले है, वैसे ही आपका शिशु सँभला रहे

यथेयं पृथिवी मही भूतानां गर्भमादधे ।एवा ते ध्रियतां गर्भो अनु सूतुं सवितवे ॥

अथर्ववेद (शौनक) 6.17.1

अर्थ

जैसे यह विशाल धरती सब प्राणियों का बीज धारण करती है, वैसे ही आपका शिशु जन्म के सही समय तक सुरक्षित सँभला रहे।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

गर्भ के मज़बूती से टिके रहने के लिए भारत की सबसे पुरानी प्रार्थनाओं में से एक। इसकी छवि बहुत सुंदर है: माँ, धरती की तरह जीवन को थामे हुए।

इससे क्या मिल सकता है

गहरा सुकून, ख़ासकर उन माँओं के लिए जिन्होंने पहले गर्भ खोया है या शुरुआती दिनों में ख़ून दिखने का डर झेला है।

गर्भ का टिका रहना

जैसे धरती पेड़ों को थामे है

यथेयं पृथिवी मही दाधारेमान्वनस्पतीन् ।एवा ते ध्रियतां गर्भो अनु सूतुं सवितवे ॥

अथर्ववेद 6.17.2

अर्थ

जैसे यह विशाल धरती इन पेड़ों को थामे रहती है, वैसे ही जन्म तक आपका शिशु गर्भ में सँभला रहे।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसी सूक्त का दूसरा श्लोक। इसके चारों श्लोक चार हफ़्तों में जपिए — हर हफ़्ते एक।

इससे क्या मिल सकता है

बार-बार दोहराई जाने वाली सुकून भरी लय, जिससे माँओं का मन शांत होता है।

गर्भ का टिका रहना

जैसे धरती पहाड़ों को थामे है

यथेयं पृथिवी मही दाधार पर्वतान्गिरीन् ।एवा ते ध्रियतां गर्भो अनु सूतुं सवितवे ॥

अथर्ववेद 6.17.3

अर्थ

जैसे धरती बड़े-बड़े पहाड़ों को थामे रहती है, वैसे ही जन्म तक आपका शिशु गर्भ में सँभला रहे।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

पहाड़ स्थिरता का प्रतीक है।

इससे क्या मिल सकता है

अपने ही शरीर की ताक़त का एहसास।

गर्भ का टिका रहना

जैसे धरती पूरे संसार को थामे है

यथेयं पृथिवी मही दाधार विष्ठितं जगत् ।एवा ते ध्रियतां गर्भो अनु सूतुं सवितवे ॥

अथर्ववेद 6.17.4

अर्थ

जैसे धरती दूर-दूर तक फैले इस पूरे संसार को थामे रहती है, वैसे ही जन्म तक आपका शिशु गर्भ में सँभला रहे।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

सूक्त इसी श्लोक पर पूरा होता है, सबसे बड़ी छवि के साथ — पूरा संसार।

इससे क्या मिल सकता है

चार श्लोकों का एक अर्थपूर्ण अभ्यास यहाँ पूरा होता है।

गर्भ की रक्षा

गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र – टेक और श्लोक 1

संस्कृत विद्वान की जाँच बाक़ी है

श्रीमाधवीकाननस्थे गर्भरक्षाम्बिके पाहि भक्तां स्तुवन्तीम् ॥वापीतटे वामभागे वामदेवस्य देवस्य देवि स्थिता त्वम् ।मान्या वरेण्या वदान्या पाहि गर्भस्थजन्तून् तथा भक्तलोकान् ॥

गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र (अनंतराम दीक्षितर, 20वीं सदी), तंजावुर के पास तिरुकरुकावूर मंदिर

अर्थ

हे चमेली के वन में बसने वाली, गर्भ की रक्षा करने वाली माँ! मैं तुम्हारी स्तुति करती हूँ, मेरी रक्षा करो। भगवान शिव के साथ विराजमान, पूजनीय और उदार माँ! गर्भ में पल रहे शिशुओं की और अपने सभी भक्तों की रक्षा करो।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

पूरी तरह गर्भावस्था के लिए रचे गए, भारत के सबसे जाने-माने स्तोत्रों में से एक। दक्षिण भारत के कई परिवार हर तिमाही में इसका पाठ करते हैं।

इससे क्या मिल सकता है

यह गहरा एहसास कि आप सुरक्षित हैं। ध्यान दें: यह एक आधुनिक रचना है (लगभग 100 साल पुरानी), वैदिक नहीं।

सबसे अच्छा समय
सुबह; परंपरा के अनुसार शुक्रवार को

गर्भ की रक्षा

गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र – श्लोक 2

संस्कृत विद्वान की जाँच बाक़ी है

श्रीगर्भरक्षापुरे या दिव्यसौन्दर्ययुक्ता सुमाङ्गल्यगात्री ।धात्री जनित्री जनानां दिव्यरूपां दयार्द्रां मनोज्ञां भजे त्वाम् ॥

गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र, श्लोक 2

अर्थ

गर्भ-रक्षा की नगरी में बसने वाली, दिव्य सुंदरता से भरी, मंगलमयी देवी! तुम सब लोगों को पालने वाली धाय भी हो और जन्म देने वाली माँ भी। हे दयालु और मनोहर देवी, मैं तुम्हारी पूजा करती हूँ।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें देवी को ‘धात्री’ (पालने वाली) और ‘जनित्री’ (जन्म देने वाली माँ) कहा गया है — यही दोनों भूमिकाएँ अब आप निभाने जा रही हैं।

इससे क्या मिल सकता है

यह अपनापन कि देवी भी माँ हैं और आप भी।

सबसे अच्छा समय
सुबह; परंपरा के अनुसार शुक्रवार को

गर्भ की रक्षा

गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र – श्लोक 4

संस्कृत विद्वान की जाँच बाक़ी है

कल्याणदात्रीं नमस्ये वेदिकाढ्यस्त्रिया गर्भरक्षाकरीं त्वाम् ।बालैः सदा सेविताङ्घ्रिं गर्भरक्षार्थमारादुपेतैरुपेताम् ॥

गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र, श्लोक 4

अर्थ

हे कल्याण करने वाली, गर्भ की रक्षा करने वाली माँ, मैं तुम्हें प्रणाम करती हूँ। तुम्हारे चरणों की सेवा बच्चे भी करते हैं और वे लोग भी, जो गर्भ की रक्षा माँगने तुम्हारे पास आते हैं।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

इसमें उद्देश्य साफ़-साफ़ कहा गया है: गर्भ-रक्षा, यानी गर्भ की रक्षा।

इससे क्या मिल सकता है

गर्भावस्था के बीच के महीनों में सुकून।

सबसे अच्छा समय
सुबह; परंपरा के अनुसार शुक्रवार को

आसान प्रसव की प्रार्थना

गर्भरक्षाम्बिका – प्रसव के समय का श्लोक

संस्कृत विद्वान की जाँच बाक़ी है

हे शङ्कर स्मरहर प्रमथाधिनाथ मन्नाथ साम्ब शशिचूड हर त्रिशूलिन् ।शम्भो सुखप्रसवकृद्भव मे दयालो हे माधवीवननिवास सदावनं माम् ॥

तिरुकरुकावूर मंदिर का पारंपरिक श्लोक

अर्थ

हे शंकर, अम्बा के साथ विराजमान प्रभु, चंद्रमा को धारण करने वाले, त्रिशूलधारी! मुझ पर दया करो और मुझे आसान प्रसव (सुख-प्रसव) का वरदान दो। हे चमेली के वन में बसने वाले, सदा मेरी रक्षा करो।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

उन गिने-चुने संस्कृत श्लोकों में से एक, जो सीधे ‘सुख-प्रसव’ यानी सुखद और आसान प्रसव माँगते हैं। मंदिर की परंपरा में इसे गर्भावस्था की शुरुआत से ही पढ़ने की सलाह दी जाती है।

इससे क्या मिल सकता है

प्रसव को लेकर आशा और भरोसे से भरा मन।

सबसे सही सप्ताह
4–40 सप्ताह और प्रसव के समय

सच कहें तोयह पक्का नहीं कर सकता कि प्रसव सामान्य ही होगा। ज़रूरत पड़ने पर सिज़ेरियन से हुआ जन्म भी सुरक्षित और शुभ जन्म है।

बीमारी से रक्षा

गर्भ से रोग दूर भगाएँ

ब्रह्मणाग्निः संविदानो रक्षोहा बाधतामितः ।अमीवा यस्ते गर्भं दुर्णामा योनिमाशये ॥

ऋग्वेद 10.162.1 (भ्रूण की रक्षा का सूक्त)

अर्थ

प्रार्थना के साथ मिलकर अग्निदेव उस रोग को यहाँ से दूर भगाएँ, जो आपके गर्भ और शिशु पर घात लगाए बैठा है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

रक्षा का एक प्राचीन श्लोक। ‘अमीवा’ का अर्थ है रोग, इसलिए हम इसमें आए ‘राक्षस’ को बीमारी के रूप में पढ़ते हैं।

इससे क्या मिल सकता है

सुरक्षित होने का एहसास। आज की भाषा में कहें तो अग्निदेव की रक्षा है — अच्छी साफ़-सफ़ाई, टीके, साफ़-सुथरा खाना और समय पर जाँच।

हर तरह से रक्षा

त्रिशूल से हमारी रक्षा करो

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके ।घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च ॥

देवी माहात्म्य 4.24

अर्थ

हे देवी, अपने त्रिशूल और तलवार से हमारी रक्षा करो। अपने घंटे की ध्वनि और धनुष की डोरी की टंकार से हमारी रक्षा करो।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

