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अर्थ सहित 5 श्लोक

प्रेगनेंसी में हनुमान चालीसा

क्या गर्भावस्था में हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं? हाँ, पढ़ सकती हैं। बहुत-सी माँएँ शुरुआती हफ़्तों से लेकर आख़िरी दिनों तक रोज़ इसका पाठ करती हैं, और घर की दादी-नानी अक्सर हिम्मत के लिए यही सलाह देती हैं। कुछ परिवारों में पाठ को लेकर अपने नियम होते हैं — आपके घर में हों, तो उन्हीं को मानिए। ख़ुद न पढ़ पाएँ, तो सुन लीजिए या घर में किसी से पढ़वा लीजिए। सुनना भी उतना ही अच्छा है।

पूरी चालीसा में चालीस चौपाइयाँ हैं, और शुरुआत व आख़िर में दोहे। यहाँ उसकी पाँच सबसे जानी-मानी पंक्तियाँ अर्थ के साथ दी गई हैं: बल, बुद्धि और विद्या माँगने वाला शुरुआती दोहा; रात के डर और ढीली तबीयत वाले दिनों के लिए दो चौपाइयाँ; वह पंक्ति, जिसे बहुत-से परिवार प्रसव कक्ष के बाहर जपते हैं; और समापन का दोहा। पूरी चालीसा पढ़ना भारी लगे, ख़ासकर तीसरी तिमाही में, तो कोई एक पंक्ति धीरे-धीरे 3 या 11 बार बोल लेना काफ़ी है। पीठ को सहारा देकर आराम से बैठिए और साँस सहज रखिए।

‘नासै रोग हरै सब पीरा’ शक्ति की प्रार्थना है, दवा नहीं। कोई भी चेकअप न छोड़िए; डॉक्टर की दी हुई गोलियाँ और बताया गया इलाज जारी रखिए। ख़ून आए, दर्द हो या मन में कोई भी चिंता हो, तो पाठ पूरा होने का इंतज़ार किए बिना तुरंत डॉक्टर को फ़ोन कीजिए। ज़रूरी सूचना पढ़ें

थकान भरे दिनों में मन की ताक़त

मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

हनुमान चालीसा, शुरुआत का दोहा 2 · अवधी

अर्थ

अपनी बुद्धि को कमज़ोर जानकर मैं पवनपुत्र हनुमान को याद करती हूँ। मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए, और मेरे कष्ट दूर कीजिए।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

शुरुआती हफ़्तों की थकान में यह मन की ताक़त के लिए एक विनम्र प्रार्थना है।

इससे क्या मिल सकता है

मन थोड़ा हल्का होता है और सहारा मिलने का एहसास होता है।

सबसे अच्छा समय
सुबह जागते ही, या जब भी मन बेचैन हो
जपने का तरीका
एक श्लोक, 3–11 बार। 5 मिनट का छोटा-सा अभ्यास काफ़ी है
कौन जप सकता है
माँ; थकान वाले दिनों में परिवार पढ़कर सुना सकता है
सबसे सही सप्ताह
4–13 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह जी मिचलाने का इलाज नहीं है। बहुत ज़्यादा उल्टी हो, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

विषय: पहली तिमाही में राहत

रात में लगने वाला डर

डर पास नहीं फटकता

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।महाबीर जब नाम सुनावै ॥

हनुमान चालीसा, चौपाई 24 · अवधी

अर्थ

जब महावीर हनुमान का नाम लिया जाता है, तो भूत-पिशाच पास नहीं आते।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

पारंपरिक परिवार बुरे सपनों और रात के डर से बचने के लिए इसका पाठ करते हैं। गर्भावस्था में ये दोनों आम हैं।

इससे क्या मिल सकता है

रात में डर कम लगना। अगर बुरे सपने या डर बहुत ज़्यादा हों, तो अपने डॉक्टर को बताइए।

सबसे अच्छा समय
सोते समय
जपने का तरीका
11 या 21 बार। परंपरा के अनुसार देवी के श्लोक शुक्रवार को जपे जाते हैं
कौन जप सकता है
माँ और परिवार
सबसे सही सप्ताह
4–40 सप्ताह (ख़ासकर 4–20)

सच कहें तोइससे रक्षा होती है, यह एक पारंपरिक मान्यता है। आपकी असली रक्षा डॉक्टरी देखभाल है। ख़ून आए या दर्द हो, तो इलाज में कभी देर न करें।

विषय: गर्भ रक्षा

तबीयत ठीक न होने पर शक्ति

नासै रोग हरै सब पीरा

नासै रोग हरै सब पीरा ।जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥

हनुमान चालीसा (तुलसीदास), चौपाई 25 · अवधी

अर्थ

जो वीर हनुमान का नाम लगातार जपता है, उसके रोग नष्ट हो जाते हैं और सारी पीड़ा दूर हो जाती है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

बहुत-से भारतीय घरों में हनुमान चालीसा सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली प्रार्थना है, और दादी-नानी अक्सर गर्भावस्था में इसे पढ़ने की सलाह देती हैं।

इससे क्या मिल सकता है

सुकून और हिम्मत। यह शक्ति के लिए प्रार्थना है, दवा नहीं; डॉक्टर ने जो इलाज और देखभाल बताई है, उसे जारी रखें।

सबसे अच्छा समय
सुबह जागते ही, या जब भी मन बेचैन हो
जपने का तरीका
एक श्लोक, 3–11 बार। 5 मिनट का छोटा-सा अभ्यास काफ़ी है
कौन जप सकता है
माँ; थकान वाले दिनों में परिवार पढ़कर सुना सकता है
सबसे सही सप्ताह
4–13 सप्ताह

सच कहें तोइससे मन कुछ शांत हो सकता है। यह जी मिचलाने का इलाज नहीं है। बहुत ज़्यादा उल्टी हो, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

विषय: पहली तिमाही में राहत

प्रसव कक्ष के बाहर परिवार का सहारा

संकट कटै मिटै सब पीरा

संकट कटै मिटै सब पीरा ।जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥

हनुमान चालीसा, चौपाई 36 · अवधी

अर्थ

जो महाबली हनुमान को याद करता है, उसके सारे संकट कट जाते हैं और सारी पीड़ा मिट जाती है।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

एक जानी-पहचानी पंक्ति, जिसे बहुत-से परिवार प्रसव कक्ष के बाहर जपते हैं।

इससे क्या मिल सकता है

परिवार शांत रहे, तो माँ को सहारा मिलता है।

सबसे अच्छा समय
प्रसव की शुरुआत में और दर्द की लहरों के बीच
जपने का तरीका
हर बार साँस छोड़ते हुए एक छोटी-सी पंक्ति। प्रसव के समय साथ रहने वाले इसे आपके कान में धीरे से कह सकते हैं
कौन जप सकता है
बाहर इंतज़ार कर रहा परिवार
सबसे सही सप्ताह
37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय

सच कहें तोदर्द से राहत (एपिड्यूरल, शरीर की स्थिति बदलना, मालिश) आपका हक़ है; अपनी मर्ज़ी से इसका सहारा लें।

विषय: प्रसव का समय

हृदय में हनुमान

पवन तनय संकट हरन

पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप ।राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

हनुमान चालीसा, अंतिम दोहा · अवधी

अर्थ

हे पवनपुत्र, संकट हरने वाले, मंगल के साक्षात रूप! कृपया राम, लक्ष्मण और सीता के साथ मेरे हृदय में बसिए।

हमने यह श्लोक क्यों चुना

यह हनुमान चालीसा की समापन प्रार्थना है — इतनी छोटी कि प्रसव के दिन भी आसानी से बोली जा सके।

इससे क्या मिल सकता है

हिम्मत और सुकून।

सबसे अच्छा समय
प्रसव की शुरुआत में और दर्द की लहरों के बीच
जपने का तरीका
हर बार साँस छोड़ते हुए एक छोटी-सी पंक्ति। प्रसव के समय साथ रहने वाले इसे आपके कान में धीरे से कह सकते हैं
कौन जप सकता है
प्रसव के समय साथ रहने वाले और माँ
सबसे सही सप्ताह
37–40+ सप्ताह और प्रसव के समय

सच कहें तोकिसी भरोसेमंद व्यक्ति के प्यार भरे, जाने-पहचाने शब्द डर कम कर सकते हैं। साँस कैसे लें, इस बारे में सबसे पहले अपने डॉक्टर, दाई या नर्स की बात मानें।

विषय: प्रसव का समय