रक्षा का एक जाना-माना श्लोक। ध्यान दीजिए, इसमें घंटे की ध्वनि रक्षा करती है — गर्भ संस्कार में ध्वनि पर जो ज़ोर है, उससे इसका सुंदर मेल है।

इससे क्या मिल सकता है

हिम्मत का एहसास। चाहें तो जप करते समय हल्के-हल्के एक छोटी घंटी बजाइए।

यह भी देखें: प्रेगनेंसी में दुर्गा सप्तशती

मातृत्व का सम्मान

माँ के रूप में देवी

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

देवी माहात्म्य, अध्याय 5

अर्थ

जो देवी सभी प्राणियों में माँ के रूप में बसी हैं, उन्हें मेरा बार-बार प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

आप माँ बनने जा रही हैं। यह श्लोक मातृत्व को ही दिव्य मानकर उसका सम्मान करता है।

इससे क्या मिल सकता है

अपनी नई भूमिका को लेकर गर्व और मन की शांति।

यह भी देखें: या देवी सर्वभूतेषु: गर्भावस्था के लिए 11 मंत्र

माँ और शिशु

स्कंदमाता – गोद में शिशु लिए माँ

संस्कृत विद्वान की जाँच बाक़ी है

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया ।शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ॥

नवदुर्गा ध्यान श्लोक (नवरात्रि का 5वाँ दिन)

अर्थ

सिंह के आसन पर विराजमान, हाथों में कमल लिए, स्कंद की माँ, यशस्विनी स्कंदमाता सदा शुभ करें।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

स्कंदमाता को गोद में नन्हे स्कंद के साथ दिखाया जाता है। नवदुर्गा में यही रूप मातृत्व से सबसे गहराई से जुड़ा है।

इससे क्या मिल सकता है

माँ और शिशु की एक प्यार भरी छवि, जिसे आप मन में बसा सकें।

गर्भावस्था पर आशीर्वाद

सर्वमंगल मांगल्ये

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

देवी माहात्म्य 11.10

अर्थ

हे मंगलमयी, सारे मंगल का स्रोत, हर कामना पूरी करने वाली, हमें शरण देने वाली गौरी, नारायणी — तुम्हें हमारा प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

देवी के सबसे जाने-पहचाने श्लोकों में से एक, जिसे पूरा परिवार आसानी से बोल सकता है।

इससे क्या मिल सकता है

यह एहसास कि पूरी गर्भावस्था पर आशीर्वाद बना हुआ है।

यह भी देखें: प्रेगनेंसी में दुर्गा सप्तशती

रात में लगने वाला डर

डर पास नहीं फटकता

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।महाबीर जब नाम सुनावै ॥

हनुमान चालीसा, चौपाई 24 · अवधी

अर्थ

जब महावीर हनुमान का नाम लिया जाता है, तो भूत-पिशाच पास नहीं आते।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

पारंपरिक परिवार बुरे सपनों और रात के डर से बचने के लिए इसका पाठ करते हैं। गर्भावस्था में ये दोनों आम हैं।

इससे क्या मिल सकता है

रात में डर कम लगना। अगर बुरे सपने या डर बहुत ज़्यादा हों, तो अपने डॉक्टर को बताइए।

सबसे अच्छा समय
सोते समय

यह भी देखें: प्रेगनेंसी में हनुमान चालीसा

गर्भ की रक्षा

गर्भरक्षाम्बिका गायत्री

संस्कृत विद्वान की जाँच बाक़ी है

ॐ गर्भरक्षाम्बिकायै च विद्महे मङ्गलदेवतायै च धीमहि ।तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥

गर्भरक्षाम्बिका का पारंपरिक गायत्री रूप (मंदिर परंपरा)

अर्थ

हम गर्भ की रक्षा करने वाली माँ को जानते हैं। हम सारे मंगल की देवी का ध्यान करते हैं। वे देवी हमें राह दिखाएँ और हमारी रक्षा करें।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

गर्भरक्षाम्बिका की प्रार्थना का छोटा और आसान रूप, रोज़ बोलने के लिए।

इससे क्या मिल सकता है

रोज़ के लिए रक्षा की एक छोटी-सी प्रार्थना।

जपने का तरीका
11 या 21 बार

रक्षा (स्कंद परंपरा)

ॐ शरवणभवाय नमः

ॐ शरवणभवाय नमः ॥

स्कंद (मुरुगन) परंपरा

अर्थ

शरवण के सरकंडों में जन्मे बालक स्कंद को मेरा प्रणाम।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

स्कंद, स्कंदमाता के लाडले बालक हैं (देखें श्लोक “स्कंदमाता – गोद में शिशु लिए माँ”)। दक्षिण भारत में गर्भावस्था के दौरान यह छोटा मंत्र बहुत प्रचलित है।

इससे क्या मिल सकता है

एक छोटा, लयबद्ध जप, जिसे दोहराना आसान है।

जपने का तरीका
माला फेरते हुए 108 बार, या 11 बार